मेसी ऐसा करिशमाई खिलाड़ी जिसने खेल के मैदान पर भी जादूगरी दिखाई

  • मेसी मौजूदा दौर में खेल की दुनिया का सबसे बड़ा नाम हैं
  • मेसी के इस मुकाम के पहुंचने तक की कहानी संघर्षो से भरी हुई हैं
  • मेसी ने खेल की दुनिया में नए मुकाम स्थापित किए हैं

By: Piyush Jayjan

Updated: 05 Dec 2019, 08:02 AM IST

जब बात दुनिया के सबसे पसंदीदा खेल की जाएं तो जाहिर सी बात है कि सबसे पहले फुटबॉल का ही जिक्र होगा। फुटबॉल के रोमांच की दीवानगी फैंस के सिर चढकर बोलती हैं यहीं वजह है कि लियोन मेसी, रोनाल्डो और नेमार के चाहने वाले आपको भारत समेत दुनिया के हर कोने में मिल जाएंगे।

बार्सिलोना के सुपर स्टार लियोनल मेसी ने देर रात एक इवेंट के दौरान अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी पुर्तगाली खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो और नीदरलैंड के वर्जिल वान दिज्जक को पछाड़कर रिकॉर्ड छठी बार बैलोन डि ओर का खिताब अपने नाम किया।

पिछले 11 साल में मेसी (2009, 2010, 2011, 2012, 2015) और रोनाल्डो (2008, 2013, 2014, 2016, 2017) ने पांच-पांच बार यह पुरस्कार अपनी झोली मे ड़ाला था। मेसी इस साल फीफा के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर का पुरस्कार भी जीत चुके हैं।

फुटबॉल के मैदान पर यूं तो मेसी के नाम ढेरो रिकॉर्ड दर्ज है लेकिन उनके इस मुकाम तक पहुंचने का सफर सबसे अपने आप में अदभुत है। एक बड़ी चर्चित कहावत है कि अगर किसी खिलाड़ी की महानता को अंदाजा लगाना हो तो पहले ये जान लीजिए कि उस खिलाड़ी के साथ कितनी दिलचस्प और अनोखी कहानियां जुड़ी हैं।

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अगर इस कहावत को मेसी पर लागू किया जाएं तो ये फुटबॉल की दुनिया के जादूगर मेसी पर एकदम सही बैठती है। लियोन मेसी वो खिलाड़ी हैं जिसके बाएं पैर से हिट की हुई गेंद को रोकना शायद भगवान के लिए भी आसान नहीं हैं। इसमें कोई दोराय नहीं है कि ये बात बढ़ा-चढ़ाकर ही कही गई है।

लेकिन उनके खेल का रसूख ही कुछ ऐसा है जिसके आगे बाकी खिलाड़ी पानी भरते हुए नज़र आते हैं। मेसी के फुटबॉल के प्रति जुनून का अंदाजा तो हम शायद ही लगा सकें। मगर उनके काबिलियत के कुछ अनूठे किस्से तो हमें जरूर जानने चाहिए।

मेसी की शख्सियत के बारे में जानने के लिए आपको ढ़ेरो कहानियां और किस्से मिल जाएंगे। लेकिन लियोन मेसी के बचपन से जुड़ा एक वाकया आपको हैरत में ड़ाल देगा जब आपको ये मालूम होगा कि एक आम लड़का खेल की दुनिया का इतना बड़ा सरताज आखिरकार बना कैसे।

दरअसल मेसी को एक टूर्नामेंट में हिस्सा लेना था। लेकिन अपनी गलती से वे खुद को बाथरूम में लॉक कर बैठे। जब मेसी को कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने बाथरूम की खिड़की का शीशा तोड़ दिया। फिर क्या मेसी मैदान पर दौड़कर जब तक पहुंचे तो हाफटाइम तक उनकी टीम 1-0 से पीछे थी और मैच हारने की कगार पर खड़ी थी।

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मगर जैसे ही मेसी मैदान ने मैदान में कदम रखा तो विरोधी टीम की हालत खस्ता हो गई। मैदान में मेसी की चीते जैसी फुर्ती और मैच में अंत तक संघर्ष करने की क्षमता ने उन्होंने बाकी खिलाड़ियों से मुख्तलिफ पहचान दिलाई। मेसी के मैदान पर आने के बाद विरोधी टीम के खिलाड़ी एक भी गोल नहीं कर सके।

उनकी टीम ने मैच 3-1 से जीत लिया और ये तीनों गोल मेसी ने किए। इसमें कोई दोराय नहीं है कि खेल के मैदान पर मेसी का कोई दूसरा सानी नहीं है। मेसी ने खेल के मैदान पर जो कारनामें किए वो बहुत मुश्किल से हासिल किए जाते हैं।

अर्जेंटीना के सैंटा फे का शहर रोजारियो को दुनिया के महान क्रांतिकारी चे ग्वेरा के जन्मस्थल के रूप में जाना जाता है। लेकिन इसी शहर को फिर नई पहचान दी फुटबॉल की दुनिया के सबसे करिशमाई खिलाड़ी ने जिसके पैरों ने दिखाया कि अपने हुनर से खेल को किस मुकाम तक पहुंचाया जा सकता है।

