scriptDebris, rocks falling on houses due to landslide | भूस्खलन से मकानों पर गिर रहा मलबा, चट्टानें | Patrika News

भूस्खलन से मकानों पर गिर रहा मलबा, चट्टानें

भूस्खलन से मकानों पर गिर रहा मलबा, चट्टानें
-कृषि तथा आवासीय क्षेत्र के लोगों की दुश्वारियां बढ़ी
हुब्बल्ली

हुबली

Published: August 04, 2021 09:59:49 am

भूस्खलन से मकानों पर गिर रहा मलबा, चट्टानें
हुब्बल्ली
कारवार के कलचे क्षेत्र में सदियों से मकान बसे हुए हैं। भूस्खलन की वजह से यहां के लोग प्रभावित हुए है। ग्रामीणों के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि ऐसी त्रासदी इस साल क्यों हुई? भूस्खलन कलचे क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ है।
निकटवर्ती तलकबैल, कोड्लगद्दे, अरबैल, हेग्गार, कोमारकुंब्री, दब्बेसाल, डब्गूली, तारगार, बीगार, बागीनकट्ट सहित कई जगहों पर मलबा गिरने की वजह से कृषि तथा आवासीय क्षेत्र प्रभावित हुई है।
पर्यटकों को भी आकर्षित करती जल धारा
जनता व मवेशियों पर इसका गहरा असर पड़ा है। जाने माने लेखक शिवानंद कलवे के अनुसार पहाड़ी क्षेत्र पर निर्मित सुरक्षा टैंक (सेफ्टी टैंक) की वजह से भूस्खलन बढ़ा है। पहाड़ के ऊपर से छोटे से झरने की तरह बहने वाली जल की धारा पर्यटकों को भी आकर्षित करती है।
छोटे-छोटे गड्ढों का निर्माण
यहां पर बीच बीच में छोटे-छोटे गड्ढों का निर्माण किया गया है। गड्ढों की वजह से पानी बगीचे में जम जाता है। ऊपरी गड्ढे निचली गड्ढों से जुड़े हुए है। चरण दर चरण बहने वाले झरने को 10-12 कि मी की दूरी पर स्थित काली नदी तक पहुंचने में एक वर्ष का समय लग जाता है।
मणिकुंबरी के पास की पहाड़ी कमजोर
यह देखा गया है कि 22 तथा 23 जुलाई को लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में बारिश हुई है। बारिश की वजह से जगह जगह पर गड्ढे बने हैं। शुध्द जल पतला होने की वजह से तीव्र गति से बहता है। पानी का बहाव तेज होने की वजह से झरना दिशा बदलकर सड़क पर निकल गया। तीव्र हिलोर की वजह से पहाड़ों पर जगह-जगह पर दरारें पडऩे की आशंका व्यक्त की जा रही मणिकुंबरी के पास की पहाड़ी कमजोर है।
खनन की वजह से प्रभावित
स्थानीय निवासी दत्तात्रेय भट्ट कण्णिपाल बीते दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि कलचे तथा निकटवर्ती क्षेत्रों में हुई मैगनीज खनन का असर यहां के क्षेत्रों पर पड़ा था। खनन कार्य में व्यस्त कंपनी की ओर से अयस्क जमा का परिवहन किया गया। अयस्क जमा का परिवहन करने वाली कंपनी के खिलाफ 1995 में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया गया। उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार 1997 में खनन स्थगित किया गया।
अध्ययन पर टिकी सभी की निगाह
मशीनों से मदद से निर्मित विशाल गड्ढों को मिट्टी से भर दिया गया। वन विभाग ने पौधे भी लगाए लेकिन, मिट्टी को स्वाभाविक रूप की पकड़ को हासिल करना मुश्किल है। कुछ ग्रामीणों का तर्क है कि पानी से मिट्टी को ढीला किया जा सकता है। इसके साथ 22 जुलाई की रात बादल फटने की वजह से मिट्टी ढीली हो गई थी। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि वह भूकंप के सही कारणों का पता लगाने के लिए भूमि वैज्ञानिकों की एक टीम भेजेंगे। टीम के अध्ययन पर सभी की निगाह टिकी है।
इनका कहना है
मैगनीज खनन, बुल्डोजर जैसे विशाल यंत्रों के प्रयोग, वन विभाग के अवैज्ञानिक उपाय भूस्खलन की बड़ी वजह है।
-वेंकटरमण भट्ट, निवासी वज्रल्ली
-ढलानों और आसपास की पहाडिय़ों पर मानव की भूलों के कारण कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है।
-शिवानंद कलवे, लेखक
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