National Youth day 2021: इस वजह से स्वामी विवेकानंद की जयंती पर मनाया जाता है राष्ट्रीय युवा दिवस

  • स्वामी विवेकानंद का जन्म 12, जनवरी, 1863 को हुआ था। स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर ही राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है।
  • स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और विचारों से देशभर के युवा प्रोत्साहित हो सकते हैं।

By: Mahendra Yadav

Published: 12 Jan 2021, 08:17 AM IST

12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। इसी दिन स्वामी विवेकानंद का जन्म भी हुआ था। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12, जनवरी, 1863 को हुआ था। स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर ही राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन के दिन ही राष्ट्रीय युवा दिवस क्यों मनाया जाता है। भारत सरकार ने 1985 से हर साल 12 जनवरी यानी स्वामी विवेकानंद की जयंती को देशभर में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

विचार अपनाकर सफलता हासिल करे युवा पीढी
कहते हैं कि युवा देश का भविष्य होते हैं। देश की दशा और दिशा को तय करने में युवाओं का बड़ा योगदान होता है। राष्ट्रीय युवा दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को ये बताना है कि जिस तरह से स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन में सफलता हासिल की, ठीक उसी तरह उनके विचारों को अपनाकर युवा पीढ़ी भी सफलता हासिल करे। इसी वजह से राष्ट्रीय युवा दिवस को स्वामी विवेकानंद की जयंती पर मनाने का निर्णय लिया गया था। स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और विचारों से देशभर के युवा प्रोत्साहित हो सकते हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपनाकर युवा पीढ़ी भी सफलता हासिल कर सकती है।

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विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता है
राष्ट्रीय युवा दिवस के दिन देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन युवा सम्मेलन, प्रतियोगिताएं, संगोष्ठिया और खेल आयोजन सहित कई कार्यक्रम होते हैं। इन कायक्रमों में युवा वर्ग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। हालांकि इस बार कोरोना के चलते ऐसा नहीं हो पाएगा। कई जगहों पर वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

स्वामी विवेकानंद से जुड़ी कुछ बातें
स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता के कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। उनके पिता वश्विनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील थे। नरेंद्र नाथ 1871 में आठ साल की उम्र में स्कूल गए थे। 25 साल की उम्र में वे सन्यासी बन गए थे। संन्यास लेने के बाद इनका नाम विवेकानंद पड़ा। विवेकानंद की स्वामी रामकृष्ण परमहंस से पहली मुलाकात साल में 1881 कलकत्ता के दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में हुई थी। स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने ही विवेकानंद को शिक्षा दी।

जब विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस से मिले थे तो उन्होंने पूछा था कि क्या आपने भगवान को देखा है? इस पर रामकृष्ण परमहंस ने जवाब देते हुए कहा था कि हां मैंने देखा है, मैं भगवान को उतना ही साफ देख रहा हूं जितना कि तुम्हें देख सकता हूं. फर्क सिर्फ इतना है कि मैं उन्हें तुमसे ज्यादा गहराई से महसूस कर सकता हूं।

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