पांडवों का वंशज बताकर कांटों पर लेटते हैं ये लोग, मन्नत पूरी करने के लिए करते हैं खतरनाक काम

  • Weird Rituals : मध्य प्रदेश के बैतूल गांव में रज्जड़ समुदाय की ओर से निभाई जाती है ये परंपरा
  • मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में पांडवों ने अपने सत्य की परीक्षा देने के लिए किया था ऐसा काम

By: Soma Roy

Published: 26 Dec 2020, 05:17 PM IST

नई दिल्ली। भारत को आस्था और मान्यताओं का देश माना जाता है। इसलिए यहां कई तरह की परंपराएं निभाई जाती हैं। इनमें से कुछ रिवाज काफी अजीबो-गरीब भी होते हैं। ऐसी ही कुछ परंपरा को बैतूल जिला स्थित सेहरा गांव के लोग निभाते हैं। वे खुद को पांडवों का वंशज बताते हैं और भगवान को खुश करने के लिए कांटों की सेज पर लेटते हैं। वे खुद को तकलीफ देकर सच की परीक्षा देते हैं। गांव वालों का मानना है कि ऐसा करने से उनकी मन्नतें पूरी होंगी।

ऐसे अनोखे रिवाज रज्जड़ समाज के लोग निभाते हैं। मध्य प्रदेश में स्थित बैतूल गांव के लोगों का कहना है कि प्राचीन काल में पांडवों ने कुछ इसी तरह से कांटों पर लेटकर सत्य की परीक्षा दी थी। उनकी उसी परंपरा को उनके वंशज कई साल से निभा रहे हैं। ऐसा करने पर देवी मां खुश होती हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। इससे गांव वालों की रक्षा भी होती है। रज्जड़ समाज के लोग ये रिवाज अगहन मास के दिन निभाते हैं। वे नुकीले कांटों की टहनियां तोड़कर लाते हैं। फिर उन टहनियों की पूजा की जाती है। इसके बाद एक-.एक करके ये लोग नंगे बदन कांटों की सेज पर लेटकर अपने सत्य और भक्ति का परिचय देते हैं। ये पर्व पांच दिनों का होता है। इस रिवाज के जरिए रज्जड़ समाज के लोग अपनी बहन को ससुराल विदा करने का जश्न मनाते हैं। पर्व के आखिरी दिन वें कांटों की सेज पर लेटते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व को मनाने के पीछे एक कहानी है। बताया जाता है कि एक बार पांडव पानी के लिए भटक रहे थे। तभी उन्हें एक नाहल समुदाय का व्यक्ति दिखाई दिया। पांडवों ने उससे पानी के स्त्रोत के बारे पूछा। तभी नाहल ने उनसे शर्त रखी कि पानी के स्त्रोत के बारे में बताने से पहले उन्हें अपनी बहन की शादी नाहल से करानी होगी। चूंकि पांडवों की कोई बहन नहीं थी। ऐसे में उन्होंने भोंदई नाम की लड़की को अपनी बहन बना लिया और पूरे रीति.रिवाजों से उसकी शादी नाहल के साथ करा दी। विदाई के वक्त नाहल ने पांडवों को कांटों पर लेटकर अपने सच्चे होने की परीक्षा देने को कहा। अपनी बहन की खुशी के लिए सभी पांडव एक-एक करके कांटों पर लेट गए। तभी से ये परंपरा उनके वंशजों द्वारा निभाई जाती है।

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