क्रांतिकारी आचार्य थे आचार्य तुलसी

क्रांतिकारी आचार्य थे आचार्य तुलसी

By: S F Munshi

Published: 17 Sep 2021, 01:31 AM IST

क्रांतिकारी आचार्य थे आचार्य तुलसी
-उत्साह से मनाया विकास महोत्सव
गदग
गदग तेरापंथ भवन में साध्वी पद्मावती जी के सान्निध्य में विकास महोत्सव का कार्यक्रम उत्साह के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर साध्वी पद्मावती ने कहा कि आचार्य तुलसी उस व्यक्ति का नाम है जिनकी ख्याति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों क्षेत्रों में फैल चुकी है। इसका कारण है उन्होंने धर्म को नई पहचान दी। आचार्य तुलसी उस विकास पुरुष का नाम है इसके कण-कण में जवानी का जोश था। 18 घंटे श्रम करने के बाद भी वही ताजगी वही स्फूर्ति और वही क्रियाशीलता। आचार्य तुलसी ने सक्षम होते हुए भी पद का विसर्जन किया। यह बहुत बड़ा कीर्तिमान रचा है।
साध्वी डॉ. गवेषणा ने कहा कि आचार्य तुलसी एक क्रांतिकारी आचार्य थे। उन्होंने तेरापंथ धर्म संघ की छवि को सात समुद्र पार पहुंचाया है। आचार्य तुलसी का अवतरण विकास का अवतरण है।
साध्वी मयंक प्रभा ने कहा कि तेरापंथ संघ विकासशील धर्म संघ है। 243 वर्षीय जीवनकाल में आचार्य भिक्षु से लेकर आज तक कई नई-नई विकास की मंजिलें तय की। साध्वी दक्ष प्रभा व मेरु प्रभा ने गीतिका प्रस्तुत की।
कर्नाटक अणुव्रत समिति के प्रभारी हुबली से समागत केसरी चंद गोलचा, सभा अध्यक्ष अमृतलाल कोठारी महिला मंडल की मंत्री विजेता भंसाली ने भी प्रस्तुति दी। सुशीलाबाई जीरावला ने आठ की तपस्या का व कोप्पल से समागत तपस्वी बहन यशोमती संचेती ने 12 की तपस्या के पचख्वान किए। सुनंदा धोका, पायल संचेती, संतोष परी जीरावला व छवि भंसाली ने तपस्या का अनुमोदन किया। कमलेश जीरावला ने आभार जताया।

S F Munshi Reporting
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