जैन भगवती दीक्षा समारोह कल, निकलेगी शोभायात्रा

जैन भगवती दीक्षा समारोह कल, निकलेगी शोभायात्रा
-आचार्य महेंद्र सागर की उपस्थिति में होगा समारोह
धारवाड़

S F Munshi

January, 1608:32 PM

जैन भगवती दीक्षा समारोह कल, निकलेगी शोभायात्रा
धारवाड़
शहर के दैवज्ञ कल्याण मंडप में 18 जनवरी की सुबह 8.30 बजे जैन भगवती दीक्षा समारोह होगा। इस अवसर पर गुजरात के अंकलेश्वर के निवासी अनिरुद्ध कुमार चौहान भगवती दीक्षा ग्रहण करेंगे। यह समारोह आचार्य महेंद्र सागर के सान्निध्य में होगा।
जैन समाज के नेता ललित भंडारी ने बताया कि यह धारवाड़ में चल रहा प्रथम जैन दीक्षा समारोह है। दीक्षा कार्यक्रम के उपलक्ष्य में 17 जनवरी की सुबह 9 बजे रविवारपेट स्थित जैन मंदिर से भव्य शोभायात्रा (वरघोड़ा) निकाली जाएगी। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए दैवज्ञ कल्याण मंडप पहुंच कर संपन्न होगी। शोभायात्रा में अनिरुद्ध कुमार संसारिक जीवन त्याग करने के संकेत रूप में गरीबों को अनाज, वस्त्र आदि दान करेंगे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्रप्रदेश तथा राज्य के विविध भागों से जैन भक्तों का आगमन होगा।
बचपन में ही लिया संकल्प
दीक्षा लेने वाले अंकलेश्वर के अनिरुद्ध कुमार चौहान ने बताया कि उन्होंने बचपन में ही मुनि दीक्षा लेने का संकल्प लिया था। वे आचार्य महेंद्र सागर मुनि, राजपद्मसागर महाराज, मेरु पद्मसागर मुनि के निश्रा में जैन भगवती दीक्षा स्वीकार करेंगे। अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि जैन साध्वी मेरी नानी कपिला बहन से करीबी के चलते वे दीक्षा के लिए प्रेरणा बनीं। अनिरुद्ध ने 8 वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। दुनिया के व्यामोह से बढ़ कर खुशी दीक्षा स्वीकार करने से मिलती है। संतों के बारे में सम्मानपूर्वक संसारिक जीवन त्याग कर सन्यास स्वीकार करने का निर्णय लिया है। जैन धर्म ग्रंथ कल्पसूत्र को संपूर्ण अध्ययन किया है। अनिरुद्ध कुमार कहते हैं कि वे 15 वर्ष के हैं। भविष्य को लेकर चिंता कर मानसिक तथा शारीरिक रूप से दीक्षा लेने के लिए तैयार हैं। छोटी उम्र में ही वर्ष 2012 में ही दीक्षा हासिल करने का संकल्प लिया था। अब आचार्य महेंद्र सागर मुनि का शिष्य बन कर 18 जनवरी को धारवाड़ में जैन भगवती दीक्षा प्राप्त कर रहा हूँ। दीक्षा लेने का फैसला करने पर मेरे माता-पिता विक्रमभाई चौहान और सुशीला बहन ने इस पर सहमति दे दी। उन्होंने कुछ वर्षों के पश्चात दीक्षा लेने की सलाह दी। वह समय अब आ गया है।
त्याग भावना से मिलता है सम्मान
आचार्य महेंद्र सागर ने कहा कि हर व्यक्ति में भोग और त्याग दोनों भावना होती हैं, परंतु त्याग भावना वाले व्यक्ति को समाज में सम्मान मिलता है। भोगवाले व्यक्ति का सम्मान कम होता है। संन्यास सभी धर्मों में है। धर्म के अंतर्गत उन्हीं के नियम हैं। संन्यास स्वीकार करने वालों को उनका पालन करना चाहिए। दीक्षा प्राप्त व्यक्ति को सारा विश्व ही परिवार होता है।

S F Munshi Reporting
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