मानसून से पहले पुल बनकर तैयार नहीं हुआ तो नाव से ही करनी पड़ेगी नदी पार

30 करोड़ रुपए की लागत वाले पुल का निर्माण कार्य धीमी गति से चलने से अंकोला-गंगावली नदी किनारे रहने वाले परेशान, बीते दो सालों से इसका निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है।

By: MAGAN DARMOLA

Published: 15 Apr 2021, 09:41 PM IST

कारवार. बारिश का मौसम शुरू होते ही तटीय क्षेत्र की जनता को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सरकार की ओर से जनता को समस्याओं से निजात दिलवाने के लिए पुल निर्माण का कार्य मंजूर किया गया। बीते दो सालों से इसका निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। इस साल भी बारिश के दिनों में नदी के इस छोर से उस छोर तक पहुंचने के लिए अंकोला की जनता को पुन: नाव का सहारा लेना पड़ सकता है। ये हालात उत्तर कन्नड़ जिले के अंकोला मंजुगणी तथा गंगावली नदी के बीच स्थित निर्माणाधीन पुल की है।

अंकोला तालुक तथा कुमटा तालुक के गोकर्ण क्षेत्र के कई लोगों को नदी पार करना किसी चुनौती से कम नहीं है। गंगावली नदी पूरे साल मानो बाढ़ के साथ ही बहती है। बारिश के दिनों में गंगावली नदी जिस रफ्तार से बहती है उसकी कल्पना भी करना संभव नहीं। अंकोला के मंजुगणी, कूर्वे, हिच्चड़, बिलीहोंय्दी, कुमटा तालुक के गंगावली, गोकर्ण, बेलेकॉन, नाडुमास्केरी सहित नदी किनारे बसे अन्य गांव की जनता को कई प्रकार की कठिन हालात का सामना करना पड़ रहा है। गोकर्ण की जनता को अंकोला पहुंचने के लिए नदी पार करना पड़ता है। यही सबसे निकटतम मार्ग है।

जनता की सुविधा के लिए 30 करोड़ रुपए की लागत वाले पुल निर्माण कार्य को मंजूरी भले ही मिली हो परंतु यह कार्य बीते दो सालों से धीमी गति से चल रहा है। इस प्रकार की लापरवाही की वजह से आज भी यहां की जनता को समस्याओं से निजात नहीं मिली है। दो साल पहले निर्माण कार्य की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई थी। अब तक मात्र पांच खंभों का निर्माण किया गया है। अभी तीन खंभों का निर्माण कार्य शेष है। नदी में पर्याप्त मात्रा में मिट्टी डाला गया है जिसकी वजह से स्थानीय मछुआरों को कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

कुछ साल पहले नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचने के लिए बार्ज की व्यवस्था थी। अब नाव ही एक मात्र विकल्प है। बाइक चालक भी बाइक सहित नाव में चढ़कर नदी पार करते हैं। पुल न होने की वजह से सड़क मार्ग से गोकर्ण की जनता को जहां तीस किलो मीटर की दूरी तय करना पड़ रहा है वहीं पुल यदि बने तो गोकर्ण से अंकोला पहुंचने में आठ किलोमीटर की बचत होगी। निर्माण कार्य दो सालों से चल रहा है परंतु अभी तक पूर्ण नहीं हुआ है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि निर्माण कार्य शीघ्र ही पूर्ण हो।

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