Sawan 2020: वो शिवलिंग जहां जाने पर मरा हुआ इंसान भी हो जाता हैं जिन्दा, जानें इस स्थान का अदभुत रहस्य

Sawan 2020: आज हम आपको ऐसे ही एक चमत्कारी शिवलिंग (Shivling) के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में यह मान्यता है कि कोई भी मरे हुए व्यक्ति के शरीर को जब इस शिवलिंग (Shivling) के पास लेकर जाया जाता है तो उस शरीर की आत्मा उसी शरीर में दोबारा प्रवेश कर जाती है और वो व्यक्ति दोवारा से जीवित हो उठता है

 

By: Vivhav Shukla

Published: 20 Jul 2020, 10:38 PM IST

नई दिल्ली। सावन (savan 2020) की शिवरात्रि (shivratri) का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व होता है। इस महीने को सबसे पवित्र महिने का दर्जा प्राप्त है। सावन में भगवान शिव (Lord Shiv) की उपासना करने से जीवन में खुशहाली आती है। साथ शिवलिंग पर जल चढ़ाने से लाभ मिलता है। पुराणों के मुताबिक भगवान भोले के दर्शन मात्र से ही सारे दुख दुर हो जाते हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक चमत्कारी शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में यह मान्यता है कि कोई भी मरे हुए व्यक्ति के शरीर को जब इस शिवलिंग के पास लेकर जाया जाता है तो उस शरीर की आत्मा उसी शरीर में दोबारा प्रवेश कर जाती है और वो व्यक्ति दोवारा से जीवित हो उठता है। ये अदभुत स्थान यमुना नदी के तट से बर्निगाड नामक जगह से केवल 4-5 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित है।

युधिष्ठिर ने इस शिवलिंग को स्थापित किया था

इतना ही नहीं इस जगह के बारे में लोगों में यह बात भी मशहूर है कि खुदाई करते समय इस जगह से हजारों शिवलिंग मिले हैं। आसपास के लोगों का कहना है कि ये वही जगह है जहां पर महाभारत काल के समय कौरवों ने पांडवों के वध के लिए लाक्षागृह का निर्माण कराया था लोग बताते हैं महाभारत काल से इस मंदिर को लेकर यही कथा चली आ रही है। कथा के अनुसार अज्ञात वास के समय धर्मराज युधिष्ठिर ने इस शिवलिंग को स्थापित किया था।

महामंडेश्वर शिवलिंग (mahamandaleshwar)

ये शिवलिंग महामंडेश्वर (mahamandaleshwar) नाम से जाना जाता है। इस जगह पर युधिष्ठिर ने एक भव्य मंदिर का निर्माण भी करवाया था। इस शिवलिंग के पास दो द्वारपाल पश्चिम की तरफ मुंह किए हुए हैं अगर यहां कोई शव को लेकर आता है तो वो कुछ पल के लिए जिंदा हो जाता है और उसके अन्दर थोड़ी देर के लिए ही सही प्राण का संचार हो जाता है।

उत्तराखंड की राजधानी, देहरादून (Dehradun) से कुछ दूरी पर लाखामंडल नामक स्थान पर Lakhamandal shiv mandir स्थित है। मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में यहां पांडवों को जलाकर मारने के लिए दुर्योधन ने लाक्षागृह बनाया था। अज्ञातवास के दौरान युधिष्ठर ने शिवलिंग की स्‍थापना इसी स्‍थान पर की थी।

डेड बॉडी में आ जाती है जान

माना जाता है कि कोई भी मृत्यु को प्राप्त किया हुआ इंसान इन द्वारपालों के सामने रख दिया जाता था तो पुजारी द्वारा अभिमंत्रित जल छिड़कने पर वह जीवित हो जाता था। इस प्रकार मृत व्यक्ति यहां लाया जाता था और कुछ पलों के फिर से ‌जिंदा हो जाता था। जीवित होने के बाद उक्त व्यक्ति शिव नाम लेता है व गंगाजल ग्रहण करता है। गंगाजल ग्रहण करते ही उसकी आत्मा फिर से शरीर त्यागकर चली जाती है। मंदिर की पिछली दिशा में दो द्वारपाल पहरेदार के रूप में खड़े नजर आते हैं, दो द्वारपालों में से एक का हाथ कटा हुआ है जो एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है।

Vivhav Shukla
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