अधिक लाभ के लालच में सागवान के वृक्ष उगाना ठीक नहीं

अधिक लाभ के लालच में सागवान के वृक्ष उगाना ठीक नहीं
-किसान पहुंचे इस नतीजे पर
हुब्बल्ली

By: Zakir Pattankudi

Published: 21 Jul 2021, 11:35 AM IST

अधिक लाभ के लालच में सागवान के वृक्ष उगाना ठीक नहीं
हुब्बल्ली
दांडेली में जिस प्रकार सागवान के लम्बे लम्बे वृक्ष हैं इसी प्रकार वाटरशेड के वृक्ष भी काफी घने हो चुके हैं। पड़ोसी खेत वाले भी किसानों को सता रहे हैं। कुल मिलाकर किसान अब इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अधिक लाभ के लालच में सागौन के वृक्ष को उगाना ठीक नहीं है।
वन क्षेत्र में कृषि करना वर्तमान में अत्यंत कठिन है। पर्यावरण की रक्षा के लिए कृषि के साथ साथ वन विकास कार्य को प्राथमिकता देना भी अनिवार्य है। सरकार समय-समय पर वृषारोपण को प्रोत्साहित करती रही है। जिले में सत्रह साल पहले जारी सुजल जलानयन योजना के अंतर्गत लगाए गए सागवान के वृक्ष आज किसानों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। सागौन के वृक्ष ठीक तरह से बढ़ नहीं रहे हैं। किसान ना ही इन वृक्षों की रखवाली कर पा रहा है। सरकार की ओर से इन्हें संरक्षित वृक्ष घोषित किए जाने की वजह से किसान इन्हें काट भी नहीं सकता।

वाटरशेड क्षेत्र में वृक्ष

वर्ष 2002 -03 के दौरान जारी जलानयन योजना के अंतर्गत धारवाड़, कलघटगी, अल्नावर तथा हुब्बल्ली तालुक सहित जिले भर पांच लाख से अधिक सागवान के पौधे लगाए गए थे। बाद में वन विभाग की ओर से सागवान के पौधे नि:शुल्क वितरित किए गए। इतना ही नहीं खेतों में सागवान के वृक्ष उगाने वालों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन भी दिया जाने लगा। संरक्षित संपत्ति घोषित किए जाने की वजह से कृषि उपकरण निर्माण के लिए किसान इन्हें काट भी नहीं सकता था।

मामला दर्ज कर रहे हैं वन विभाग के अधिकारी

जिले के अद्र्ध पहाड़ी क्षेत्र के किसानों के लिए वृक्षों की रक्षा करना अनिवार्य है। हल जोतते वक्त इन वृक्षों की वजह से किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन वृक्षों से छांव पड़ती है जो उगती फसल के लिए अनुपयुक्त है। इससे फसल ठीक तरह से नहीं उगती। किसानों को भी यह भी अधिकार नहीं कि वह कृषि गतिविधियों में बाधा डालने वाले इन पेड़ों को काट सके। गलती से भी पेड़ काटने वाले किसान पर वन विभाग के अधिकारी मामला दर्ज कर रहे हैं। पड़ोसी खेत वाले भी किसानों को पेड़ काटने के लिए कह रहे हैं। किसान पेड़ काटने के तैयार तो हैं परंतु वन विभाग की ओर से अनुमति अभी तक नहीं मिली।

वृक्षों को काटने से पूर्व अनुमति जरूरी

सागवान के वृक्ष काटने के लिए सरकार की ओर से अनुमति लेने का प्रावधान है। वृक्षों को काटने के लिए पहले तालुक तहसीलदार या वन अधिकारी को आवेदन सौंपना पड़ता है। संबंधित विभागीय अधिकारियों को संबंधित ग्राम पंचायतों की ओर सूचित करने पश्चात तहसीलदार एवं उपविभागीय अधिकारी पहले स्थल का निरीक्षण कर वृक्षारोपण की स्वीकृति प्रदान करेंगे। इसमें सालों लग जाते हैं।

Zakir Pattankudi Incharge
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