फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा

फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
-खेत, खलिहान, गांव जलमग्न
हुब्बल्ली

By: Zakir Pattankudi

Published: 20 Jun 2021, 12:25 PM IST

फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
हुब्बल्ली
मानसूनी बारिश का दौर जारी है। इसके चलते उत्तर कर्नाटक में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। मानसून पूर्व की बारिश से ही अधिकतर नहरों-नदियों में पानी की आवक से विभिन्न जलाशयों में जलस्तर बढ़ गया था। पिछले 17 दिनों में उत्तर कर्नाटक के यादगिरी, गदग के अलावा बकाया 13 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। उत्तर कर्नाटक के कुछ जिलों में अभी से बाढ़ के हालात नजर आ रहे हैं।
मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार एकाध दिनों में बारिश कम होगी। अगर राज्य में बारिश के जारी रहने पर या फिर महाराष्ट्र में जलाशयों के जलानयन क्षेत्र में बारिश बढऩे पर भी बाढ़ के खतरे का सामना करने के लिए तैयार होना पड़ेगा। उत्तर कर्नाटक के अधिकतर जिलों में अधिक बारिश हो रही है। महाराष्ट्र में बारिश और अधिक जारी रहने पर वहां के जलाशयों से छोड़े जाने वाला पानी उत्तर कर्नाटक में बाढ़ के हालात निर्माण कर सकता है। पिछले एक दशक से बाढ़ के हालात पर गौर करें तो आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर तक नजर आने वाली बाढ़ इस बार जून में ही नजर आ रही है।
अगस्त-सितंबर तक लबालब बहने वाले उत्तर कर्नाटक के प्रमुख जलाशों में इस बार जून के मध्य में ही एकाध जलाशयों से पानी बाहर बह रहा है।
वर्ष 2009 तथा 2019 की याद
आमतौर पर उत्तर कर्नाटक सूखाग्रस्त इलाके में शुमार होता है। आज भी यहां सिंचाई क्षेत्र 22 से 25 प्रतिशत के भीतर है। बारिश होने पर भी बाढ़ कम ही आती है परन्तु वर्ष 2009 तथा 2019 में नजर आई बाढ़ को याद करने पर आज भी लोग सहम जाते हैं। वर्ष 2009 के जुलाई के आखिर से सितम्बर के दूसरे सप्ताह तक उत्तर कर्नाटक के अधिकतर जिलों में बारिश होने पर भी हालात सामान्य थे। 28 सितंबर से केवल 9 दिनों में हुई बारिश ने पूरे उत्तर कर्नाटक की तस्वीर ही बदल दी। लगभग 60 वर्षों में ही ऐसी बाढ़ नहीं देखी थी।
उत्तर कर्नाटक के 13 जिलों में लगभग 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए थे। विजयपुर, यादगिरी, रायचूर जिलों में सब से अधिक नुकसान हुआ था। लाखों एकड़ फसल बर्बाद हुई थी। 1.80 लाख से अधिक मकान पूरी तरह या फिर आंशिक गिरे थे। 10-15 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ था। सौ वर्षों में ऐसी बाढ़ नहीं देखी थी। तब भी जून-जुलाई में उत्तर कर्नाटक के कई जिलों में कम बारिश हुई थी। महाराष्ट्र में हुई बारिश से कृष्णा, भीमा नदी तट के इलाके बाढ़ की चपेट में आए थे। सितंबर-अक्टूबर तक भारी बाढ़ के कारण 6.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसल बर्बाद हुई थी। लगभग 35 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होने का आकलन किया गया था।
अब अप्रेल, मई में ही विभिन्न जिलों में मानसून पूर्व बारिश अच्छी हुई थी। मई के दूसरे सप्ताह बाद भी बारिश होने पर मानसून में देरी या फिर बारिश की कमी होने की मौसम विभाग विशेषज्ञों की राय झूठी साबित करते हुए मानसून के तीन दिन बाद प्रवेश करने पर भी उम्मीद से अधिक बारिश हो रही है।
पंद्रह दिन की बारिश सिर्फ तीन दिन में
बेलगावी जिले के निप्पाणी, चिक्कोड़ी, हुक्केरी, बेलगावी, खानापुर तालुक, धारवाड़ जिले के अलनावर, कलघटगी तालुक, उत्तर कन्नड़ जिले के सभी तालुकों में अधिक बारिश हुई है। कुछ जगहों पर 15 दिनों में होने वाली बारिश केवल तीन दिन में ही हुई है। कल्याण कर्नाटक के विभिन्न जिलों, मुम्बई कर्नाटक के विजयपुर, बागलकोट में मानसून (खरीफ) बुवाई के लिए पूरक बारिश हुई है।
खरीफ की बुवाई में सुविधा
किसानों का कहना है कि हुई बारिश खरीफ की बुवाई के लिए सुविधा हुई है। एकाध जिलों में बारिश के कम होने पर फसल को कोई समस्या नहीं है। वरना बुवाई कर अंकुरित होने की कगार पर स्थित, थोड़ी अंकुरित हुई मूंग, सोयाबीन, मक्का आदि फसलों को नुकसान होकर दुबारा बुवाई करने के हालात पेश आने का खतरा सता रहा है।
हालात खराब होने का खतरा
महाराष्ट्र के हालात पर नजर रखे हुए हैं। वहां के प्रमुख जलाशयों के जलानयन क्षेत्र में अधिक बारिश अधिक बारिश नहीं है। हमारे यहां बारिश रुकने के चार-पांच दिन बाद वहां अधिक बारिश होने पर बाढ़ का खतरा अधिक नहीं होगा परन्तु यहां पर भी बारिश जारी रहकर वहां भी अधिक बारिश होने पर बाढ़ के हालात खराब होने का खतरा है।
-आरएच पाटील, प्रमुख, उत्तर कर्नाटक कृषि मौसम पूर्वानुमान अनुसंधान केंद्र

Zakir Pattankudi Incharge
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