पढ़े-लिखे युवकों का एकमात्र सहारा बनी मनरेगा योजना

पढ़े-लिखे युवकों का एकमात्र सहारा बनी मनरेगा योजना

By: S F Munshi

Updated: 20 Nov 2020, 12:48 PM IST

पढ़े-लिखे युवकों का एकमात्र सहारा बनी मनरेगा योजना
बेलगावी
लॉकडाउन की वजह से कईयों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। जहां एक ओर नौकरी छिन गई हैवहीं दूजी ओर बढ़ती महंगाई की वजह से लोगों का जीना दुश्वार हो चुका है।
अपना और परिवार पेट पालने के लिए स्नातक डिग्रीधारी युवा मनरेगा की सडक़ निर्माण कार्य, गन्ना काटने जैसे काम पर उतर आए हैं। बेरोजगारी का सामना कर रहे डिग्री धारकों को सरकार की ओर से जारी मनरेगा योजना के तहत सहारा दिया जा रहा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे युवा हाथों मे डिग्री का प्रमाण पत्र लेकर युवक वो सारे काम करने के लिए तैयार हैं जिससे उनकी रोजी-रोटी चलती हो।
प्राथमिक विद्यालय तथा माध्यमिक विद्यालय में कई शिक्षक ऐसे हैं जो मनरेगा योजना की तहत दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। राज्य में आठ माह में कुल मिलाकर 12 लाख जने जॉब कार्ड हासिल कर चुके हैं। अच्छी बारिश की वजह से तालाब, नहर नाले भर चुके है जिसकी वजह से मनरेगा योजना के तहत सीमित लोगों को काम मिल रहा है। पढे-लिखे युवाओं के लिए रोजी-रोटी कमाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
लॉक डाउन की वजह से अपने रोजगार से हाथ धोकर शहर से लौटे युवकों का एकमात्र सहारा महात्मा गांधी रोष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) बना परंतु मनरेगा योजना के तहत केवल सौ दिनों तक ही रोजगार मिल रहा है। अब ये पढे- लिखे युवक सडक़ निर्माण कार्य व फसल काटने का काम कर रहे हैं। बेरोजगारी की वजह से कई शिक्षित युवक मज़दूरी कर रहे हैं तो कई युवक आपराधिक मामलों में लिप्त होकर किसी तरह अपनी आजीविका कमा रहे हैं।
उत्तर कर्नाटक के जिले में बीए, एमए, बी.कॉम कंप्यूटर कोर्स पूर्ण कर चुके युवक या तो गन्ने की फसल की कटाई रहे हैं या चीनी मिल में बोरी ढ़ोने का काम कर रहे है। शिक्षित युवकों की दशा दयनीय हो गई है। उनके भविष्य के बारे में सोचकर चिंता हो रही है। बेरोजगारी की वजह से बाइक चोरी के मामले में बढ़ोत्तरी कर्नाटक ही नहीं आंध्रप्रदेश में भी अधिक हो रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है इस प्रकार के मामलों को गंभीरता से लेते हुए युवकों को रोजगार मुहैया करवाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाना चाहिए।
पेट्रोल, डीज़ल के दाम में हुई बढ़ोत्तरी की वजह से मध्यम वर्ग के लोगों का जीवन दुश्वार हो चुका है। महीने भर काम करने के पश्चात तनख्वाह पाने के बजाय दिहाड़ी श्रमिक मजदूरी कर प्रतिदिन आवश्यकतानुसार पैसा कमाना ही लोग बेहतर समझ रहे हैं।
12 लाख जनों को मिला जॉब कार्ड
मनरेगा योजना के तहत दिहाड़ी मजदूरी करने वाले युवकों को ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे मरुस्थल में उन्हें किसी ने मीठा जल पिलाया हो। मार्च से अभी तक 12 लाख युवकों को मनरेगा कार्ड वितरित किया गया है। कलबुर्गी तथा बेलगावी जिले में अधिकांश शिक्षित युवक ही हैं जिन्होंने जॉब कार्ड हासिल किया। जॉब कार्ड हासिल करने वाले युवकों की संख्या डेढ़ करोड पार चुकी है।
मनरेगा में रोजगार बढ़ाएं
वर्तमान परिस्थिति में निजी इकाई कठिन हालात से गुजऱ रही हैं। ऐसे समय में युवकों को उभारने का कार्य मनरेगा योजना के जरिए किया जा रहा है। इससे पहले मनरेगा योजना के तहत 100 दिनों की दिहाड़ी मज़दूरी का कार्य केवल 40 प्रतिशत युवा करते थे। अब युवकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। आज युवक चाहते हैं कि इस योजना के तहत अवधि को बढ़ाना चाहिए।

S F Munshi Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned