गुजरात के इस राजकुमार ने डंके की चोट पर कहा था- हां मैं हूं समलैंगिक! विरोध में पेड़ पर टांग दिया करते थे कॉन्डम

गुजरात के इस राजकुमार ने डंके की चोट पर कहा था- हां मैं हूं समलैंगिक! विरोध में पेड़ पर टांग दिया करते थे कॉन्डम

Sunil Chaurasia | Publish: Sep, 06 2018 04:57:59 PM (IST) हॉट ऑन वेब

मानवेंद्र ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि लोग समलैंगिकता को पाश्चात्य की देन बताते हैं, जो सरासर गलत है।

नई दिल्ली। भारत के उच्चतम न्यायालय ने सहमति से समलैंगिक संबंध बनाने को जायज़ करार दिया है। समलैंगिकता को आपराधिक बताने वाली धारा 377 पर आज कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। वैसे तो समलैंगिकों के सम्मान की इस लड़ाई में लाखों लोगों ने संघर्ष किया, लेकिन एक शख्स ऐसा भी है जिसने समलैंगिक अधिकारों के लिए संघर्ष करते-करते कई साल बिता दिए। यह शख्स कोई आम इंसान नहीं बल्कि एक राजशाही परिवार से ताल्लुक रखता है। इस शख्स का नाम मानवेंद्र सिंह गोहिल है, जो गुजरात के राजपीपला के शाही परिवार के राजकुमार हैं।

 

समलैंगिकों को सुरक्षित संबंध बनाने के लिए किया जागरूक

धारा 377 के खिलाफ जंग लड़ने में कई साल लग गए, और अब आखिरकार उनका संघर्ष रंग लाया। दरअसल मानवेंद्र स्वयं समलैंगिक हैं, जो समलैंगिकों के अधिकार और सम्मान के लिए लड़ते रहे। उन्होंने समलैंगिकों के सम्मान के लिए एक चैरिटी भी शुरू की थी। इस चैरिटी के लिए काम के दौरान वे कॉन्डम को पेड़ पर लटका दिया करते थे। मानवेंद्र ने एड्स की रोकथाम के लिए भी काफी काम किया। देश में जब समलैंगिकता को कानूनन अपराध बताया जा रहा था, ऐसे समय में मानवेंद्र ने समलैंगिक लोगों को सुरक्षित यौन संबंध के प्रति जागरुक किया और उन्हें अधिकारों के बारे में बताया।

 

समलैंगिकता की शुरूआत भारत से ही हुई!

मानवेंद्र ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि लोग समलैंगिकता को पाश्चात्य की देन बताते हैं, जो सरासर गलत है। मानवेंद्र ने कहा कि भारत के प्राचीन मंदिरों में मौजूद मूर्तियां समलैंगिकता का सबूत हैं। इसके अलावा उन्होंने कामसूत्र के हवाले से कहा कि समलैंगिकता की शुरूआत भारत में ही हुई। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 377 पर सुनाया गया ये फैसला मानवेंद्र के साथ-साथ तमाम समलैंगिकों के लिए उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। सालों से चले आ रही इस गलत भावना का आज अंत हो गया और समलैंगिकों को खुलकर प्यार करने का अधिकार भी मिल गया।

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