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पढ़ाई छोड़ मवेशी चरा रहे बच्चे

पढ़ाई छोड़ मवेशी चरा रहे बच्चे
-स्कूलों पर पड़े ताले, कोरोना से पैदा हुए भुखमरी के हालात
कलबुर्गी/वाडी

हुबली

Published: August 04, 2021 10:12:36 am

पढ़ाई छोड़ मवेशी चरा रहे बच्चे
कलबुर्गी/वाडी
कोरोना ने कई जगह भुखमरी के हालात पैदा कर दिए हैं। स्कूल पर ताले पड़े हैं। कक्षाकक्षों में शराब की बोतलें पड़ी दिख रही हैं। स्कूलों के खेल मैदान में उगी घास में मवेशी चर रहे हैं। विद्यालय से विमुख हुए बच्चे अब विद्यालय के सामने मवेशियों के बीच समय बिताने के लिए मजबूर हैं।
स्कूल यूनिफार्म पहनकर हाथों में किताब लेकर विद्यालय पहुंचने के लिए तत्पर रहने वाले विद्यार्थी एक हाथ में भोजन की झोली दूसरे हाथ में लाठी लिये मवेशियों को चरा रहे हैं।
बिगड़ रहा विद्यार्थियोंं का मानसिक संतुलन
कोरोना महामारी ने पढ़े-लिखे बच्चों के जीवन को इस कदर प्रभावित कर दिया कर दिया है कि पूछो मत। आओ स्कूल चले हम, अ आ इ ई पढ़कर अलिख को पढऩा सीखो जैसे उद्घोष टीवी व रेडियो पर सुने तो बरसों बीत गए हैं। आज स्कूल के फाटक पर ताले जड़ दिए गए हैं। विद्यालय, शिक्षा, शिक्षकों से काफी समय से दूर हुए विद्यार्थियों का मानसिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है।
खेल का मैदान चारागाह में परिवर्तित
बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर जहां सरकार की ओर से जहां स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया वहीं भुखमरी की समस्या से निजात पाने के लिए अभिभावक बच्चों को मवेशियों की रखवाली के लिए भेज रहे हैं। चित्तापुर तालुक रावूर गांव का सरकारी माध्यमिक विद्यालय कंपाउंड न होने की वजह से बच्चों के खेल का मैदान चारागाह के रूप में परिवर्तित हो चुका है।
विद्यार्थी गलत राह पर चलने को मजबूर
विद्यार्थियों ने शायद ही कभी सोचा था कि जिस विद्यालय में वो पढ़ते थे उसी विद्यालय के मैदान में मवेशी चराएंगे। ये मार्मिक घटनाएं वर्तमान शिक्षा व्यवस्था का आईना हैं। पढ़ाई से विमुख हुए विद्यार्थी अपने घर के मवेशियों के साथ-साथ अन्य मवेशियों को भी चरा रहे हैं। एक ओर जहां विद्यालय अनैतिक गतिविधियों के अड्डे के रूप में परिवर्तित हो रही है वहीं रोजी-रोटी चलाने के लिए विद्यार्थी गलत राह पर चलने के लिए मजबूर हैं।
उपयुक्त कंपाउंड सिस्टम हो
सालों से विद्यालय के द्वार पर ताले पड़े हैं। विद्यालय के परिवेश में घास-फूस उगी है। गांव के बदमाश लड़के शाम होते ही स्कूल में घुस जाते हैं। शराब पीकर बोतल इधर- उधर फेंकते हैं। मवेशी भी स्कूल के परिवेश में प्रवेश करते हैं। स्कूल से वंचित बच्चे मजबूरन मवेशियों को चराते हैं। पिता छोटे-छोटे कामों में माताओं की मदद कर रहे हैं। सबसे बुरा हाल बच्चों का रहा है। स्कूल में उपयुक्त कंपाउंड सिस्टम होना चाहिए।
-भीमण्णा केसबल्ली, अध्यक्ष एसडीएमसी, सरकारी माध्यमिक विद्यालय रावूर
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