गोकाक क्षेत्र में जारकिहोली बंधुओं की चुनौती

गोकाक क्षेत्र में जारकिहोली बंधुओं की चुनौती
गोकाक क्षेत्र में जारकिहोली बंधुओं की चुनौती,गोकाक क्षेत्र में जारकिहोली बंधुओं की चुनौती

Zakir Pattankudi | Updated: 09 Oct 2019, 08:12:48 PM (IST) Hubli, Dharwad, Karnataka, India

गोकाक क्षेत्र में जारकिहोली बंधुओं की चुनौती
-एक दूसरे के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव
हुब्बल्ली

गोकाक क्षेत्र में जारकिहोली बंधुओं की चुनौती
हुब्बल्ली
पिछले बीस वर्षों में यही पहली बार गोकाक विधानसभा क्षेत्र में जारकिहोली बंधु एक दूसरे के आमनेसामने होंगे।
जारकिहोली के पांच भाइयों में आखरी भाई लखन जारकिहोली ने खुद को गोकाक विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस उम्मीद्वार के तौर पर घोषित कर 21 ग्राम पंचायतों के कार्य क्षेत्र में प्रचार कार्य आरम्भ किया है।
गोकाक विधानसभा क्षेत्र के लिए 5 दिसंबर को उपचुनाव होगा। अगर उच्चतम न्यायालय से क्लीन चिट मिलने पर उपचुनाव में इनके बड़े भाई रमेश जारकिहोली मैदान में उतरेंगे।

जनता की समस्याओं को नहीं सुना

बेलगावी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए लखन जारकिहोली ने कहा कि रमेश जारकिहोली जनता की उम्मीदों को पूरा करने में विफल हुए हैं। पांच बार बतौर विधायक निर्वाचित होने के बाद भी जनता की समस्याओं को नहीं सुना। इसके चलते उन्हें 50 हजार मतों के अंतर से हराएंगे।

राजनीतिक भविष्य को बर्बाद किया

दूसरी ओर भाजपा उम्मीद्वार के तौर पर चिन्हित रमेश जारकिहोली गोकाक विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल करने के विश्वास में हैं। रमेश जारकिहोली ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ लखन को मैदान में उतारने के लिए उनके एक और भाई सतीश जारकिहोली कारण हैं। इससे पूर्व सतीश जारकिहोली ने बिमशी को लाकर उसके राजनीतिक भविष्य को बर्बाद किया।

अकेले संघर्ष करना पड़ रहा है

जारकिहोली के करीबी मुन्ना भगवान का कहना है कि रमेश जारकिहोली 1999 से लगातार पांच चुनाव जीते हैं परन्तु इस बार रमेश को उनके दो भाईयों का समर्थन नहीं है। रमेश की जीत के पीछे सतीश तथा लखन का परिश्रम रहता था परन्तु यही पहली बार रमेश को भाईयों का समर्थन नहीं मिलने से अकेले संघर्ष करना पड़ रहा है। रमेश के पांच बार जीतने का पूरा श्रेय सतीश तथा लखन को जाता है। इनकी मदद के बिना रमेश का एक भी चुनाव जीत पाना संभव नहीं।

साले बने भाईयों के बीच दरार का कारण

रमेश जारकिहोली का गोकाक की राजनीति में अपने साले अंबिराव पाटील तथा अप्पी पाटील को लाना भाईयों के बीच दरार पैदा करने का प्रमुख कारण बना। पिछले कई वर्षों से अंबिराव पाटील अपने बहनोई रमेश जारकिहोली से संबंधित सभी राजनीतिक कारोबार, उद्योग तथा अन्य कारोबारों को देख रहे हैं। उच्चतम न्यायालय के क्लीन चिट देने पर गोकाक विधानसभा उपचुनाव में रमेश जारकिहोली चुनाव लड़ेंगे। अगर क्लीन चिट नहीं मिलने पर अपने साले अंबिराव पाटील को मैदान में उतारने की रमेश की योजना है।
लखन का कहना है कि रमेश के राजनीतिक जीवन को अंबिराव ने पूरी तरह बर्बाद किया है। वे चाहते हैं कि रमेश उनके खिलाफ चुनाव लड़ें क्योंकि उनके समर्थन के बिना उनका जीतना संभव नहीं है, इसे वे दिखाना चाहते हैं।

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