यू हीं विश्व चैंपियन नहीं बनीं पीवी सिंधु, पिता ने किया था ये बड़ा त्याग

यू हीं विश्व चैंपियन नहीं बनीं पीवी सिंधु, पिता ने किया था ये बड़ा त्याग

Shiwani Singh | Updated: 27 Aug 2019, 06:18:57 PM (IST) हॉट ऑन वेब

  • पीवी सिंधु ने बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीत कर रचा इतिहास
  • स्विट्जरलैंड की नोजोमी ओकुहारा को हराया
  • 8 साल की उम्र से खेल रही हैं बैडमिंटन

नई दिल्ली। बैडमिंटन प्लेयर पीवी सिंधु ने बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतकर भारत का मान बढ़ा दिया है। यह खिताब जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उन्होंने 24 अगस्त को स्विट्जरलैंड में हुए बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप-2019 के फाइनल में नोजोमी ओकुहारा को हराकर ये इतिहास रचा। 8 साल की उम्र में बैडमिंटन खेलने वाली इस लड़की को ये सफलता यू हीं नहीं मिली। इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत और मां-बाप का साथ है।

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IMAGE CREDIT: scoopwhoop.com

पीवी सिंधु की इस सफता के पीछे सबसे बड़ा योगदान उनके पिता पीवी रमण का है। सिंधु को हर परिस्थिति में अपने पिता का साथ मिला। उन्होंने अपनी बेट को यह विश्वास दिलाया कि वह जो भी करने की ठानती है उसे कर दिखाती है।

कैन हैं पीवी सिंधु के पिता

 

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उनके पिता पीवी रमण भारतीय वॉलीबॉल टीम के सदस्य भी रह चुके हैं। उन्होंने 1986 के सियोल एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसके अलावा उन्हें वॉलीबॉल में अपने योगदान के लिए साल 2000 में भारत सरकार की तरफ से प्रतिष्ठित 'अर्जुन पुरस्कार'से सम्मानित किया जा चुका है। वे बहुत ही मृदुभाषी प्रवृति के हैं। लेकिन उन्होंने सिंधु को आक्रामक होना सिखाया। शायद आपके लिए ये विश्वास करना कठीन हो लेकिन इसके लिए आपको सिंधु का खेल देखना होगा।

 

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ऐसा कहा जाता है कि सिंधु के अभ्यास करने में मदद से लेकर यह सुनिश्चित करने कि वह प्रशिक्षण लेंगी या नहीं और लेंगी तो कहां से इन सब मामलों में उनके पिता काफी सख्त हैं। जिसका परिणाम है कि आज वे बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप पर अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं।

पीवी सिंधु की जीत पर उनके पिता ने कहा था कि उन्हें पूरा विश्वस था कि उनकी बेटी दुनिया को जीत लेगी। उसका ये खिताब जीतना मेरे लिए बहुल गौरव की बात है। जब वह दो बार सर्वण पदक जितने से चुक गई थी तो मुझे बहुत दुख हुआ था, लेकिन आज वह पहले से शीर्ष पर है। इससे बड़ा पल मेरे लिए कोई नहीं।

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बता दें कि सिंधु के पिता ने अपनी बेटी को इस कामयाबी पर पहुंचाने के लिए ना दिन देखा ना रात। उन्होंने अपनी बेटी के लिए अपना करियर तक दाव पर लगा दिया। सिंधु जहां भी खेलन जाती उनके पिता हमेशा उनके साथ होते थे।सिधु की मां भी एक खिलाड़ी थी। बाद में वह रेलवे की नौकरी करने लगी। लेकिन उन्होंने भी अपनी बेटी को इस मुकाम पर पहुंचाने के लिए सरकारी नौकरी से पहले ही रिटायरमेंट ले लिया।

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