संक्रमण का खतरा बढ़ा रहा झील किनारे पड़ा बायो मेडिकल कचरा

संक्रमण का खतरा बढ़ा रहा झील किनारे पड़ा बायो मेडिकल कचरा
हुब्बल्ली

By: Zakir Pattankudi

Published: 10 Jun 2021, 02:02 PM IST

संक्रमण का खतरा बढ़ा रहा झील किनारे पड़ा बायो मेडिकल कचरा
हुब्बल्ली
झील किनारे पड़े इंजेक्शन के सीरिंज, बहते पानी में जमा हो रहा बायो मेडिकल कचरा, झील के किनारे मेडिकल के अपशिष्ट में मुंह मारते जानवर।
मूलभूत चिकित्सकीय सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों को मेडिकल वेस्ट का दुष्परिणाम आने वाले दिनों में पता चलेगा।
गांवों में विशेष तौर पर नहर, नाले, तालाब के किनारे जलस्रोतों के प्रवाह में बायो मेडिकल के त्याज्य को फेंका जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमितों का इलाज स्थानीय चिकित्सक ही कर रहे हैं। कोरोना सहित अन्य संक्रमण तथा खराब बेक्टीरिया वाले व्यक्तियों के उपचार के बाद, इस बायोमेडिकल त्याज्य में वायरस और बैक्टीरिया के महीनों तक जीवित रहने की संभावना रहती है।
बारिश के दिनों में झील, रेक और खाई में त्याज्य फेंके जाने वाले त्याज्य जलस्रोत से होकर पुन: ग्रामीण क्षेत्र में प्रवेश करता है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के जलस्रोतों का पानी विषैला हो जाता है। इस पानी का सेवन करने वालों का बीमारी की चपेट में आना तय है।

कहां गई रंगीन टोकरियां

बायो मेडिकल त्याज्य का निपटान करने वालों की ओर से अस्पताल तथा निजी चिकित्सकों को पहले से ही विभिन्न रंग की टोकरियां उपलब्ध करवाई गई थीं। इन्हें काले, लाल, नीले, हरे तथा पीले रंग की टोकरियां उपलब्ध करवाई गई। कई चिकित्सकों के पास रंगीन टोकरियां हैं ही नहीं। इसमें बायो वेस्ट डाला जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना नियंत्रण केंद्र की संख्या 50 से अधिक हैं। मठ प्रमुख भी ग्रामीण क्षेत्र की जनता के इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

Zakir Pattankudi Incharge
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