सिडनी में नजर आई Blue Whale के बारे में कितना जानते हैं

  • एक सदी में संभवता दुनिया के इस सबसे बड़े जानवर Blue Whale को तीसरी बार देखा गया।
  • इसका वजन 100 टन से ज्यादा और लंबाई करीब 25 मीटर आंकी गई।
  • 1966 में इसके संरक्षण के लिए बनाया गया आयोग, अभी तक ज्यादा सुधार नहीं।

 

नई दिल्ली। दुनिया के इतिहास में बीते माह ऑस्ट्रेलिया में सिडनी के समुद्री तट पर एक ब्लू व्हेल ( Blue Whale ) को देखा गया। माना जाता है कि एक शताब्दी में इस लुप्तप्राय समुद्री जीव को तीसरी बार देखा गया। न्यू साउथ वेल्स नेशनल पार्क एंड वाइल्ड लाइफ सर्विस (एनपीडब्ल्यूएस) के अधिकारियों के मुताबिक इस व्हेल की लंबाई 25 मीटर करीब 82 फीट से ज्यादा थी और इसका वजन 100 टन (100,000 किलोग्राम) से ज्यादा होगा। ऐसे में जब एक सदी में नीली व्हेल तीसरी बार नजर आई है, तो इसके बारे में जानकारी जुटाना भी बहुत जरूरी हो जाता है।

क्या है ब्लू व्हेल?

ब्लू व्हेल अब तक पृथ्वी पर रहने वाला सबसे बड़े जानवर है। ये शानदार समुद्री स्तनधारी 100 फीट तक लंबे और 200 टन तक वजनी होते हैं। अकेले इनकी जीभ एक हाथी जितनी भारी हो सकती है। जबकि उनका दिल एक कार जितनी बड़ी होती है।

ब्लू व्हेल का आहार

ब्लू व्हेल विशेष रूप से क्रिल नामक छोटे झींगा जानवरों के आहार पर निर्भर करती हैं। साल में कुछ निश्चित वक्त के दौरान एक वयस्क ब्लू व्हेल एक दिन में लगभग 4 टन क्रिल का सेवन करती है। ब्लू व्हेल बैलीन व्हेल होती हैं, जिसका मतलब है कि उनके अपने ऊपरी जबड़े से नाखून जैसी सामग्री की प्लेट जुड़ी होती है।

यह विशाल जानवर पेट भरने के लिए बहुत भारी मात्रा में पानी मुंह में डालते हैं और इसके लिए ये अपने गले और पेट की लचीली पर्तदार त्वचा को फैलाते हैं। इसके बाद व्हेल की विशाल जीभ पतली और ऊपर फैली बेलीन प्लेटों के जरिये पानी को बहुत तेजी से बाहर निकाल देती है। इससे हजारों की तादाद में क्रिल पीछे छूट जाते हैं और फिर व्हेल इन्हें फिर निगल जाती है।

रंग और रूप

ब्लू व्हेल पानी के नीचे असली नीली नजर आती हैं, लेकिन सतह पर उनका रंग ज्यादा नीला-ग्रे दिखता है। इनके पेट की त्वचा पर मौजूद लाखों सूक्ष्मजीवों से यह पीलापन लिए दिखती हैं। ब्लू व्हेल का चौड़ा, सपाट सिर और लंबा, पतला शरीर होता है, जो चौड़े, तिकोने आकार का होता है।

मुखरता और व्यवहार

ब्लू व्हेल आर्कटिक को छोड़कर दुनिया के सभी महासागरों में रहती हैं। यह अक्सर छोटे समूहों में तैरती हैं लेकिन आमतौर पर अकेले या जोड़े में ही होती हैं। वे अक्सर गर्मियों का वक्त ध्रुवीय पानी में भोजन के लिए बिताती हैं और सर्दियों के आते ही भूमध्य रेखा की ओर लंबा प्रवास करती हैं।

ये बेहतरीन तैरने वाली मछलियां समुद्र में पांच मील प्रति घंटे की रफ्तार से तैरती हैं, लेकिन जब वे उत्तेजित होती हैं, तो 20 मील प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार पकड़ लेती हैं। ब्लू व्हेल पृथ्वी पर सबसे तेज़ आवाज करने वाले जानवरों में से हैं। ये कई तरह की अलग-अलग आवाजें निकालती हैं, जिनमें थरथराहट, कराहना और विलाप भी शामिल है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि बेहतर स्थिति में ब्लू व्हेल एक-दूसरे को 1,000 मील दूर तक सुन सकती हैं। वैज्ञानिकों को लगता है कि वे न केवल संवाद करने के लिए, बल्कि अपने उत्कृष्ट श्रवण के साथ और समुद्र की गहराई में सोनार की तरह नेवीगेट करने में इस्तेमाल करती हैं।

लंबी उम्र

ब्लू व्हेल पृथ्वी के सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले जानवरों में से हैं। वैज्ञानिकों ने मृत व्हेल के मोम के समान इयरप्लग की परतों को गिनकर पता लगाया है कि वे इस जानवर की उम्र का करीब से अनुमान लगा सकते हैं। इस तरीके का इस्तेमाल करते हुए पता लगाया गया कि सबसे पुरानी ब्लू व्हेल करीब 110 साल पुरानी था। इसके औसत जीवनकाल का अनुमान लगभग 80 से 90 वर्ष है।

संरक्षण

1900 सदी में व्हेल के तेल की मांग के चलते इनके आक्रामक शिकार ने इन्हें विलुप्त होने के कगार पर पहुंचा दिया। 1900 से 1960 के मध्य के बीच करीब 3,60,000 ब्लू व्हेल को मार डाला गया था। इन्हें आखिरकार 1966 में अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग के संरक्षण में लाया गया, लेकिन तब से अब तक इनकी संख्या में मामूली वृद्धि ही हुई है।

ब्लू व्हेल का शिकार करने वाले कुछ होते हैं लेकिन ये शार्क और किलर व्हेल के हमलों का शिकार होने के लिए जानी जाती हैं, जबकि हर साल कई बड़े जहाजों की टक्कर से घायल या मर जाती हैं।

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अमित कुमार बाजपेयी
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