कर्म ही शुभ और अशुभ के निर्माता

कर्म ही शुभ और अशुभ के निर्माता

By: S F Munshi

Published: 03 Jul 2021, 12:30 AM IST

कर्म ही शुभ और अशुभ के निर्माता
-राष्ट्रसंत नरेशमुनि ने कहा
इलकल (बागलकोट)
राष्ट्रसंत नरेशमुनि ने कहा है कि जो जैसा बीज बोएगा उसे उसका वैसा ही फल मिलेगा। उसी तरह आदमी जैसा कर्म करेगा उसे एक न एक दिन उसके फल भोगने ही पड़ेंगे। पाप के कार्य से अशुभ कर्मों का संचय होता है और पुण्य के कार्य से शुभ कर्मों का संचय होता है।
उन्होंने कहा कि त्याग जीवन के वास्तविक विकास का मूल है। जितना लोभ है, उतना ही क्षोभ है। लोभ शब्द की ऊपर की मात्रा हटा देने पर फिर लाभ ही लाभ है। जो भी लेना छोडक़र देना सीखे तो उसके साथ सहानुभूति, सौहार्द, सहयोग, स्नेह की जो धारा प्रवाहित होगी वह जीवन को श्रेष्ठता का पथगामी बना देगी। हमारे यहां त्याग और त्यागी को सर्वत्र सम्मान मिलता है। पुण्य से अच्छे संयोग मिलते हैं और उससे विकास होता है।
संत शालिभद्रमुनि ने भी कहा कि धर्म ही हमारा रक्षा कवच है। कषायों से निवृत्त होने के लिए धर्म ध्यान, त्याग तपस्या करना जरूरी है। मन व तन की शुद्धता के लिए शुद्ध ताजा पौष्टिक आहार घर का ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां के गौतम और राजू बोरा ने अपने फार्म-हाउस में प्रवचन रखा है और साथ में पूरे जैन समाज के लोगों के लिए भोजन यानी गौतम प्रसादी रखी है। यह उनकी श्रेष्ठ भावना का यह उदाहरण है।
प्रवचन के पश्चात यहां के नवजात शिशु विशेषज्ञ डॉ. पवनकुमार दरक, फिजिशियन डॉ. अय्यनगौड गंगण्णावर, डॉ. मल्लनगौड पडेगौडर का संतों के सम्मुख बोरा परिवार की ओर से शाल ओढ़ाकर व मालार्पण करके सम्मान किया गया। इस मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष सज्जनराज मेहता ने तीनों चिकित्सकों का परिचय देते हुए कहा कि इनकी सेवा तारीफे काबिल है। साधु साध्वियों की जो नि:स्वार्थ और नि:शुल्क सेवा करते हैं वह सराहनीय है।
संत नरेशमुनि महाराज आदि ठाणा 2 का शनिवार को यहां से गंगावती की ओर विहार करने की संभावना है। साध्वी चन्दनबालाश्री आदि ठाणा चार का शनिवार को इलकल में मंगलप्रवेश होगा।

S F Munshi Reporting
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