भारत को 15 अगस्त, 1947 की रात 12 बजे ही क्यों मिली स्वतंत्रता, जानिए ऐसे ही और सवालों के जवाब

siddharth tripathi

Publish: Aug, 12 2016 08:34:00 PM (IST)

हॉट ऑन वेब

1947 में ही हमें क्यों मिली स्वतंत्रता?

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हर साल 15 अगस्त के दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, लेकिन कभी सोचा है कि इस दिन में क्या खास बात थी, जो हमें 15 अगस्त, 1947 को रात 12 बजे ही स्वतंत्रता मिली? आज हम इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं।

पहला सवाल- 1947 में ही हमें क्यों मिली स्वतंत्रता?
गांधीजी के जनांदोलन से देश की जनता आजादी के लिए जागरूक हो गई थी। वहीं दूसरी तरफ सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज की गतिविधियों ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने पर अंग्रेजों की आर्थिक हालत बद से बदत्तर हो गई थी। दूसरे देशों की बात छोड़ दें, वो अपने देश पर शासन करने में ही असमर्थ हो गए थे। वहीं 1945 के ब्रिटिश चुनावों में लेबर पार्टी की जीत ने आजादी के द्वार खोल दिए थे क्योंकि उन्होंने अपने मैनिफेस्टो में भारत जैसी दूसरी इंग्लिश कॉलोनियों को भी आजादी देने की बात कही थी।

फरवरी, 1947 में लार्ड माउंटबेटन को भारत का आखिरी वायसराय चुना गया जिन पर व्यवस्थित तरीके से भारत को स्वतंत्रता दिलाने का कार्यभार था। शुरूआती योजना के अनुसार भारत को जून, 1948 में आजादी मिलने का प्रावधान था। वायसराय बनने के तुरंत बाद, लार्ड माउंटबेटन की भारतीय नेताओं से बात शुरू हो गई थी, लेकिन ये इतना भी आसान नहीं था। जिन्ना और नेहरू के बीच बंटवारे को लेकर पहले से ही रस्साकशी चल रही थी। जिन्ना ने अलग देश बनाने की मांग रख दी थी जिसकी वजह से भारत के कई क्षेत्रों में साम्प्रदायिक झगड़े शुरू हो गए थे। माउंटबेटन ने इसकी अपेक्षा नहीं की थी और इससे पहले कि हालात और बिगड़ते, आजादी 1948 की जगह 1947 में ही देने की बात तय हो गई।

आगे की स्लाइड में जानिए हमें आजादी देने के लिए अंग्रेजों ने 15 अगस्त को ही क्यों चुना

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