scriptIndigenous paddy crop damaged due to unseasonal rains | बेमौसम बारिश से खराब हुई देसी धान की फसल | Patrika News

बेमौसम बारिश से खराब हुई देसी धान की फसल

बेमौसम बारिश से खराब हुई देसी धान की फसल
-व्यापारी खरीदने को तैयार नहीं
-धारवाड़, बेलगावी, हावेरी और उत्तर कन्नड़ जिले में 50 से अधिक देसी नस्ल की धान की फसल खराब
हुब्बल्ली

हुबली

Published: January 12, 2022 09:46:39 am

बेमौसम बारिश से खराब हुई देसी धान की फसल
हुब्बल्ली
मानसून के दौरान धान उगाने वाले किसान की कहानी कुछ अजीब सी हो गई है। घर पर पर्याप्त धान से भरी बोरियां होने के बावजूद वह चावल नहीं बन रहे हैं। काले धान को कोई भी व्यापारी खरीदने को तैयार नहीं है। धान की घास मवेशी खा भी नहीं रहे हैं। कुल मिलाकर वर्ष 2021 के मानसून के दौरान धान उगाने वाले किसान की व्यथा अजीब हो गई है।
बेमौसम बारिश से खराब हुई देसी धान की फसल
बेमौसम बारिश से खराब हुई देसी धान की फसल
किसान संकट में

धारवाड., बेलगावी, हावेरी तथा उत्तर कन्नड़ जिले में 50 से अधिक देसी नस्ल की धान की फसल बेमौसम बारिश से खराब हो चुकी है। हर वर्ष 2100 रुपए तक देसी धान की बिक्री होती थी परंतु इस साल कोई व्यापारी देसी धान खरीदने को तैयार नहीं हैं। इसके चलते धान उगाने वाले किसान संकट में आ गए हैं।
कम धान उगा रहे हैं

हर साल जून, जुलाई में उगाए जाने वाली चंपाकली, साली, इटान, अंबेमूरी, लालचावल सहित विभिन्न किस्म के धान यहां उगाए जाते हैं साथ ही इस क्षेत्र के निवासियों का यह सात्विक भोजन भी है। हालांकि इस क्षेत्र में अधिकांश गन्ने की खेती होती है। किसान इतना कम धान उगा रहे हैं कि केवल उनके परिवार के लिए मात्र पर्याप्त हो रहा है।
किसानों का कहना है कि धान के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों की ओर से समर्थन मूल्य की घोषणा करना मात्र पर्याप्त नहीं है। इन तीन जिलों में बेमौसम बारिश से नुकसान झेल रहे देशी धान उत्पादक किसानों को उचित मुआवजा देना चाहिए।
चार लाख से घटकर 41 हजार हेक्टेयर हुआ दायरा

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 1950-1९75 के बीच धारवाड़, उत्तर कन्नड़, बेलगावी जिले के 4.17 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 50 से अधिक प्रकार के देसी धान को उगाया जाता था परन्तु वर्ष 2000 को इसका रकबा 1.79 हेक्टेयर को घटा था। 2020 को इन जिलों में केवल 41 हजार हेक्टेयर रह गया है। 50 प्रकार के देसी धानों में 20 प्रकार के धान मात्र प्रचलित हैं। बदलते मौसम, बेमौसम बारिश, कृषि मजदूरों की समस्या तथा गन्ने की फसल की बढ़ती मांग से देसी धान हाशिए पर चला गया है। और दस वर्षों में धान की फसल इन तीन जिलों से लुप्त हो जाएगी।
देसी धान की खरीददारी नहीं हो रही

बीते साल 16 से 20 नवम्बर तक हुई बेमौसम बारिश से सप्ताह भर पानी में रहने के बाद धान की फसल बर्बाद हो गई। अब धान का उपयोग चारे के लिए भी करना संभव नहीं। नहरों में आए उफान से अधिकांश फसल पानी में बह गई। बेमौसम बारिश में भीगे धान को खरीदने वाला कोई नहीं है। इसके चलते हलियाल की बड़ी मंड़ी में देसी धान की खरीददारी नहीं हो रही है। आठ बोरी धान को वहीं फेककर आया हूं।
-शिवानंद नागप्पनवर, किसान, मंडिहाल
घटिया गुणवत्ता के धान खरीदना छोड़ दिया

हर वर्ष 50 हजार क्विंटल धान खरीदकर बिक्री करता हूं। इस वर्ष देसी धान बारिश फंसकर चावन की गुणत्ता घटी है। महाराष्ट्र तथा राज्य के करावली जिलों में मांग घटी है। इसके चलते घटिया गुणवत्ता के धान की खरीदना छोड़ दिया है।
-विनायक चंदगडकर, देशी धान व्यापारी
एक ही फसल का मुआवजा दिया जाता है

बारिश के कारण खराब हुई देसी धान सहित सभी फसलों के लिए मुआवजे की घोषणा की गई है। धारवाड़ जिले में किसानों को 90 करोड़ रुपए राहत राशि के तौर पर दिया गया है। कितनी भी फसलें खराब हों केवल एक ही फसल का मुआवजा दिया जाता है।
-राजशेखर, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग, धारवाड़

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