इचलकरंजी में पावरलूम की बीम पर चढऩे लगा जंग

इचलकरंजी में पावरलूम की बीम पर चढऩे लगा जंग

By: S F Munshi

Published: 03 Jul 2021, 12:35 AM IST

इचलकरंजी में पावरलूम की बीम पर चढऩे लगा जंग
कोल्हापुर
पावरलूम व्यवसाय अब तक पूर्ववत शुरू नहीं होने से इचलकरंजी में कई जगहों पर रखे गए बीम पर जंग (रस्ट) चढऩे लगा है। कुछ जगहों पर तो ऐसे बीम रखी जगहों पर पेड़-पौधे उग गए हैं। इसको देखते हुए शहर के पावरलूम व्यवसाय की हालत कितनी दयनीय हुई है इसका प्रातिनिधिक चित्र स्पष्ट हुआ है।
कोरोना संसर्ग के चलते पावरलूम व्यवसाय का चित्र पूरी तरह बदल गया है। अब इस व्यवसाय में अस्थिरता पैदा हुई है जिससे यह व्यवसाय आगे चलेगा कि नहीं ऐसी स्थिति कई उद्यमियों की हो गई है। इचलकरंजी में लगभग सवा लाख पावरलूम कामगार हैं। इसमें 50 से 60 हजार पावरलूम पर आढ़त व्यापारी की ओर से बीम लेकर उस पर कपड़ा बुन कर देने का काम चलता है। उसके बदले में उनको आढ़त व्यापारी की ओर से मजदूरी मिलती है। इस तरह के 150 व्यापारी पावरलूमधारकों को बीम देकर उनकी ओर से कपडा बुनने का काम किया जाता है। बाकी पावरलूम उद्यमी खुद सूत की खरीदारी कर कपड़े की बिक्री करते हैं।
गए कुछ सालों में सीधे पावरलूम का अस्तित्व रहेगा कि नहीं ऐसी स्थिति पैदा हुई है। देश की बाजारपेठ में कपड़े की मांग नहीं होने से आढ़त व्यापारी कपड़े का उत्पादन करने के लिए पावरलूमधारकों को बीम देने के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं दिखाई देते। एक ओर कपड़े को दर नहीं और दूसरी ओर सूत के बढ़ते दाम। इससे मजूरी से कपड़ा बुन कर लेकर उसकी बिक्री करना व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा ठहर रहा है। ऐसी हालत में कई माह से आढ़त व्यापारियों के कार्यालय परिसर में बीम पड़े हुए हैं। रुई, चंदूर, कबनूर, कोरोची, तारदाल, शहापुर और यड्राव परिसर में बड़े पैमाने पर पावरलूम हैं जिससे यहां पर बीम बड़ी संख्या में पड़े हुए हैं। उन पर जंग लग रहा है जो पावरलूम उद्योग की कुल स्थिति को दर्शाता है।

S F Munshi Reporting
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