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सरकारी मंड़ी में किसानों, श्रमिकों की हालत खस्ता

सरकारी मंड़ी में किसानों, श्रमिकों की हालत खस्ता
-एपीएमसी कानून में संशोधन, सेस में कटौती का बुरा असर
हुब्बल्ली

हुबली

Published: November 08, 2021 07:54:49 pm

सरकारी मंड़ी में किसानों, श्रमिकों की हालत खस्ता
हुब्बल्ली
एपीएमसी कानून में अगस्त 2020 में संशोधन कर मंडी परिसर के बाहर खुले कारोबार को मौका उपलब्ध कराने का फैसला एपीएमसी की कमर तोडऩे वाला कदम सिद्ध हो रहा है।
इस कदम से एपीएमसी की आय घटने लगी है। एपीएमसी के समक्ष रखरखाव के खर्च के लिए भी जूझने के हालात पेश आए हैं। इसके साथ ही सौ रुपए पर 1.60 रुपए स्थित सेस को भी अब 60 पैसा करने से एपीएमसी की आय घटी है। इसी पर निर्भर किसानों व एपीएमसी कुली मजदूरों की हालत बहुत खस्ता हो गई है।
एपीएमसी अधिकारियों का कहना है कि नए कानून लाकर वर्ष बीतने के बाद राज्य की 60 से अधिक एपीएमसी दैनिक रखरखाव व सुरक्षा खर्च का वहन करने के लिए भी जूझ रही हैं। बड़े पैमाने पर कारोबार करने वाले एपीएमसी की आय आधी भी नहीं रह गई है। यह हाल रहा तो दो वर्ष में उनकी आय रुक जाएगी।
सरकार का तर्क है कि कृषि उपज मंडी (एपीएमसी) को बेहतर दाम उपलब्ध करवाने की दिशा में संशोधन लाया गया है परन्तु वास्तव में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम मिल रहे हैं। कई व्यापारी भी किसानों को राशि का भुगतान नहीं करके फरार हो रहे हैं ऐसे मामले आए दिन दर्ज हो रहे हैं।
एपीएमसी में खरीदारी करने पर सौ रुपए के लिए 60 पैसे सेस का भुगतान करना चाहिए। पूर्व में बाहर खरीदारी चलती थी परन्तु सेस का भुगतान करना जरूरी था? अब बाहर खरीदने पर सेस का भुगतान करने की जरूरत नहीं है। व्यापारी एपीएमसी छोड़ रहे हैं। एपीएमसी स्थित दुकान, बिजली का बिल, कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी समस्या पेश आ रही है। बाहर जाकर कार्य कर नहीं पाने की सूरत में श्रमिकों के परिवार बिना आय के आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
बाहर चलने वाले कारोबार से प्राप्त होने वाली आय बंद हो गई है। साथ ही पूर्व में एपीएमसी के भीतर व्यापारियों से प्रति सौ रुपए कारोबार पर डेढ़ रुपए सेस संग्रह किया जाता था। इसे अब 60 पैसे कर देने से आय घटने का कारण बना है।
सरकारी मंड़ी में किसानों, श्रमिकों की हालत खस्ता
सरकारी मंड़ी में किसानों, श्रमिकों की हालत खस्ता
सुविधाओं के लिए आय की कमी

अधिकारियों का कहना है कि एपीएमसी को सेस से आने वाली आय में 0.01 प्रतिशत को सॉफ्टवेयर उपलब्ध करने वाले रिम्स को, 10 प्रतिशत को आवधिक कोष, 0.05 प्रतिशत कृषि बिक्री मंडल को देना चाहिए। बकाया राशि को रखरखाव खर्च के साथ एपीएमसी के विकास के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। आय घटने से आगामी दिनों में एपीएमसी में सुविधा उपलब्ध करना संभव नहीं हो पाएगा।
बेकार बैठने के हालात

हुब्बल्ली एपीएमसी में प्रतिदिन 150 से 200 ट्रक आते थे। अब 50 से 60 ट्रक आ रहे हैं। लाइसेंस प्राप्त 1,200 कर्मचारी हैं। हाल के दिनों में काम नहीं मिल रहा है। वर्ष में तीन से चार माह मात्र पर्याप्त कार्य रहता है। बकाया दिन बेकार बैठने की स्थिति है।
-गुरुसिध्दप्पा अंबिगेर, महासचिव, एपीएमसी कुली मजदूर संगठन

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