मेसी जैसे खिलाड़ी कई दशकों में एक बार ही दिखाई देते है। बात साल 1987 की है जब पूरा शहर जश्न में डूबा था। एक साल पहले अर्जेंटीना की वर्ल्ड कप की जीत का खुमार अभी पूरी तरह उतरा भी नहीं था। ये उसी वर्ल्ड कप का जश्न था जिसे मैराडोना के करिश्माई गोल के लिए याद किया जाता है।

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उस वक्त रोजारियो के हर मां-बाप की ख्वाहिश ये थी कि उनके घर अगला मैराडोना जन्म ले। कुछ वक़्त इसी रोजारियो शहर में 24 जून 1987 को एक बच्चे का जन्म हुआ जिसका नाम मैराडोना से भी बड़े सुनहरे अक्षरों में लिखा गया। इस बच्चे का नाम रखा गया- लियोनेल एंड्रेस मेसी।

एक और बड़ी प्रचलित कहावत है कि पूत के पांव पालने में दिखने लगते है। मेसी भी इसी कहानी को सच करते हैं। कुल छह साल की उम्र में मेसी ने न्यूएल्स ओल्ड बॉयज क्लब के साथ खेलना शुरू कर दिया। मेसी के पहले कोच उनके पिता ही थे। केवल छह साल की उम्र में ही मेसी की प्रतिभा ने सबको अचम्भित कर दिया।

जिस वक़्त मेसी की हुनर की चर्चा अर्जेंटीना से निकलकर पूरी दुनिया में फैल रही थी। तभी लोग उन्हें भविष्य का फुटबॉलर कहने लगे थे। लेकिन नियति ने ऐसी पलटी कि जिससे मेसी का भविष्य ही अंधकार में जाता हुआ दिखाई देने लगा।

जब मेसी 10 साल के थे तो अचानक मालूम हुआ वे ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी नामक खतरनाक बिमारी से जूझ रहे हैं। अगर उनका जल्द इलाज नहीं किया गया तो उनके शरीर का विकास नहीं हो पाएगा। ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी का इलाज बहुत दर्द से भरा हुआ था।

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उनके इलाज में हर महीने करीब डेढ़ हजार डॉलर का खर्च आता था। इस लिहाज से इस बीमारी का इलाज भी काफी महंगा था। जो कि मेसी के परिवार के लिए उठाना काफी मुश्किल हो रहा था। ये मेसी की जिंदगी का सबसे कठिन दौर था।

इस खतरनाक बीमारी की वजह से मेसी के सपने दम तोड़ रहे थे। इस बीच मेसी के पिता से किसी ने कहा कि बार्सिलोना प्रतिभावान फुटबॉलरों के इलाज का खर्च भी वहन करता है। इस क्लब ने मेसी के इलाज का खर्च उठाने का वादा कर लिया।

लेकिन इसमें भी एक पेंच फंसा था। वो ये कि बार्सिलोना ने ये शर्त रखी कि मेसी और उनके परिवार को स्पेन में आकर ही बसना होगा। मेसी का परिवार मान गया लेकिन यह कॉन्ट्रैक्ट पक्का करने के लिए उस समय कागज तक नहीं था।

आखिर में यह कॉन्ट्रैक्ट एक नैपकीन पर साइन किया गया। कहने को भले ही वो यूज कर डस्टबिन में फेंक दी जाने वाली नैपकिन हो मगर किसी को भला इस बात का अंदाजा कहां रहा होगा कि ये नैपकिन आज दुनिया की सबसे कीमती चीज बन जाएगी।

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इस तरह मेसी का फुटबॉल सफर बार्सिलोना के साथ शुरू हुआ। महज17 साल की उम्र में वह बार्सिलोना के लिए खेलने लगे। इसके बाद मेसी ने भला पीछे मुड़कर कहां देखने वाले थे। यहीं वजह है कि मेसी का सम्मान उनका विरोधी खिलाड़ी भी करता है। अर्जेंटीना के लिए खेलते हुए 2008 में उन्होंने ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीता।

मेसी ने जितना कुछ हासिल किया है उसे कोई आम फुटबॉल खिलाड़ी हासिल नहीं कर सकता। मेसी के रिकॉर्ड इतने बड़े हो चुके है कि भविष्य में उनकी बराबरी पर पहुंचने की बात भी सोचना किसी के लिए सपने से कम नहीं होगा।

अब मेसी का कमाल ऐसा हो चुका है कि उनका कोई भी नया कारनाम चौंकाता नहीं है। हालांकि इतना सब कुछ हासिल करने के बाद भी एक टीस उनके मन में भी होगी कि वो अर्जेंटीना को फुटबॉल विश्व कप का खिताब नहीं जिता सकें।

इसलिए दुनिया के तमाम दिग्गज उनकी आलोचना करने से नहीं चूकते हैं। लेकिन आलोचना करने वालों को भी ये बात समझनी होगी कि अगर कोई खिलाड़ी विश्वकप जीतने से ही महान होता है तो दुनिया में किसी और खिलाड़ी के मैदान पर हासिल कई गई अनोखी उपलब्धियों का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा।

मेसी की आलोचना करने वाले अक्सर ये भूल जाते है कि उन्होंने खेल को ऐसे मुकाम पर पहुंचाया है जहां इस खेल का रूतबा ही अलग बन चुका हैं। उनके हौंसले की कहानी ने न जानें कितने नए सपनों को उम्मीद दी है। इसलिए दुनिया भर के खेलप्रेमियों की ये ही ख्वाहिश होगी कि मेसी की जादूगरी का जलवा यूं ही बरकरार रहे।

 

Piyush Jayjan
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