क्यों और किस तरह से गिरती है बिजली? जानें इसका वैज्ञानिक कारण

आसमान (Sky) में अपोजिट एनर्जी (opposite energy )के बादल हवा से उमड़ते और घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाए हुए टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली (thunderstorm) पैदा होती है जो धरती पर गिरती है

By: Vivhav Shukla

Published: 26 Jun 2020, 07:32 PM IST

नई दिल्ली: बीते दिन बिहार में बिजली गिरने (thunder lightning)से 100 लोगों की मौत हो गई है, वहीं उत्तर प्रदेश में अब तक 24 लोगों की मौत हुई है। राज्य में यह पहली बार है कि जब एक दिन में बिजली गिरने से इतने अधिक लोगों की मौत हुई है। बिजली गिरना (thunderstorm) प्राकृतिक घटना है। लेकिन ये समझना ज़रूरी है कि बिजली का गिरना और बिजली का चमकना दोनों अलग-अलग चीज़ है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक हर सेकेंड धरती पर 50-100 बार बिजली गिरती है। सूर्य की सतह की तुलना में बिजली अधिक गर्म होती है। बिजली जिस रास्ते से होकर जमीन पर आती है वहां की हवा 15 हजार डिग्री फाॅरेनहाइट तक गर्म हो जाती है। यह गर्मी सूरज की सतह की गर्मी (10 हजार फाॅरेनहाइट) से अधिक है।

बादलों की गड़गड़ाहट (thunderstorm) या फिर तेज चमक के साथ यह जानलेवा बिजली कहीं भी गिर सकती है। परेशानी की बात ये हैं कि इसके बारे में न तो पूर्वानुमान लगाया जा सकता है और न ही यह बताया जा सकता है कि यह बिजली कब गिरेगी।

क्यों गिरती है आकाशीय बिजली (thunderstorm) ?

दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। धरती पर पहुंचने के बाद बिजली को कंडक्टर की जरूरत पड़ती है। लोहे के खंभों के अगल- बगल से जब आकाशीय बिजली गुजरती है तो वह कंडक्टर का काम करता है। उस समय कोई व्यक्ति यदि उसके संपर्क में आता है तो उसकी जान तक जा सकती है।

जानकार बताते हैं कि आसमानी बिजली (thunderstorm) का असर ह्यूमन बॉडी पर कई गुना होता है। डीप बर्न होने से टिशूज डैमेज हो जाते हैं। उनको आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता है। बिजली का असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। हार्ट अटैक होने से मौत हो जाती है। इसके असर से शारीरिक अपंगता का खतरा होता है।

कैसे बचे आकाशीय बिजली से?

  • आंधी आते ही टीवी, रेडियो, कंप्यूटर सभी का मोडेम और पॉवर प्लग निकाल दें।
  • इलेक्ट्रिक अप्लाएंसेस को ऑफ कर देना चाहिए।
  • इस दौरान मोबाइल यूज करने से बचें।
  • नंगे पैर फर्श या जमीन पर कभी खड़े ना रहें।
  • बिजली उपकरणों से दूर रहें। बिजली पैदा करने वाली चीजों से दूरी बनाकर रखें रेडिएटर, फोन, धातु के पाइप, स्टोव इत्यादि।
  • पेड़ के नीचे या खुले मैदान में जाने से बचें।
  • खुले मैदान में होने पर किसी बिल्डिंग में छिपने की कोशिश करें।
  • गीले कपड़ों की वजह से व्रजपात का असर कम हो जाता है।
Vivhav Shukla
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