script आचार्य पार्श्वचंद्र का जन्म दिवस हर्षोल्लास से मनाया | Acharya Parshvchandra's birthday celebrated with joy | Patrika News

आचार्य पार्श्वचंद्र का जन्म दिवस हर्षोल्लास से मनाया

locationहुबलीPublished: Jan 27, 2024 06:52:11 pm

Submitted by:

S F Munshi

आचार्य पार्श्वचंद्र का जन्म दिवस हर्षोल्लास से मनाया

आचार्य पार्श्वचंद्र का जन्म दिवस हर्षोल्लास से मनाया
आचार्य पार्श्वचंद्र का जन्म दिवस हर्षोल्लास से मनाया
आचार्य पार्श्वचंद्र का जन्म दिवस हर्षोल्लास से मनाया
गंगावती
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में बुधवार को जयगच्छीय जैनाचार्य पार्श्वचंद्र का 75 वां जन्मदिवस जैनाचार्य गुरु पार्श्व अमृत महोत्सव सामूहिक एकासन दिवस के रूप में हर्षोल्लास से मनाया गया।
आचार्य पार्श्वचंद्र, डॉ. पदमचंद्र, जयधुरंधर मुनि, जयकलश मुनि, जयपुरंधर मुनि आदि ठाणा-5 के सान्निध्य में मनाए गए जन्मदिवस पर आयोजित धर्मसभा में सिंधनूर, रायचूर, इलकल, कोप्पल, बागलकोट, तावरगेरा, बेंगलुरु, चेन्नई, मैसूर, जलगांव एवं अन्य गांवों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं का आगमन हुआ था। नवकार महामंत्र और जयजाप से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
प्रवचन प्रभावक डॉ. पदमचंद्र, जयधुरंधर मुनि, जयकलश मुनि और जयपुरंधर मुनि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य प्रवर पार्श्वचंद्र महाराज के गुणगान करते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला।
श्री अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मैसूर निवासी कैलाशचंद बोहरा, राष्ट्रीय महासचिव जलगांव निवासी स्वरूपचंद लुंकड, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बेंगलुरु निवासी रेवंतमल नाहर, पूर्व महासचिव सेलम निवासी नवरत्नमल बोकडिया, जयमल जैन श्रावक संघ बेंगलुरु के अध्यक्ष मोहनलाल कांकरिया, जैन समाज सिंधनूर के गौतमचंद बम्ब एवं अन्यों ने आचार्य प्रवर पार्श्वचंद्र को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरूदेव का जन्म सोजतसिटी के देवाराम परिहार की धर्मपत्नी नन्दा देवी की कुक्षी से वि.सं. 2006 पौष सुदी 14 को यानी 17 जनवरी 1950 को हुआ। पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं। सिर्फ ग्यारह वर्ष की आयु में 24 जून 1961 में दीक्षा ग्रहण करने वाले आचार्य प्रवर पार्श्वचंद्र महान संत है। चेन्नई में 19 सितंबर 2002 को उपाध्याय और अमरावती में 18 सितंबर 2015 को आपको आचार्य घोषित किया गया। रायपुर में 22 सितंबर 2018 को आचार्य पद का चादर महोत्सव मनाया गया और आचार्य प्रवर पार्श्वचंद्र जयगच्छीय बारहवें पट्टधर बने। आप आगम व्याख्याता, आगम के गुढार्थो के ज्ञाता, उच्च कोटि के सिद्ध साधक, दृढ मनोबली, दृढ संकल्प के धनी, आशुकवि, कठोर तपस्वी, कवि, लेखक, पंडित रत्न हैं। आप हिन्दी, गुजराती, मराठी, मारवाड़ी, संस्कृत, प्राकृत, काव्य, छंद, डिंगल व पिंगल के ज्ञाता हैं।
आपने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक, पांडिचेरी, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा अधिक क्षेत्रों में आपका विचरण करते हुए जिनशासन की खूब प्रभावना की है। आपका चुम्बकीय व्यक्तित्व रहने से हर कोई प्रभावित हो जाता है। आपने लाखों भक्तों को उपदेश देकर जीवन संवारा है। अनेक जनों को दिक्षित करके इस मोहरूपी संसार से तिराया है। आपकी वाणी में वह मिठास है कि सुनने वाले का मन सुनते रहने का ही बना हुआ रहता है। मारवाड़ी भाषा में जब आप उपदेश देते हैं तो सुनने वाले भाव-विभोर होकर भक्ति रस में डूब जाते हैं। आप सदैव भक्तों को धर्म ध्यान त्याग तपस्या, सामायिक, साधना करने का पुरूषार्थ करने की प्रेरणा देते रहते हैं।
जेपीपी जैन महिला फाउंडेशन रायचूर, सिंधनूर, इलकल, जेपीपी जैन युवा फाउंडेशन रायचूर, चेतना महिला मंडल गंगावती, इंदिरादेवी चोपड़ा, अभिषेक चोपड़ा आदि ने स्तवन प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जैन समाज अध्यक्ष महावीरचंद बम्ब ने स्वागत करते हुए कहा कि यह गंगावती श्रीसंघ का सौभाग्य है कि हमें यह सुअवसर प्राप्त हुआ है। आचार्य प्रवर पार्श्वचंद्र्र के 75 वें जन्म दिवस के उपलक्ष्य में श्रावक -श्राविकाओं ने सामूहिक एकासन किया है। इसके साथ दूसरों का भी त्याग तप हुआ है।
उपाध्यक्ष प्रकाशचंद चोपड़ा तथा सचिव अभिषेक गुलेच्छा ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन सुमेर कोचर ने किया।
अंत में आचार्य प्रवर पार्श्वचंद्र, डॉ. पदमचंद्र, जयधुरंधर मुनि, जयकलश मुनि, जयपुरंधर मुनि ने मंगलपाठ फऱमाया। श्रावक-श्राविकाओं ने संतों के नाम लेकर जयकारे लगाते हुए खुशी जताई।
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