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कर्नाटक की समृद्ध विरासत अगली पीढ़ी तक पहुंचे

कर्नाटक की समृद्ध विरासत अगली पीढ़ी तक पहुंचे

हुबली

Published: October 26, 2021 11:46:49 pm

कर्नाटक की समृद्ध विरासत अगली पीढ़ी तक पहुंचे
-कन्नड राज्योत्सव अभियान के दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन
धारवाड़
उपविभागीय अधिकारी डॉ. गोपालकृष्ण बी. ने कहा कि मैसूर राज्य कर्नाटक राज्य के नाम से प्रख्यात हुआ। इसकी बुनियाद धारवाड़ जिला ही है। कला, संस्कृति व साहित्यकारों का मायका कहलाने वाले धारवाड़ के कारण ही 1953 में जिसे मैसूरु राज्य के नाम से जाना जाता था उसका नाम 1973 में कर्नाटक पड़ा।
वे कन्नड राज्योत्सव अभियान के दूसरे दिन के कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान बोल रहे थे। कार्यक्रम धारवाड ़के रंगायण के 66वें कन्नड राज्योत्सव के उपलक्ष्य में कन्नड व संस्कृति विभाग, धारवाड़, नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट ऑफ डॉ. आर. बेंद्रे , मल्लिकार्जुन मंसूर राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट, पासवराज राजगुरु राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट, कर्नाटक कुलपुरोहित अलूर वेंकटराव राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट, चित्रकाली मूर्तिकार डीवी हलभवी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित किया गया था ।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में सभी को आगे आना चाहिए।
हम्पी विश्वविद्यालय के पूर्व सिंडिकेट सदस्य सुभासिंघम जमादार ने कहा कि धारवाड़ साहित्य के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। व्यक्तिगत जीवन को बहुत अधिक महत्व दिए बिना, कला को पहली प्राथमिकता देकर हमारी संस्कृति को जीवन के सौंदर्यशास्त्र के साथ विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रंगमंच साहित्यिक और जीवन मूल्यों को बनाने और उन्हें युवाओं तक पहुंचाने का काम होना चाहिए।
रंगमंच निदेशक रमेश एस. परवनियाकारा ने इस आयोजन की अध्यक्षता की। इस महीने की 31 तारीख तक कोरियोग्राफी, ड्रामा और सामूहिक नृत्य सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मूर्तिकार डीवी हलभवी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट और पासवराज राजगुरु राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष चंद्रकांत बेल्लद भी उपस्थित थे। कन्नड और संस्कृति विभाग की सहायक निदेशक मंजुला यालिकारा ने स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन फकीरप्पा ने किया।
माइलर महादेवा ने धारवाड़ थिएटर रिपर्टरी कलाकारों के दृश्य और रूपक गीतों का प्रदर्शन किया।
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