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Dakshina Bharat Hindi Prachar Sabha: दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में ऑनलाइन प्रवेश की व्यवस्था, छात्रों को होगी सहूलियत

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान के कुलसचिव (प्रभारी) प्रोफेसर मंजूनाथ एन. अंबिग की राजस्थान पत्रिका के साथ विशेष बातचीत

हुबलीJun 24, 2024 / 03:01 pm

ASHOK SINGH RAJPUROHIT

Professor Manjunath Ambig

Professor Manjunath Ambig

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई है। इसके साथ ही परीक्षा परिणाम भी ऑनलाइन ही जारी किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को सुविधा होगी। इस सत्र से यह व्यवस्था लागू की गई है। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान के कुलसचिव (प्रभारी) प्रोफेसर मंजूनाथ एन. अंबिग ने राजस्थान पत्रिका को यह जानकारी दी।
क्यूआर कोड की सुविधा
उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा मद्रास के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान (विश्वविद्यालय विभाग) ने शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के लिए एमए नियमित, अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा एवं पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन प्रवेश की व्यवस्था शुरू की है। प्रचार सभा की वेबसाइट पर समूची जानकारी उपलब्ध करवाई गई है। समूचा प्रवेश आवेदन पत्र ऑनलाइन ही भरा जाना है। ऑनलाइन आवेदन 20 जून से शुरू कर दिया गया है जो 20 जुलाई तक चलेगा। शुल्क भरने के लिए क्यूआर कोड की सुविधा दी गई है। ऐसे में फोन-पे एवं अन्य माध्यमों से भी शुल्क का भुगतान किया जा सकता है। इससे छात्रों को बहुत सहूलियत हुई है।
पाठ्यक्रमों के प्रति छात्रों का क्रेज
एक सवाल के जवाब में कुलसचिव (प्रभारी) ने बताया कि एमए समेत अन्य पाठ्यक्रमों के प्रति छात्रों का क्रेज बना हुआ है। छात्रों की कोई कमी नहीं है। कहने को हिंदी का विरोध है लेकिन उच्च शिक्षा के अध्ययन में यह कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। छात्र पूरी रुचि दिखा रहे हैं। वे हिंदी में पठन-पाठन के लिए लगातार आगे आ रहे हैं। हिंदी के क्षेत्र में रोजगार के खूब अवसर है। इसका फायदा छात्रों को पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद मिल रहा है। यही वजह है कि छात्रों का हिंदी विषय के प्रति रुझान लगातार बढ़ रहा है। दक्षिण भारत में हिंदी पठन-पाठन को लेकर लोगों की रुचि बढ़ी है। हिंदी में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद रोजगार के अवसर बढ़े हैं। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान को राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (नाक) से बी प्लस ग्रेड मिला है। इस बार हमारा प्रयास रहेगा कि ए श्रेणी मिले। इसके लिए कई आमूलचूल बदलाव किए हैं। इसका लाभ जरूर मिलेगा।
अनुवादक के रूप में नौकरी के अवसर
अंबिग ने बताया कि दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की ओर से हिंदी को बढ़ावा देने को लेकर कई पाठ्यक्रमों का का संचालन किया जा रहा है। एमए (हिंदी) नियमित पाठ्यक्रम दो साल की अवधि का है जिसमें चार सेमेस्टर है। इसी तरह से अनुवाद एवं पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम एक साल की अवधि के हैं और इसमें दो सेमेस्टर है। प्रचार सभा से पीएचडी करने के बाद कई अभ्यर्थी विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थाओं में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही अनुवाद में डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी प्रचार सभा चला रहा है। विभिन्न बैंकों एवं अन्य संस्थाओं में अनुवादक के रूप में नौकरी के अवसर मिले हैं।
पढ़ाई की गुणवत्ता पर ध्यान
कुलसचिव (प्रभारी) ने बताया कि दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के सभी केन्द्रों पर स्थित बीएड महाविद्यालयो में पढ़ाई की गुणवत्ता पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत आने वाले समय में चारवर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड बनाया जाएगा। सभी केन्द्रों में विद्यार्थियोंं की सुरक्षा को लेकर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। उनकी सुविधा के लिए कमेटियां गठित की गई हैं। धारवाड़, हैदराबाद एवं मैसूरु में बीएड महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं के छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। छात्रावास की व्यवस्था रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है।

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