राज्य के विकास के लिए मारक बना जीएसटी

राज्य के विकास के लिए मारक बना जीएसटी
-कांग्रेस नेता वसंत लदवा ने लगाया आरोप
हुब्बल्ली

राज्य के विकास के लिए मारक बना जीएसटी
हुब्बल्ली
हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर जिला कांग्रेस प्रवक्ता वसंत लदवा ने कहा है कि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार राज्य तथा केंद्र सरकारों के बीच आर्थिक संकट उपजा है। केंद्र सरकार नियमित तौर पर राज्यों के जीएसटी का हिस्सा तथा राहत राशि को मंजूर नहीं करने से राज्य के विकास कार्यों के लिए मारक बना है।
संविधान के 101वें संशोधन के साथ जुलाई 2017 से बिना तैयारी के वित्तीय वर्ष के मध्य में जीएसटी लागू की गई। एक देश एक कर एक बाजार व्यवस्था आनलाइन के जरिए अमल में लाने की घोषणाओं के जरिए रातोंरात मूलभूत सुविधाओं का विकास किए बिना जीएसटी लागू की गई परन्तु अब तीस माह बीतने पर भी सूचना तकनीक, ऑनलाइन मूलभूत सुविधाओं को पूरे पैमाने पर विकास करना केंद्र सरकार से संभव नहीं हो पाया है। कानूनी तौर पर सूचना तकनीक, मूलभूत सुविधाएं, सक्षम डाटा, सर्वर, बैंड विड्थ आदि नियमित, संपूर्ण तौर पर विकसित नहीं करके कार्यक्षमता तथा क्षमता की जांच किए बिना जीएसटी को देश में लागू किया गया। पूरी तैयारी की कमी के चलते अल्पावधि में ही तीन सौ से अधिक अधिसूचनाएं, परिपत्र संशोधन व अंतरिम फैसले लागू हुए परन्तु जीएसटी लागू करने से पहले की जाने वाली जरूरी तैयारियों करना अभी भी संभव नहीं हो पाने से अभी भी बदलाव के चरण में है।

केंद्र-राज्यों के बीच टकराव

लदवा कहते हैं कि 18 दिसंबर 2019 को हुई 13वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में अनेक विकास कार्रवाई तथा बदलावों के बारे में चर्चा के स्तर पर ही हैं। 14वें वित्तीय आयोग की सिफारिशों के अनुसार भुगतान हुए कर में 42 प्रतिशत तथा जीएसटी राज्यों के राहत कानून 2017 के अनुसार जीएसटी लागू होने से होने वाला नुकसान तथा 14 प्रतिशत अतिरिक्त राहत केंद्र सरकार राज्यों को संविधान के अनुसार नियमित तौर पर हर दो माह में एक बार मंजूर करना चाहिए था परन्तु केंद्र सरकार नियमित तौर पर राशि मंजूर नहीं करके देरी बरतने के कारण राज्यों की वित्तीय हालात संकट में फंसे हैं जिससे विकास कार्य लंबित होने से आजाद भारत के इतिहास में केंद्र-राज्यों के बीच आर्थिक संकट उपजने से संघर्ष का कारण बना है।

नहीं मिली कर्नाटक के हिस्से की राशि

जीएसटी लागू होने से हर वर्ष अत्यधिक कर संग्रह हो रहा है। वर्ष 2017-18 में 7 लाख, 40 हजार 6 50 करोड़, 2018 -19 में 11 लाख 79 हजार 357 करोड़, 1 अप्रेल 2018 से 31 दिसंबर 2029 के नौ माह में नौ लाख 300 करोड़ रुपए 2019-20 की अवधि में लगभग 12 लाख 11 हजार 6 7 करोड़ रुपए कर केंद्र सरकार को जमा हुआ है परन्तु राज्यों के हिस्से की राशि मंजूर करने में केंद्र सरकार देरी कर रही है। कर्नाटक राज्य के सैकड़ों करोड़ पिछले अक्टूबर से अब तक केंद्र सरकार ने मंजूर नहीं किए हैं।

इंटरनेट क्षमता अपर्याप्त

अनियमित ऑनलाइन, तकनीकों के कारण कानूनी कार्रवाई तथा अर्जियों की स्पष्टता से मासिक रिपोर्ट सौंपने में एक भी भी देरी होने पर करदाता से, उद्यमियों से जुर्माना वसूला जा रहा है। हर माह 18 से 20 तारीख को इंटरनेट की क्षमता की कमी से मासिक रिपोर्ट सौंपकर कर भुगतान करना संभव नहीं हो रहा है। इसके बावजूद देरी के लिए व्यापारियों पर जुर्माना लगाया जा रहा है।

पंजीयन एकतरफा कर देते हैं रद्द

जुर्माने का भुगतान नहीं करने पर ऐसे उद्यमियों, व्यापारियों के कारोबार, सुविधाओं को एक तरफा मौका नहीं देकर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। कारोबार, माल परिवहन के लिए जरूरी तथा अनिवार्य ई वे-बिल प्राप्त करने के लिए प्रतिबंध लगाकर कारोबार में बाधा पहुंचाया जाता है। कई कारणों से मासिक रिपोर्ट नहीं सौंपने पर ऐसे व्यापारियों के पंजीयन एकतरफा रद्द किया जाता है। जीएसटी कानून के अनुसार जुर्माना बकाया होने पर कानून के अनुसार वसूली करने के विधि-विधान प्रावधान हैं परन्तु इनका पालन नहीं करके पंजीयन रद्द कर कारोबार को स्थगित होने जैसे एकतरफा कार्रवाई देश के सभी व्यापारी, उद्यमियों, सेवा क्षेत्र, छोटे उद्योगों को समस्या हो रही है। इसके चलते जीएसटी से केवल राज्य ही नहीं व्यापारी व उद्यमी भी नाराज हैं।

Zakir Pattankudi Incharge
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