नहीं थमी है लौह अयस्क की तस्करी

नहीं थमी है लौह अयस्क की तस्करी

By: S F Munshi

Published: 22 Jun 2021, 08:18 PM IST

नहीं थमी है लौह अयस्क की तस्करी
-लीपिंग ऐश के नाम पर अवैध रूप से भेजा जा रहा आंध्रप्रदेश
बल्लारी
उच्चतम न्यायालय के आदेश पर जिले में अवैध खनन पर रोक लगी होगी परंतु जिले से आंध्रप्रदेश के लिए अवैध अयस्क परिवहन पर ब्रेक नहीं लगा है। इसका जीता जागता उदाहरण कुछ दिन पहले संडूर में और दो दिन पहले बल्लारी में अवैध अयस्क परिवहन में लिप्त लारियों को जब्त किया गया था। इन दोनों मामलों में साफ दिख रहा है कि खदान, परिवहन, जिला पुलिस अधिकारी अपना कर्तव्य सतर्कता व निष्ठा के साथ नहीं निभा रहे हैं। अवैध रूप से अयस्क परिवहन के बारे में सब कुछ जानते हुए भी विभाग के अधिकारी आंख व कान मूंद कर बैठे हैं। अवैध परिवहन में कुछ लोगों ने हिस्सा मांगा।
हिस्सा न मिल पाने के कारण हिस्सा मांगने वालों ने आंध्रप्रदेश की ओर अयस्क लेकर जा रही लॉरियों के बारे में जानकारी दी। पुख्ता जानकारी प्राप्त करने के उपरांत लारियां जब्त करने वाली पुलिस अधिकारिक तौर पर प्रेस नोट जारी कर यह जता रही कि जैसे लॉरियों को उन्होंने ही जब्त किया हो।
पुलिस को जानकारी उपलब्ध करवाकर 19 जून की रात को लारियों को जब्त करवाए जाने के बावजूद अगले दिन दोपहर तक टीवी पर कोई खबर न चली। इससे खफा हुए पुलिस को किसी प्रकार की जानकारी न देने वाले ही मीडिया को जानकारी दे रहे हैं। कर्नाटक की एक तथा आंध्रप्रदेश की 18 लारियों को जब्त कर जिस स्थान पर रोका गया था उस स्थान पर मीडिया कर्मियों के पहुंचने के पश्चात पुलिस ने स्वीकार किया कि उन्होंने ही रात को लॉरियां जब्त की थी।
बल्लारी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम का इनवाइस लेकर अवैध रूप से तमिलनाडु के तिरुवल्लूर के लिए अवैध अयस्क परिवहन किया जा रहा था। लॉरी को पकड़वाने में अहम भूमिका निभाने वालों के मन में एक ही सवाल उठ रहा है पुलिस अगले दिन दोपहर तक चुप क्यों रही?
अवैध परिवहन में लिप्त लोगों को क्या इनाम मिल सकता है इस बारे में तो पता नहीं कुल मिलाकर जनता को यह पता चला कि अभी भी जिले में अवैध अयस्क परिवहन का कारोबार चालू है।
जिले में चल रहे अवैध खनन तथा अयस्क परिवहन के दमन के लिए बेंगलूरु से बल्लारी तक की दूरी पदयात्रा के माध्यम से तय कर सरकार पर दबाव बनाकर अवैध खनन को रोकने में सफलता हासिल करने वाले सिध्दरामय्या सन् 2013 में मुख्यमंत्री बने। आज सिध्दरामय्या पुन: बल्लारी आए हैं आज भी अवैध परिवहन चल रहा है। लोगों के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि सिध्दरामय्या का इस बारे में क्या कहना है?
खनन उद्योग में लिप्त लोगों का मानना है कि इस प्रकार परिवहन किए जा रहे लौह अयस्क की खरीदारी किसी ई नीलामी में नहीं हुई है। उच्चतम न्यायालय की ओर से कर्नाटक से अयस्क आयात पर प्रतिबंध लगाए जाने की वजह से अधिक लाभ कमाने के लिए कृष्णपट्टणम बंदरगाह से विदेश के लिए लौह अयस्क का निर्यात किया जा रहा है। अनुमानत: एक टन अयस्क के लिए 150 डॉलर यानी कि 10 हजार रुपए से अधिक मूल्य है।
अनुभवी लॉरी मालिकों के अनुसार चोरी काम तमिलनाडु नहीं जा रही है परंतु पुलिस ऐसा क्यों कह रही है पता नहीं। तमिलनाडु की लारियों में ही माल का परिवहन होता है। जिन लॉरियों को पकड़ा गया है वे लॉरियां आंध्रप्रदेश की हैं। इससे यह तो स्पष्ट है यह माल आंध्रप्रदेश के कृष्णपट्टणम बंदरगाह को भेजा जाएगा। कई प्रभावी लोग इसमें शामिल हैं जिसकी वजह से आंध्रप्रदेश में अभी तक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। जिले में कई स्पंज आयरन अयस्क कारखानों को खरीदने वाले जिले के पूर्व विधायक इसमें शामिल होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। जिले में स्पंज आयरन कारखाने से ही अवैध कारोबार में लिप्त है।
पुलिस अधीक्षक बुधवार को बैठक आयोजित करेंगे देखना यह है वे अवैध परिवहन पर लगाम कसने में क्या कुछ ठोस कदम उठाएंगे।
इनका कहना है
वन, चेकपोस्ट पार कर लॉरी आंध्रप्रदेश कैसे जा रही है। कांग्रेस कर्यकाल में ऐसा नहीं हुआ। राज्य में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद पुन: अवैध कारोबार शुरू हुआ। लॉरी चालक मीडिया वालों को यह बता चुके हैं कि वे कृष्णपट्टनम जा रहे हैं। पुलिस के दर्ज मामले में यह क्यों लिखा गया है कि लारी तमिलनाडु जा रही थी। बिना राजनीतिक मदद के यह सब संभव नहीं।
-टपाल गणेश, खदान उद्योगपति

S F Munshi Reporting
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