वृत्ति के प्रति पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी जरूरी

वृत्ति के प्रति पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी जरूरी
-गुरुमहांतस्वामी ने कहा
इलकल (बागलकोट)

S F Munshi

November, 2108:20 PM

वृत्ति के प्रति पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी जरूरी
इलकल (बागलकोट)
दार्शनिक व सामाजिक सुधार के प्रबल पक्षधर 12वीं शताब्दी के क्रांतिकारी संत बसवण्णा ने कायकवे कैलास यानी अपनी वृत्ति (श्रम) के प्रति निष्ठा व ईमानदारी रखने वाले को स्वर्ग प्राप्ति की बात कही थी। हर इंसान के लिए उसकी वृति महत्वपूर्ण होती है।
ये विचार श्री विजय महांतेश संस्थानमठ के प्रमुख गुरुमहांतस्वामी ने व्यक्त किए।
स्वामी कर्नाटक वचन साहित्य परिषद की स्थानीय इकाई की ओर से स्व. चरलिंगय्या वस्त्रद के निवास पर आयोजित घर-घर को वचन कार्यक्रम का सान्निध्य कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वृत्ति के महत्व का बसवण्णा की समकालीन आयदक्की लक्कम्मा ने अपने वचनों में बहुत सुंदर तरीके से वर्णन किया है। बारहवीं शताब्दी के शरणों ने वृत्ति (श्रम) को काफी तवज्जो दी है।
गुरुमहांतस्वामी ने कहा कि जो भी वृत्ति की जा रही है, उससे खुद के साथ-साथ समाज का भी भला होना चाहिए। अंतरंग में शिवयोग करें और बहिरंग में श्रद्धा, निष्ठा व समर्पित भाव से वृत्ति कार्य करने चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री विजय महांतेश आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय की प्राध्यापक डॉ. शोभा नाडगौड ने कहा कि आयदक्की लक्कम्मा ने महिलाओं के जीवन को काफी प्रभावित किया। उन्होंने दासोह अर्थात अन्न दान जैसे गुणों को आत्मसात किया था। उनके वचनों में सागर जैसी गहराई भरी हुई है। वचन साहित्य का अध्ययन कर उसको जीवन में अपनाने से जीवन सोने पर सुहाग की तरह बन जाता है। डॉ. शोभा ने वचन रचियता आयदक्की लक्कम्मा की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उनके वचनों का विश्लेषण किया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष इलकल तालुक वचन साहित्य परिषद अध्यक्ष गिरिजा शिवबल ने कहा कि शरण व शरणियों ने अनुभव मंटप में वचनों का मंथन करने के बाद ही वचन साहित्य की रचना की है। वचनों में जीवन उत्थान का मार्ग बताया गया है। जीवन जीने की कला वचनों में है। घर-घर को वचन कार्यक्रम से वचनों का अर्थ समझाया जाता हैं। वचनों का घर-घर में पठन होना चाहिए। कार्यक्रम में जिला वचन साहित्य परिषद अध्यक्ष महांंतेश गजेन्द्रगढ़, बसवकेन्द्र अध्यक्ष शिवानन्द रूली, तालुक कन्नड़ साहित्य परिषद अध्यक्ष संगण्णा गद्दी, पत्रकार महांंतेश गोरजनाल, देसाईगौड पाटील प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
शांता सज्जन ने वचन प्रार्थना गाई और विजयकुमार वस्त्रद ने आगुन्तकों का स्वागत किया। राजेश्वरी शिवबल ने कार्यक्रम का संचालन किया। प्रेमा वस्त्रद ने सभी का आभार जताया।

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