scriptNo firing range for training, how to target policemen | प्रशिक्षण के लिए फायरिंग रेंज नहीं, कैसे निशाने साधें पुलिसकर्मी | Patrika News

प्रशिक्षण के लिए फायरिंग रेंज नहीं, कैसे निशाने साधें पुलिसकर्मी

प्रशिक्षण के लिए फायरिंग रेंज नहीं, कैसे निशाने साधें पुलिसकर्मी
-बंदूक लाइसेंस प्राप्त करने वालों को हो रही समस्या
मेंगलूरु

हुबली

Published: October 29, 2021 04:17:17 pm

प्रशिक्षण के लिए फायरिंग रेंज नहीं, कैसे निशाने साधें पुलिसकर्मी
मेंगलूरु
बंदूक प्रशिक्षण के लिए फायरिंग रेंज (सुरक्षित जगह) नहीं होने से दक्षिण कन्नड़ जिले की पुलिस तथा बंदूक का लाइसेंस प्राप्त करने वालों को परेशानी हो रही है।
जंगली जानवरों से फसल-खेतों की रक्षा तथा आत्मरक्षा के लिए बंदूक का लाइसेंस दिया जाता है। तटीय क्षेत्र (करावली), मलेनाडु भाग में जंगली जानवरों की भरमार बढऩे से बंदूक का लाइसंस प्राप्त तथा, लाइसेंस प्राप्त करने के इच्छुकों की संख्या भी अधिक है। विभिन्न कारणों से आत्मरक्षा के लिए बंदूक लाइसेंस के लिए भी मांग है। पहले से लाइसेंस प्राप्त करने वालों से भी मांग है। इसके अलावा पिछले एक वर्ष से लाइसेंस प्रशिक्षण प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है। प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी पुलिस पर है। सही फायरिंग रेंज नहीं होने से पुलिस को जूझना पड़ रहा है।
पूर्व में शहर के मूडुशेड्डे के पास फायरिंग रेंज था। अब वहां जन आबादी बढऩे से इसका इस्तेमाल असंभव हो गया है। अनिवार्य मौकों पर कार्कल में प्रशिक्षण दिया जा रहा है परन्तु तटीय क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित फायरिंग रेंज में नहीं है।
प्रशिक्षण के लिए फायरिंग रेंज नहीं, कैसे निशाने साधें पुलिसकर्मी
प्रशिक्षण के लिए फायरिंग रेंज नहीं, कैसे निशाने साधें पुलिसकर्मी
दुरुपयोग, हादसों की रोकथाम के लिए पूरक

बंदूक प्रशिक्षक का कहना है कि कई वर्षों से बंदूक का लाइसेंस प्राप्त हजारों लोग जिले में हैं। परिवार के वरिष्ठों से हस्थांतरित हुए बंदूक के लाइसेंस भी अधिक संख्या में हैं परन्तु अनेक लोगों को उचित प्रशिक्षण नहीं है। इसी कारण कई जगहों पर हादसे हो रहे हैं। अकादमी के होने पर व्यवस्थित, नियति प्रशिक्षण, निगरानी संभव होगी।
अकादमी की मांग

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि प्रशिक्षण की नियमित जरूरत होने से शूटिंग अकादमी का होना जरूरी है। गोवा, बेंगलूरु, चन्नई की तर्ज पर तटीय क्षेत्र में भी शूटिंग अकादमी शुरू करने की मांग व्यक्त हुई है। अकादमी शुरू होने पर वहां बंदूक प्रशिक्षण के साथ शूटिंग के इच्छुकों को भी प्रशिक्षण देने में मदद मिलेगी।
14 हजार से अधिक लाइसेंसधारी

मेंगलुरु पुलिस आयुक्तालय कार्य क्षेत्र में 1500 से अधिक, दक्षिण कन्नड़ जिला पुलिस कार्य क्षेत्र में दस हजार से अधिक तथा उडुपी जिले में तीन हजार से अधिक जनों के पास बंदूक लाइसेंस प्राप्त है। फिलहाल दक्षिण कन्नड़ तथा उडुपी जिलों में कुल तीन सौ से अधिक जनों ने लाइसेंस के लिए आवेदन सौंपा है, जिनका निस्तारण होना बाकी है।
इनका कहना है

फिलहाल दक्षिण कन्नड़ जिले में फायरिंग रेंज नहीं है। जरूरी मौकों पर कार्कल के फायरिंग रेंज का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिले में उचित जगह के लिए ध्यान दिया जा रहा है।
-हृषिकेश सोनावने, पुलिस अधीक्षक, दक्षिण कन्नड़ जिला

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