भौतिक सुखों को त्यागने में ही सच्चे सुख की अनुभूति

आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सच्चा सुख और आनंद भौतिक साधनों को पाने में नहीं बल्कि उनको त्यागने में है।

By: MAGAN DARMOLA

Published: 27 Jun 2021, 07:17 PM IST

इलकल . जैन हिन्दी साहित्यकार आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर आदि ठाणा चार शनिवार प्रात: मुद्देबिहाल पहुंचे। वहां उनका श्री वासुपुज्यस्वामी जैन संघ के श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं ने हार्दिक स्वागत किया।

आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सच्चा सुख और आनंद भौतिक साधनों को पाने में नहीं बल्कि उनको त्यागने में है। संसार में धनवान भी दुखी है और धनहीन भी दुखी है। धनवान इसलिए दुखी रहता है कि उसकी तृष्णा, आकांक्षा का कोई अंतिम छोर ही नहीं है। कितना ही धन का संग्रह रहने के बावजूद और ज्यादा पाने की लालसा बनी रहती है, जिसके कारण व्यक्ति दुखी होता है।

महापुरुषों को उनके त्याग ने ही महान बनाया है। उन्होंने कहा कि मन व इन्द्रियों पर संयम रखते हुए धर्म ध्यान करके कर्मों की निर्जरा करने का प्रयास करेंगे तो आत्मा से महात्मा और महात्मा से परमात्मा बनने का मार्ग प्रशस्त होगा। 28 जून को संत विजयपुर की ओर विहार करेंगे।

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