रेशम फसल से लाखों कमा रही है कोट्रम्मा

रेशम फसल से लाखों कमा रही है कोट्रम्मा
-राज्य स्तरीय महिला श्रेणी में तीसरा पुरस्कार मिल चुका है
हुब्बल्ली

रेशम फसल से लाखों कमा रही है कोट्रम्मा
हुब्बल्ली
बल्लारी जिले के हगरीबोम्मनहल्ली तालुक के शीगेनहळ्ळी की कोट्रम्मा संगप्पा रेशम की फसल से लाखों कमा रही है। कोट्रम्मा पिछले 13 वर्षों से अपनी 3 एकड़ भूमि में हर साल रेशम फसल का उत्पादन कर अपने परिवार का सफलतापूर्वक भरण-पोषण कर रही है।
उसने डेढ़-डेढ़ एकड़ के दो प्लेटफार्म बनाए हैं तथा प्रति फसल से 300 रेशम के अंडे चाकी करके वार्षिक औसत प्रति 100 अंडों से 8 0 किलोग्राम रेशम घोंसले का उत्पादन करके वह एक आदर्श रेशम कृषक महिला के रूप में पहचान बना चुकी है।
साढ़े छह एकड़ जमीन पाकर भी उनकी वित्तीय स्थिति शुरू में बहुत खराब थी। सोन्न गाँव में रेशम उगाने वाले रिश्तेदार से प्रभावित होकर उसने रेशम उगाने का दृढ़ संकल्प किया। रेशम विभाग द्वारा शीगेनहळ्ळी और तोळहुणसे में आयोजित रेशम प्रशिक्षण में उसने भाग लिया। वह छह बेटे और चार बेटियों की माता है। उसके पति संगप्पा का वर्ष २०१४ में देहांत हो गया था।

कोट्रम्मा ने तीन बेटों को 3 एकड़ जमीन आवंटित की और रेशम विभाग के मार्गदर्शन के तहत, तीन बेटों के साथ 3 एकड़ में व्ही-1 नस्ल का शहतूत लगाया। उसने उद्यान में 4 गुणा 4 फीट की दूरी पर सिंगलट्रंक सिस्टम को अपनाया। वार्षिक 30 ट्रैक्टर तालाब गाद और 10 ट्रैक्टर देसी खाद डालकर उच्च गुणवत्ता के शहतूत से रेशमकीड़ों का पालन-पोषण करती हंै। पांच लाख रुपयों की लागत से 57 गुणा 21 फीट विस्तीर्ण में रेशम कीड़ों के पालन-पोषण फार्महाउस बनाया है।

शुरू में रेशम घोंसला उत्पादन से उसे 1.7 लाख रुपये आमदनी हुई। रेशम विभाग के नई तकनीक अपनाने से रेशम घोंसला का उत्पादन और आमदनी में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2016-17 में 270 किलोग्राम रेशम घोंसला का उत्पादन से 1.7 लाख रुपये, 2017-18 में 1052 किलोग्राम रेशम घोंसला उत्पादन से 5.60 लाख रुपये और 2018-19 में ***** किलोग्राम रेशम घोंसला से 3.09 लाख रुपयों का लाभ हुआ है।

रामनगर में रेशम घोंसला बेच रही है

कोट्रम्मा शुरुआत से रामनगर में रेशम घोंसला बेच रही है और प्रति किलोग्राम रेशम घोंसला को 400 रुपए औसत की कीमत प्राप्त कर चुके हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में 250 रेशम अंडों को 88 किलोग्राम औसत के हिसाब से 220 किलो रेशम घोंसला उत्पादन से प्रति किलो 460 रुपये की औसत से 1.01 लाख रुपये प्राप्त कर चुकी हैं। रेशम की आय से ही उसने बागान के पास 15 एकड़ जमीन खरीदकर तुंगभद्रा नदी के पानी से 10 एकड़ में मूंगफली और 5 एकड़ में धान उगा रहे हैं। कोट्रम्मा की सफलता बच्चों के साथ रेशम की खेती में सक्रिय भागीदारी है।

राज्य स्तरीय महिला श्रेणी में तीसरा पुरस्कार मिला

रेशम विभाग द्वारा कोट्रम्मा को प्रदान किया गया राज्य स्तरीय महिला श्रेणी में तीसरे पुरस्कार के साथ 15 हजार रुपये नगद मिले हैं। चित्रदुर्ग जिले के सी.वी. वीरम्मा ने 25 हजार रुपये का पहला और मंड्या जिले की देवम्मा 20 हजार रुपये का दूसरा पुरस्कार जीता है। कोट्रम्मा के सबसे छोटे बेटे कृष्ण कर्नाटक राज्य रेशम अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान में रिसोर्स ग्रोअर के रूप में माहिर हैं और विभिन्न किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अतिथि व्याख्याता और प्रशिक्षण दे रहे हैं। कोट्रम्मा कहती है कि रेशम की खेती परिवार प्रबंधन की आधारशिला है। रेशम से परिवार की आय साल-दर-साल दोगुनी हो रही है।

Zakir Pattankudi
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