प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए एक लाख ग्यारह हजार रुपए

प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए एक लाख ग्यारह हजार रुपए
-विधायक व तहसीलदार को सौंपा चेक
इलकल (बागलकोट)

By: S F Munshi

Published: 18 Apr 2020, 08:23 PM IST

प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए एक लाख ग्यारह हजार रुपए
-विधायक व तहसीलदार को सौंपा चेक
इलकल (बागलकोट)
स्थानीय ब्राह्मण समाज ने कोरोना महामारी के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम को और अधिक मजबूत करने के मकसद से प्रधानमंत्री राहत कोष में 1 लाख 11 हजार 111 रुपए की सहायता राशि दान की। मंगलवार को वेंकटेश मंदिर में समाज के विशेष आग्रह पर पहुंचे विधायक दोड्डनगौड़ा पाटील व तहसीलदार वेदव्यास मुतालिक ने मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पाण्डुरंग कुलकर्णी, ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष टी.एच. कुलकर्णी, गिरीश पदकी एवं काशीनाथ देशपाण्डे ने एक लाख ग्यारह हजार एक सौ एक रुपए का चेक विधायक व तहसीलदार को सौंपा। इस मौके पर विधायक पाटील ने कहा कि कोरोना महामारी से लडऩे के लिए सरकार भरकस प्रयास कर रही है, लेकिन यह आमजनता के सहयोग के बिना संभव नहीं है। उन्होंने लॉकडाउन का पालन करते हुए लोगों से घरों में रहने की अपील की।
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छोटे बच्चों को लेकर बरतें विशेष सावधानी
-स्वच्छता का रखें खास ख्याल
- कोरोना पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दरक की राय
इलकल (बागलकोट).
कस्बे में स्थित माहेश्वरी नवजात शिशुओं के अस्पताल के निदेशक एवं जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पवनकुमार दरक का कहना है कि वैसे तो बच्चों का हमेशा ही खास ध्यान रखा जाना चाहिए। किन्तु इन दिनों जब पूरी दुनिया में कोरोना महामारी ने हा-हाकार मचा रखा है ऐसे में घर के बड़ों की खुद के साथ-साथ बच्चों के प्रति जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। डॉ. दरक कोरोना बीमारी को लेकर संवाददाता की ओर सेपूछे गए जरूरी सवालों का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि चीन के वुहान से पनपा कोरोना वायरस आज दुनिया के अधिकांश देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। ऐसी बीमारी के लिए क्या बड़े और क्या छोटे सभी एक समान होते हैं। इतना जरूर है कि बड़े अपनी तकलीफ आसानी से बता देते हैं और अबोध बच्चे अपनी तकलीफ बिल्कुल नहीं बता पाते हैं और जब बीमारी कोराना जैसी हो तो बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए भी परेशानी बढ़ जाती है। इसलिए घर के बड़े जब भी बच्चों के संपर्क में आएं इस दौरान साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें। खास तौर पर अपने हाथों को अच्छी तरह धोने के बाद ही बच्चों को पकड़ें या छुएं। बीमार होने की अवस्था में छोटे बच्चे सिर्फ रोते हैं, वे अपनी परेशानी बयां नहीं कर सकते हैं।
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें
इस दौरान घरों में अभिभावकों या बच्चों के माता-पिता को भी हरसंभव कोशिश यह करनी चाहिए कि वे जितना हो सके बच्चे से दूर रहने का प्रयास करें। आवश्यक होने पर ही बच्चे के पास जाएं और वह भी अच्छी तरह साफ-सफाई के साथ। घर में रहने वाले सभी सदस्य भी आपस में एक निश्चित दूरी बनाकर रहें, यह काफी कारगर साबित होगा। कोराना वायरस बहुत खतरनाक है। यह शरीर के अंदर कोशिकाओं में जाकर एक से अधिक भागों में टूट जाता है और बाद में इन्हीं टुकड़ों की मदद से खुद को पुन: करें मास्क का प्रयोग
डॉ. दरक का मानना है कि इस दौरान जब भी किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थानों या घर के बाहर जाना अनिवार्य हो तो उसे मास्क आदि का प्रयोग हर हाल में करना चाहिए। मास्क की जरूरत इसलिए पड़ती है कि हमें मालूम नहीं होता है कि किस व्यक्ति में कोरोना संक्रमण है और किसमें नहीं। इस दौरान यदि कोई भी संक्रमित व्यक्ति कहीं खांसता या छींकता है तो उसके नाक-मुंह से हवा में बारीक थूक के कण तैरने लगते हैं, इस दौरान आसपास से गुजरने वाले किसी भी व्यक्ति के अंदर सांस लेने की प्रक्रिया के दौरान ये कण प्रवेश कर जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप एक स्वस्थ व्यक्ति भी कोरोना से ग्रसित हो जाता है। लॉकडाउन के पीछे भी यही तर्क है ताकि लोगों को संक्रमण से बचाया जा सके।
बच्चों व बुजुर्गों को रहना होगा सतर्क
किसी भी बीमारी को हराने के लिए सामान्य तौर पर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता जिम्मेदार होती है। एक स्वस्थ और जवान व्यक्ति में रोगों से लडऩे के लिए प्रतिरोधक क्षमता भी पर्याप्त होती है, विशेषकर युवाओं में। इसके विपरीत छोटे बच्चों व बजुर्गों में अपेक्षाकृत इस क्षमता का अभाव होता है या काफी कम होती है। इसी कारण बच्चे और बुजुर्ग किसी भी बीमारी की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। इसलिए ऐसे समय में छोटे बच्चों व बुजुर्गों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता पड़ती है। घर के अन्य सदस्यों की यह जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वे इनका
यहां रखा जा रहा है सामाजिक दूरी का याल
कस्बे के एक अन्य श्यावी संजीवनी अस्पताल का दौरा करने पर संवाददाता ने पाया कि यहां कुछ मरीज स्वास्थ्य लाभ लेने पहुंचे थे। सबसे खास चीज जो यहां देखने को मिली वह थी सभी मरीजों के बीच एक सामाजिक दूरी। यहां आने वाले प्रत्येक मरीज के बैठने की अलग से व्यवस्था की गई थी। अस्पताल के डॉ. विठ्ठल श्यावी से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि सभी मरीजों को सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में समझाया गया है और उनके बैठने की भी अलग से व्यवस्था की गई है। रक्तजांच, ईसीजी एवं ईको आदि कक्षों में मरीजों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है।
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S F Munshi Reporting
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