हरियाली बढाकर ऑक्सीजन की कमी को पूरा कर रहे हैं पीपल बाबा

इस साल World Earth Day पर कोविड-19 महामारी के बाद भी विश्व पृथ्वी दिवस को मनानें में कसर नहीं छोड़ा जा रहा है। हर साल इस दिन को ढेर सारी गतिविधियों का आयोजन किया जाता था, लेकिन यह लगातार दूसरा साल है जब इस दिन को ऑनलाइन आयोजन के रूप में मनाया जा रहा है। इस बार पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से कायम करने पर जोर दिया जा रहा है।

By: Saurabh Sharma

Updated: 22 Apr 2021, 11:56 PM IST

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के दूसरे वेव के कारण पूरे देश की स्थिति काफी भयावह हो गई है, सडकों पर सन्नाटा छाया हुआ है। देश के चारों कोनों से ऑक्सीजन की कमी की खबरें आ रही हैं, अस्पतालों में अफरा-तफरी का महौल है। ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत क्यों आन पड़ी? अगर जरूरत आई तो कमी किस वजह से हुई है इस पर निरंतर बहस जारी है? देश के नामी पर्यावरणकर्मी पीपल बाबा नें विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर पर्यावरण में हुए परिवर्तन को समझाते हुए कहा है कि देश के हर नागरिक को हरियाली बढानें की दिशा में कार्य करने की तत्काल जरूरत है। हरियाली बढानें से ही कोरोना जैसी महामारी को दुनिया से दफा किया जा सकता है।

पूरे देश में मनाया जा रहा है World Earth Day
इस साल World Earth Day पर कोविड-19 महामारी के बाद भी विश्व पृथ्वी दिवस को मनानें में कसर नहीं छोड़ा जा रहा है। हर साल इस दिन को ढेर सारी गतिविधियों का आयोजन किया जाता था, लेकिन यह लगातार दूसरा साल है जब इस दिन को ऑनलाइन आयोजन के रूप में मनाया जा रहा है। इस बार पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से कायम करने पर जोर दिया जा रहा है। कोरोना वायरस इस दुनिया में क्यों तबाही का सबब बन रहा है? क्यों इस वायरस के आक्रमण से मनुष्य खुद को नहीं बचा पा रहा है? इसकी मुख्य वजह हमारे हवा में ऑक्सीजन की कमी है। जब भी ऑक्सीजन की कमी होती है हमारी रोग प्रतिरोधन क्षमता कम हो जाती है। अनाक्सी स्वसन करने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं के लिए अनुकूल माहौल बनता है। कोरोना के सन्दर्भ में भी यही बात उजागर होती है।

इस कम हो रहा है लोगों का इम्यून सिस्टम
पीपल बाबा के अनुसार कोरोना जैसे आपदा पृथ्वी के लोगों के के लिए खतरा बनकर कैसे उपस्थित हुए? इसकी पड़ताल करें तो हम इसके पीछे घोर लापरवाही और वृक्षों को काटकर निरंतर हो रहे शहरों के विस्तार को देखते हैं। वृक्षों को काटने से ऑक्सीजन स्वतः घट गया और शहरों के बनने से और ज्यादे लोग आकर यहां पर बसने लग गये। जन घनत्व बढ़ने के साथ- साथ ऑक्सीजन के लेवल के घटने से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती जा रही है। 2011 की जनगणना के मुताबिक दिल्ली में देश में सबसे ज्यादे (11394 व्यक्ति प्रति वर्ग किलो मीटर ) जन घनत्व हैं। अगर इस आपदा को देखते हुए लोगों को इसके समाधान से जोड़ा जाए तो कम क्षेत्र में ज्यादा पेड़ लगने की सम्भावना भी दिल्ली में ही होगी।

सरकार को लाना चाहिए पेड़ लगाने का कानून
पीपल बाबा का कहना है कि इस घटना से देश का हर नागरिक सबक लें सरकारें ऐसा क़ानून लाए जिससे देश का हर व्यक्ति देश की हरियाली को बढ़ाने के लिए अपना योगदान दे। हर व्यक्ति अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही एक पेड़ लगाये। हरियाली बढ़ेगी तो पर्यावरण में ऑक्सीजन की मात्रा अपने आप बढ़ेगी ऑक्सीजन के स्तर के बढ़नें से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होगा और कोरोना जैसे वायरस हमारे शरीर पर कोई प्रभाव नही बना सकेंगे, वही उत्तम और अंतिम समाधान होगा।

2.30 करोड़ पेड़ लगा चुके हैं पीपील बाबा
पीपल बाबा का ज्यादातर फोकस पीपल का पेड़ लगाने पर होता है। उनका मानना है कि पीपल का पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देता है। गौरतलब है कि पीपल बाबा नें अपनी टीम की मदद से अब तक 2 करोड़ 30 लाख पेड़ लगाए हैं। इनमें से 1 करोड़ 27 लाख पीपल के पेड़ हैं। पीपल बाबा देशव्यापी हरियाली क्रांति अभियान चला रहे हैं जिससे अब तक 15,000 से ज्यादा स्वयंसेवक जुड़ चुके हैं। इनकी टीम की पहुंच देश के 18 राज्यों के अंतर्गत 202 जिलों तक हो चुकी है।

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