आखिर क्यों सिर्फ एक रात के लिये किन्नर करते हैं विवाह,फिर होता है ये काम, जानकर हो जाएंगे हैरान

  • तमिलनाडु के कूवगाम में नव वर्ष की पहली पूर्णिमा को होता है किन्नरों का विवाह
  • एक रात के लिए किन्नर करते हैं विवाह

By: Pratibha Tripathi

Updated: 27 Nov 2019, 12:43 PM IST

नई दिल्ली। किन्नर के बारे में तो हर कोई जानता है कि इनकी गिनती ना तो पूरी तरह पुरुषों में की जाती है ना ही स्त्रीयों में। इसलिए यह लोग हर किसी से दूर अपनी अलग एक दुनियां बसा लेते है। और इन्हीं लोगों के बीच रहकर अपनी जिंदगी जीने लगते है पर क्या आप जानते है कि किन्नर भी शादी करते हैं, हैं ना ! आपके लिए भी ताज्जुब की बात। लेकिन यह बात सच हैलेकिन यह शादी सिर्फ एक रात के लिए होती है और वह भी इनके अपने भगवान से।
अब हगर कोई जानना चाहेगा कि आखिर किन्नर किस भगवान से विवाह करते हैं तो हम आपको बता दें कि यह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं। यह हैं अर्जुन और नाग कन्या उलूपी की संतान इरावन जिन्हें अरावन के नाम से भी जाना जाता है। इरावन किन्नर के भगवान कैसे बने और यह उनसे ही क्यों एक रात के लिए किन्नर विवाह करते हैं इस कहानी का संबंध महाभारत के युद्ध से संबंधित है। लेकिन इस कहानी से पहले आपको बता दें कि कहां होती है किन्नर की एक रात की शादी और फिर क्या होता है?

kinner_marrage.jpg

किन्नर की शादी का जश्न हर साल तमिलनाडु के कूवगाम में नव वर्ष की पहली पूर्णिमा से किन्नरों के विवाह का उत्सव शुरु होता है जो 18 दिनों तक चलता है। 17 वें दिन किन्नरों की शादी होती है। सोलह श्रृंगार किए हुए किन्नरों वहां पहुंचते है पुरोहित उन्हें मंगलसूत्र पहनाते हैं और इनका विवाह हो जाता है। विवाह के अगले दिन इरवन देवता की मूर्ति को शहर में घुमाया जाता है और इसके बाद उसे तोड़ दिया जाता है। इसके साथ ही किन्नर अपना श्रृंगार उतारकर एक विधवा की तरह विलाप करने लगती है। आइये अब इस विवाह से लेकर विधवा होने तक की कहानी का रहस्य जानें।
माना जाता है कि महाभारत युद्ध से पहले पांडवों ने मां काली की पूजा की थी। जिसमें उन्हें इस पूजा में एक राजकुमार की बलि देनी थी। लेकिन बलि देने के लिये किसी ने आगे हिम्मत नही जताई। तब राजकुमार इरावन ने कहा कि वह बलि के लिए तैयार है। लेकिन इसने एक शर्त रख दी कि वह बिना शादी किए बलि नहीं चढ़ेगा।

अब पांडवों के पास बड़ी समस्या यह आ गई कि एक दिन के लिए कौन सी राजकुमारी इरावन से विवाह करेगी और अगले दिन विधवा हो जाएगी। इस समस्या का समाधान श्री कृष्ण ने निकाला। श्री कृष्ण स्वयं मोहिनी रूप धारण करके आ गए और इन्होंनें इरावन से विवाह किया। अगले दिन सुबह इरावन की बलि दे दी गई और श्री कृष्ण ने विधवा बनकर विलाप किया। उसी घटना को याद करके किन्नर इरावन को अपना भगवान मानते हैं और एक रात के लिए विवाह करते हैं।

Pratibha Tripathi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned