महादयी योजना के लिए एक हजार करोड़ रुपए दें सरकार

महादयी योजना के लिए एक हजार करोड़ रुपए दें सरकार
-कांग्रेस नेता पी.एच. नीरलकेरी ने की मांग
धारवाड़

By: S F Munshi

Published: 07 Mar 2020, 08:30 PM IST

महादयी योजना के लिए एक हजार करोड़ रुपए दें सरकार
-कांग्रेस नेता पी.एच. नीरलकेरी ने की मांग
धारवाड़
कांग्रेस नेता पी.एच. नीरलकेरी ने कहा है कि उत्तर कर्नाटक के चार जिले और नौ तालुकों के किसानों के जीवन की जीवनरेखा कहेजाने वाली महादयी योजना के लिए मुख्यमंत्री ने बजट में 500 करोड़ रुपए आरक्षित कर किसानों को खुश करने का प्रयास किया है। वास्तव में योजना के क्रियान्वयन के लिए कम से कम एक हजार करोड़ रुपए अनुदान की आवश्यकता है।
यहां पत्रकारों से बातचीत में नीरलकेरी ने कहा कि उत्तर कर्नाटक में हाईकोर्ट तथा महादयी के लिए संघर्ष बहुत मुख्य है। संघर्ष के फलस्वरूप हाईकोर्ट बेंच की धारवाड़ में स्थापना की गई है। अब महादयी योजना के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने अनुदान आरक्षित किया है, परंतु पिछली सरकारों ने महादयी योजना के लिए एक हजार 200 करोड़ रुपए अनुदान का ब्लूप्रिंट तैयार किया था। इसके चलते यत्तिनहोळे योजना के लिए एक हजार 200 करोड़ रुपए आरक्षित किए गए हैं। उसी प्रकार महादयी योजना के लिए कम से कम एक हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता है। तुरंत मुख्यमंत्री को और 500 करोड़ रुपए अनुदान की घोषणा करनी चाहिए।
नीरलकेरी ने कहा कि राज्य के बजट से आमजन पर बोझ बड़ा है। उत्तर कर्नाटक के साथ फिर से धोखा हुआ है। राज्य सरकार के इस भेदभाव वाले बर्ताव की सार्वजनिक तौर पर चर्चा की जा रही है। सत्तारूढ सरकार को पक्षभेद को भूल कर काम करने की जरूरत है। तभी सामान्य तबके का विकास होगा। बच्चों का बजट स्वागत योग्य है। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक यह असंतुलित बजट है।
उन्होंने कहा कि राज्य में बेरोजगारी की समस्य बढ़ गई है। ऐसे में मुख्यमंत्री येडियूरप्पा की ओर से पेश किया गया राज्य का बजट रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में भी विफल हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के कार्यकाल में लागू की गई यशस्विनी योजना से बहुत लोगों को फायदा मिला है। इसके चलते राज्य की भाजपा सरकार को इस योजना को लागू करना चाहिए। इस योजना को छोड़ देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
संवाददाता सम्मेलन में पूर्व महापौर दानप्पा कब्बेर, नेता मंजुनाथ भोवी, राजु हरपनल्ली, आर.एस. पाटील आदि उपस्थित थे।

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S F Munshi Reporting
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