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हुबली

लोगों को मिले गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं, झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई

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हुबलीJul 06, 2024 / 05:56 pm

ASHOK SINGH RAJPUROHIT

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पिछले दिनों स्वास्थ्य अधिकारियों ने कर्नाटक के बेलगावी समेत विभिन्न इलाकों के अस्पतालों पर छापे मारकर कई फर्जी अस्पतालों और झोलाछाप चिकित्सकों का पर्दाफाश किया। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान उनकी असलियत उजागर हुई। निरीक्षण में पता चला कि कई अस्पताल संचालक दसवीं पास भी नहीं थे। कुछ कथित चिकित्सकों ने तो बकायदा एमबीबीएस की डिग्री होने की नेमप्लेट तक लगा रखी थी। बिना किसी औपचारिक चिकित्सा शिक्षा के वे चिकित्सक बनकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। तीन महीने पहले भी राज्य में एलोपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और होम्योपैथी सहित विभिन्न क्षेत्रों में झोलाछाप चिकित्सकों के 1700 से अधिक मामले दर्ज किए थे। बेलगावी, बीदर सरीखे सीमावर्ती जिलों में झोलाछाप चिकित्सकों की संख्या सबसे ज्यादा है।
खासकर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी है। ऐसे में ग्रामीण भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अयोग्य चिकित्सकों पर निर्भर है, जिन्हें झोला छाप या बंगाली डॉक्टर के नाम से जाना जाता है। खराब ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा और ग्रामीणों की जागरुकता की कमी के कारण झोलाछाप चिकित्सकों की ओर से संचालित क्लीनिकों में वृद्धि हुई है जो असल में दवा देने के लिए अधिकृत ही नहीं हैं। ये न मरीजों का कोई रिकॉर्ड रखते है और न ही दवाओं का। कई प्रतिबंधित दवाएं भी रखते हैं। इनके पास अक्सर पर्याप्त चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण नहीं होता। ऐसे में गलत निदान से कई बार मरीजों की स्थिति बिगड़ जाती है। अक्सर जब इन चिकित्सकों को छापे की भनक लगती है तो वे पड़ोसी राज्यों में भाग जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसे झोलाछाप चिकित्सकों के बारे में सब-कुछ पता लगने के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। इन नकली क्लीनिकों में जाने वाले मरीजों को कथित तौर पर प्रतिकूल स्वास्थ्य परिणाम भुगतने पड़े और जिनमें से कई को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है। कई झाोलाछाप चिकित्सक अवैद्य गर्भपात सरीखे कामों में लिप्त हैं। अधिकांश मामलों में जिला स्वास्थ्य अधिकारी केवल नोटिस देकर इतिश्री कर लेते हैं। मरीज अक्सर पहले झोलाछाप चिकित्सकों के पास जाते हैं और जब उनकी स्थिति बिगड़ जाती है, तब वे प्रशिक्षित डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। इस देरी से इलाज अधिक कठिन और महंगा हो जाता है। मरीजों को सही और समय पर इलाज न मिल पाने के कारण उनके स्वस्थ होने की संभावना कम हो जाती है और वे अपनी सामान्य जिंदगी में जल्दी वापसी नहीं कर पाते।
झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कानून बनाए जाने चाहिए और उसकी पालना सुनिश्चित की जानी चाहिए। फर्जी अस्पतालों को तुरंत बंद करने के साथ ही ऐसे चिकित्सकों के लाइसेंस रद्द करने एवं उन्हें चिकित्सा क्षेत्र से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। चिकित्सा संस्थानों और क्लीनिकों में काम करने वाले सभी चिकित्सकों के प्रमाणपत्रों और योग्यताओं का समय-समय पर सत्यापन किया जाना चाहिए। नियमित निरीक्षण और छापे मारे जाने चाहिए ताकि समय रहते ऐसे झोलाछाप चिकित्सकों को पकड़ा जा सके। लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए जरूरी है कि झोलाछाप चिकित्सकों और अस्पतालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के साथ ही बिना वैद्य डिग्री के चिकित्सा प्रैक्टिस करने वालों पर रोक लगाई जाएं। चिकित्सकों की गतिविधियों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाना चाहिए। यह टास्क फोर्स स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर काम करें। मेडिकल काउंसिल, स्थानीय प्रशासन और अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर काम किया जा सकता है। आमजन को झोलाछाप चिकित्सकों के बारे में सूचना देने के लिए गोपनीय प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए ताकि वे बिना किसी झिझक के समय पर सूचना दे सकें। मरीजों के लिए हेल्पलाइन, शिकायत केंद्र एवं ऑनलाइन पोर्टल स्थापित किए जा सकते हैं।

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