92 दिनों तक Coronavirus से वेंटिलेटर पर लड़ते रहे स्टीव, एक दिन हुआ चमत्कार, ठीक होकर पहुंचे घर

Highlights
-स्टीव व्हाइट (Steve White) कोरोना वायरस (Coronavirus Update) से लंबे समय तक पीड़ित थे
- 92 दिन वो अस्पताल में रह कर जिंदगी से संघर्ष कर रहे थे
- डॉक्टर ने बताया कि उनकी बचने की उम्मीद एक प्रतिशत ही थी

By: Ruchi Sharma

Updated: 22 Jun 2020, 12:18 PM IST

नई दिल्ली. जाको राखे साइयां मार सके ना कोई ... ये कहावत 56 वर्षीय ब्रिटेन (Britain) के स्टीव व्हाइट (Steve White) पर सटीक बैठती है। जिन्होंने 92 दिन मौत से संघर्ष कर विजय पा ली। स्टीव व्हाइट कोरोना वायरस (Coronavirus Update) से लंबे समय तक पीड़ित थे। 92 दिन वो अस्पताल में रह कर जिंदगी से संघर्ष कर रहे थे। डॉक्टर ने बताया कि उनकी बचने की उम्मीद एक प्रतिशत ही थी। लंबे समय से बीमार स्टीव व्हाइट पर किसी को भरोसा नहीं था कि वे ठीक होकर दोबारा अपनी जिंदगी में वापिस आएंगे। 92 दिन अस्पताल में भर्ती थे और वेंटिलेटर पर थे। ठीक होने के बाद 18 जून को स्टीव व्हाइट को डॉक्टर ने डिस्चार्ज किया। वे अब दोबारा अपनी खुशहाल जिंदगी में लौट आए हैं।

19 मार्च से अस्पताल नें थे भर्ती

स्टीव व्हाइट एक डांसर है और दो बच्चों के पिता हैं। कोरोना वायरस महामारी को 92 दिनों तक लड़कर मात देने के बाद ब्रिटेन में इनकी काफी चर्चा हो रही है। कोरोना वायरस से जूझ रहे लोगों को नई उम्मीद देते हुए उन्होंने कहा कि हमें लड़ना नहीं छोड़ना चाहिए। स्टीव को 19 मार्च को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। अप्रैल में डॉक्टर्स ने परिजन से कहा था कि स्टीव कुछ घंटों के ही मेहमान हैं क्योंकि वह कोमा में चले गए हैं।

चमत्कार से कम नहीं ये घटना

स्टीव के मुताबिक मेरे स्वास्थ्य होने के पीछे डॉक्टरों का बड़ा हाथ है। उन्होंने हमेशा अपनी कोशिश जारी रखी। मैंने खुद को उनके हवाले कर दिया था। कोरोना वायरस महामारी को मात देने के बाद अस्पताल में डॉक्टर नर्स इस घटना को किसी चमत्कार से कम नहीं बता रहे हैं। स्टीव के मुताबिक 'फिजियोथैरेपी और चलने-फिरने की प्रैक्टिस से पहले मैंने 67 दिन तो सिर्फ आईसीयू में बिताए। एक लम्बा समय वेंटिलेटर पर बीता जहां कोरोना से जूझ रहे दो तिहाई मरीजों की मौत हो गई थी।'

वेंटिलेटर के बाद कोमा में चले गए थे स्टीव

स्टीव अपनी आपबीती सुनाते हुए कहते हैं "वेंटिलेटर पर 43 दिन बाद मैंने कोमा में चला गया था। जब वापस होश में आया तो अनुभव बेहद डरावना था क्योंकि मुझे कुछ याद नहीं आ रहा था। गले में ट्रैकियोस्टॉमी (गले में चीरा लगाकर ऑक्सीजन देना) के कारण आवाज नहीं निकल पा रही थी। हॉस्पिटल का स्टाफ मुझे शांत रखने की कोशिश कर रहा था।"

खो दी थी उम्मीद

स्टीव के बेटे कैलम के मुताबिक, डॉक्टर्स का कहना था जैसे-जैसे दिन बढ़ रहे थे बचने की उम्मीद घट रही थी। उनका कहना था कि बचने की संभावना 1 प्रतिशत है। हम लोगों ने उम्मीद खो दी थी कि दोबारा पापा को देख पाएंगे, उनके साथ हंस खेल पाएंगे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बीते 24 घंटे में अब तक के सबसे अधिक नए मामले दर्ज किए हैं। संगठन ने बीते 24 घंटे में एक लाख 83 हज़ार नए मामलों की पुष्टि की है। इनमें से 60 फ़ीसदी से अधिक मामले उत्तरी और दक्षिणी अमरीका के हैं। ये मामले ऐसे समय आए हैं जब कई देशों में धीरे-धीरे लॉकडाउन में ढील दिया जाने लगा है। अमरीका अब भी दुनिया का सबसे अधिक प्रभावित देश है। वहां अब तक संक्रमण के कुल 22 लाख 79 हज़ार मामले आ चुके हैं।

Ruchi Sharma
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