उत्तर कन्नड़़ जिले के एंडोसल्फॉन रोगी हुए कंगाल

उत्तर कन्नड़़ जिले के एंडोसल्फॉन रोगी हुए कंगाल
-ठेके की निर्धारित अवधि बीतने से नहीं मिल पा रहा इलाज
हुब्बल्ली

By: Zakir Pattankudi

Updated: 10 Jun 2021, 01:51 PM IST

उत्तर कन्नड़़ जिले के एंडोसल्फॉन रोगी हुए कंगाल
हुब्बल्ली
इलाज उपलब्ध न होने की वजह से उत्तर कन्नड़ जिले के एंडोसल्फॉन रोगी कंगाल हो चुके हैं। कुल एक हजार 900 एंडोसल्फान के मरीज इलाज के लिए तरस रहे हैं। बीते तीन सालों से एंडोसल्फॉन रोगियों को नि:शुल्क चिकित्सा उपलब्ध करवाने का ठेका जिले के स्कॉड वेस संस्थान को दिया गया था। ठेके की अवधि मात्र तीन साल तक तक ही थी। ठेके की अवधि पूर्ण हो चुकी है। ठेके की अवधि न बढ़ाए जाने की वजह से चिकित्सा स्थगित हो चुकी है। भट्कल क्षेत्र में सबसे अधिक एंडोसल्फॉन रोगी हैं जो आज कंगाल हो चुके हैं।
जिले में कुल चार एम्बुलेन्स हैं जिनकी मदद से मरीजों को इलाज उपलब्ध करवाया जा रहा था। स्कॉड वेस संस्थान की ओर से घर-घर पहुंचकर एंडोसल्फॉन मरीजों का इलाज किया जाता था। इस संस्थान की अनुबंध की समयसीमा समाप्त होने के पश्चात मरीजों को दो माह से इलाज उपलब्ध नहीं हो रहा है। मरीजों को समझ में नहीं आ रहा वे क्या करें? मरीजों के अभिभावक अनुबंध की अवधि बढ़ाने या वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध करवाने की सरकार से मांग कर रहे हैं।

फिर लौटे कठिनाइयों के वो दिन

एंडोसल्फॉन रोगियों के जिलों में से एक जिला उत्तर कन्नड़ भी है। जिले में लगभग 2000 एंडोसल्फॉन रोगी हैं। रोगियों को आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध करवाने के मकसद से वर्ष 2018 में निजी संस्थान स्कॉड वेस के सहयोग से एंडोसल्फॉन रोगियों के लिए अलग से एंबुलेन्स की व्यवस्था की गई थी।

जिले में 1 हजार 972 एंडोसल्फॉन रोगी

जिले के छह तालुकों के अंतर्गत रोगियों के लिए 4 एम्बुलेन्स की सेवाएं शुरू की गई। इसकी वजह से एंडोसल्फॉन रोगियों को काफी सुविधा भी हुई। स्कॉड वेस संस्थान की अनुबंध की अवधि पूर्ण हो जाने की वजह से एम्बुलेन्स की सेवा स्थगित हुई। अंकोला, कुमटा, होन्नावर, भट्कल तथा सिद्दापुर कुल मिलाकर 1 हजार 972 एंडोसल्फॉन रोगी जिले में हैं। निर्धारित एम्बुलेन्स का स्टाफ सप्ताह में एक बार एंडोसल्फॉन मरीज के घर पहुंचकर नि:शुल्क औषधि वितरित करते थे। इससे मरीज के स्वास्थ्य में सुधार भी दिख रहा था। बीते दो माह से एंडोसल्फॉन रोगियों को चिकित्सा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कोरोना के चलते जारी लॉकडाउन की वजह से पीडि़तों के परिवार वालों को समझ में नहीं आ रहा कि क्या करें?

Zakir Pattankudi Incharge
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned