चंद मिनटों में हो जाती है इंसान की मौत,जानें मृत्यु के बाद कहां जाती है आत्मा ?

मृत्यु के बाद शरीर से आत्मा (after death where soul goes) कहां जाती है? क्या करती है? नर्क और स्वर्ग का सफर किस तरह से तय करती है? यह बातें आज तक रहस्य हैं।

By: Vivhav Shukla

Published: 26 Jun 2020, 08:51 PM IST

नई दिल्ली। इस दुनिया का कुछ अटल सत्य है तो वो हैं मृत्यु(death is truth) । जब कभी कोई इंसान पैदा होता है उनकी मौत होनी भी तय है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर मौत के बाद इंसान की आत्मा (after death where soul goes) के साथ क्या होता है। इंसान की शरीर से निकले के बाद वो कहां जाती है?

हालंकि इस बात को भी कोई सटीक जवाब नहीं दे पाता। विज्ञान कहता है कि जिस तरह दुनिया की तमाम जड़ और चेतन वस्तुओं में धीरे-धीरे क्षय होता है, उसी तरह मानवीय शरीर में भी ऐसा ही होता है।

सनातन धर्म (sanatan dharma) में मृत्यु होने के बाद आत्मा के स्वर्ग गमन या नर्क जाने मन की मान्यता है । गरुण पुराण (Garuda Purana) के अनुसार जो व्यक्ति सुकर्म करता है वह स्वर्ग गमन करता हैए जबकि जो व्यक्ति कुकर्म करता है वो नर्क गमन करता है । शास्त्रनुसार मृत्यु उपरांत आत्मा को सर्वप्रथम यमलोक ले जाते है। माना जाता है कि यमलोग पहुंचने में आत्मा को 47 दिन लगते हैं। यहां यमराज आत्मा के पाप-पुण्य के आधार पर आत्मा की स्थिति तय हैं ।

मृत्यु के बाद आत्मा के अस्तित्व को लेकर भी अगल-अलग धारणाएं हैं. कुछ तो इसके किसी अस्तित्व से इनकार करते हैं तो कुछ कहते हैं कि आत्मा का अस्तित्व तभी तक है जब तक की मानवीय शरीर ज़िन्दा है. मौत के बाद आत्मा का भी अंत हो जाता है।

वहीं भगवान कृष्ण ने श्रीमत भगत गीता में बताया है कि आत्मा अनंत, अजर और अमर है, ये कभी नहीं मरती। बस ये एक इंसान का शरीर त्यागकर दूसरे शरीर में चली जाती है। हालांकि विज्ञान के पास इन बातों का कोई सटीक जवाब नहीं है और ये अभी तक रहस्य ही बना हुआ है।


कैसे होती है मौत?

अब आपको बताते हैं मौत के वक्त इंसान को कैसे पता चलता है कि उसकी आत्मा उसे छोड़ कर जा रही है। माना जाता है कि मृत्यु से ठीक पहले इंसानी शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं। अमूमन सांस पर इसका सबसे जल्दी असर पड़ता है। वहीं जब स्थित नियंत्रण के बाहर होने लगती है तो दिमाग गड़बड़ाने लगता है।


वहीं सांस बंद होने के कुछ समय बाद ही दिल भी काम करना बंद कर देता है। धड़कन बंद होने के लगभग 4 से 6 मिनट बाद ही मस्तिष्क ऑक्सीजन के लिए छटपटाने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। मेडिकल साइंस में इसे ही प्राकृतिक मौत कहते हैं, जिसे हम प्वाइंट ऑफ नो रिटर्न भी कहते हैं।


मौत के बाद इंसानी शरीर का तापमान हर घंटे 1.5 डिग्री सेल्सियस गिरने लगता है। बदन जकड़ जाता है क्योंकि शरीर में मौजूद खून कुछ जगहों पर जमने लगता है। त्वचा की कोशिकाएं मौत के 24 घंटे बाद तक जीवित रह सकती हैं। आंतों में मौजूद बैक्टीरिया भी जिंदा रहता है। ये शरीर को प्राकृतिक तत्वों में तोड़ने लगते हैं।

 

 
Vivhav Shukla
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