शिक्षा से बच्चे हुए वंचित, मजदूरी बन रही मजबूरी

शिक्षा से बच्चे हुए वंचित, मजदूरी बन रही मजबूरी
-लॉकडाउन से आए आर्थिक संकट में बढ़ा बालश्रम
हुब्बल्ली

By: Zakir Pattankudi

Published: 22 Jul 2021, 08:32 AM IST

शिक्षा से बच्चे हुए वंचित, मजदूरी बन रही मजबूरी
हुब्बल्ली
हमारे देश में कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें बचपन को खुलकर जीने का अवसर प्राप्त नहीं होता या तो मजबूरी में उन्हें मजदूरी करनी पड़ती है। इसी प्रकार का उदाहरण यहां देखने को मिला।
मेंगलूरु में रात के वक्त सड़क के बगल में बैठी बालिका के हाथ में आई फोन था। चेहरे के हावभाव उसके कपड़ों को देख विश्वास करना भी संभव न था। बालिका को इस अवस्था में देख किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पांडेश्वर थाना पुलिस ने जब बालिका को सांत्वना देकर पूछा तब हकीकत सामने आई।

लड़की ने दिखाया साहस

हासन जिले की बालिका को कोई (ब्रोकर) मध्यस्थ घर के कामकाज के लिए यहां किसी घर पर छोड़ गया था। बालिका को यहां ले आने के लिए उसे पैसे भी दिए गए थे। दो माह तक हाउसकीपिंग का कार्य करने के बावजूद भी बालिका को वेतन एक रुपया भी नहीं दिया गया। उस रात बालिका से बलात्कार करने के मंसूबे में घर का मालिक बालिका की ओर बढ़ा। साहसी लड़की मालिक का आईफोन लेकर भाग गई।

अभिभावकों को जागरूक करने में जुटे अधिकारी

एक अन्य मामले में मंगलूर में पढऩे वाली विजयपुर की बालिका कोरोना की वजह से जिस समय स्कूल बंद हुआ उस समय अपने घर गई। मां बाप ने बेटी के विवाह से संबंधित चर्चा शुरू कर दी। बेटी को आभास हुआ कि उसके मां बाप उसे किसी के पल्ले बांधकर जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं। बस फिर क्या था बेटी मंगलूरु वापस लौट गई। कई दिनों से घर वाले फोन कर बेटी पर शादी करने का दबाव बना रहे हैं। बालिका ने बाल कल्याण समिति के अधिकारियों से सहायता मांगी। समिति के सदस्य व अधिकारी बालिका के अभिभावकों को समझा-बुझाकर जागरूक करने के प्रयास में जुटे हैं।

समस्याओं का सामना कर रहे बच्चे

राज्य में कई जगह पर बच्चों को इस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना की वजह से कईयों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। कईयों को व्यापार कारोबार में नुकसान का सामना करना पड़ा है। हमारे आसपास ही कई मासूम विद्यार्थियों को इस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह अनुमान लगा पाना भी संभव नहीं कि ना जाने कितने बच्चों को इस प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है? कई बच्चे इस प्रकार की समस्याओं का सामना बिना किसी से कुछ कहे ही कर रहे हैं।

सटीक जानकारी नहीं

कोरोना संक्रमण दिखाई देने के बाद से राज्य में बाल श्रमिक प्रणाली में बढ़ोत्तरी हुई है। अधिकांश जिलों में कृषि कार्य में बच्चों को शामिल किया जा रहा है। कोडगू जिले के कॉफी के बागान में, तटीय क्षेत्र में मछली पालन, शिवमोग्गा में पौधरोपण कार्य में तथा मैसूरु तथा अन्य क्षेत्र में बच्चों को सब्जी बेचते देखा गया है। किन किन क्षेत्रों में कितने बच्चे मज़दूरी कर रहे हैं, कितने बच्चे शिक्षा से वंचित हुए हैं इस बारे में सटीक जानकारी प्राप्त नहीं हो रही है।

कक्षाएं शुरू करना अनिवार्य

कोरोना की वजह से बीते डेढ़ साल से कई कारोबार ठीक से नहीं चल रहे हैं। श्रमिक विभाग के अधिकारी औचक निरीक्षण भी नहीं कर रहे हैं। बालश्रमिकों के आंकड़ों को जानने के लिए समय समय पर औचक निरीक्षण करना अनिवार्य है। वर्तमान में बालश्रमिकों की संख्या कितनी बढ़ी है कि इसके बारे में अनुमान लगाना भी संभव नहीं। कोरोना की वजह से गरीब परिवार के बच्चे कितने बच्चे प्रभावित हुए हैं यह जानने के लिए पुन: कक्षाएं शुरू करनी होगी। कितने बच्चे पुन: स्कूल लौट रहे हैं यह जानने के लिए कक्षाएं शुरू करना अनिवार्य है।

मजबूरी में बच्चों को काम पर भेज रहे हैं अभिभावक

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष तथा पडी संस्थान के प्रमुख रेन्नी डिसोजा का कहना है कि स्कूल से विमुख हो चुके बच्चों को वापस स्कूल तक लाने की जिम्मेदारी सरकार की है। पहले भी गर्मी की छुट्टी में गरीब परिवार के बच्चों को काम पर भेजते थे। ग्रामीण क्षेत्र के गरीब परिवार के लिए यह अनिवार्य भी है। अभिभावकों का मानना है कि यदि बच्चे भी उनके साथ काम करेंगे तो आर्थिक स्तर में भी सुधार हो सकता है। डेढ़ साल से जिन बच्चों के पास स्मार्ट फोन है वे ऑनलाइन पर क्लास की सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। अन्य बच्चों को उनके अभिभावक मजबूरन काम पर भेज रहे हैं।

बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं

मैसूर के हनुमंत ने भावुक होकर कहा कि लॉकडाउन की वजह से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। पांच माह से घर का किराया भी भरना संभव नहीं हो पाया है। पत्नी भी बीमार है। बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे भी नहीं है। बेटी को काम पर भेजना अनिवार्य है।

पढऩ़ा चाहता है बेटा

यादगिरी की कृषक महिला ने बताया कि बेटा पढऩ़ा चाहता है। घर में गरीबी अब स्कूल में भी छुट्टी है, अनिवार्य रूप से बेटे को काम पर ले जाया गया है।

Zakir Pattankudi Incharge
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