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93 प्रतिशत बच्चों को चाहिए अंडा

93 प्रतिशत बच्चों को चाहिए अंडा

हुबली

Published: December 24, 2021 11:42:51 pm

93 प्रतिशत बच्चों को चाहिए अंडा
-जिले की समीक्षा के दौरान जानी बच्चों राय
कोप्पल
कुपोषण का शिकार कल्याण कर्नाटक के सात जिले के प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को सप्ताह में तीन दिन अंडा या केला वितरित किया जा रहा है। इस योजना के समर्थन और विरोध में चर्चा हो रही है।
कोप्पल जिले में अंडे की मांग करने वाले बच्चों की संख्या 93 प्रतिशत है। इसके चलते अंडा चाहने वाले बच्चों की संख्या ही सबसे अधिक है।
कल्याण कर्नाटक में कुपोषण से जूझ रहे बच्चों की संख्या ही अधिक है। राज्य सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए 6 से 15 वर्ष तक के बच्चों को सप्ताह में तीन दिन अंडा वितरित करने, अंडा नहीं खाने वाले विद्यार्थियों को केले वितरित करने से संबंधित आदेश जारी किया है। अंडा या केला खाने को लेकर किसी पर भी दबाव नहीं बनाया जाएगा। अंडा खाएं या केला इसका फैसला स्वंय विद्यार्थी ही ले सकते है। अभिभावकों की जि?मेदारी है कि वे विद्यालय प्रमुख को सहमति पत्र अवश्य सौंपे।
अधिकांश बच्चे चाहते हैं अंडा
अंडा या केला वितरित करने की योजना प्रायोगिक तौर पर मार्च माह तक चलाई जाएगी। यदि इस योजना से कुपोषण की शिकायत दूर होने पर इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। कुछ लोग विद्यालय में अंडा वितरित करने का विरोध कर रहे हैं तो कुछ अंडा वितरण का समर्थन कर रहे हैं। इस मामले के समर्थन और विरोध में चर्चा शुरू हो चुकी है। कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में अधिकांश बच्चे अंडे के प्रति दिलचस्सपी दिखा रहे हैं।
अंडा नहीं खाने वालों को केला
93 प्रतिशत बच्चों को चाहिए अण्डे
कोप्पल जिले में वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार तीन लाख 4000 बच्चे साधारण कुपोषण का शिकार हुए हैं। कुपोषण से निपटने के लिए कई योजनाएं जारी की गई हैं। इन्हीं योजनाओं के अंतर्गत दिस?बर माह से बच्चों को अंडे वितरित किए जा रहे हैं। अंडा नहीं खाने वाले बच्चों को केले वितरित किए जा रहे हैं। कोप्पल जिले में एक हजार 154 विद्यालय हैं जिनमें एक लाख 78 हजार 455 बच्चे पढ़ रहे हैं। लगभग एक लाख 67 हजार 111 बच्चे प्रतिदिन विद्यालय आते हैं। इनमें से एक लाख 57 हजार 45 बच्चे यानी 93.98 प्रतिशत बच्चे अंडे तथा 10 हजार 66 बच्चे यानी कि 6.02 बच्चे केले का सेवन करते हैं। लोगों का कहना है कि अधिकांश बच्चे अंडे के शौकीन हैं, ऐसे में उनके अधिकारों को छीना नहीं जाना चाहिए।
बच्चों के बीच बढ़ेगी असमानता
सरकारी विद्यालय में अंडा वितरित करने के सरकार के फैसले का विरोध करते हुए अखिला भारतीय लिंगायत महासभा के राज्य अध्यक्ष वीरण्णा कर्लहल्ली ने बेटे का नाम सराकरी स्कूल से निकालकर निजी स्कूल में करवाया है। अंडा वितरित करने के सरकार के फैसले का विरोध करने वालों का कहना है कि वे अंडा खाने के खिलाफ नहीं हैं परन्तु स्कूलों में अंडा और केला खाने वाले बच्चों के बीच असमानता बढ़ेगी।
9३ प्रतिशत बच्चों को चाहिए अंडा
9३ प्रतिशत बच्चों को चाहिए अंडा

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