महंगाई डायन खाय जात है...

महंगाई डायन खाय जात है...
-जनता की कमर तोड़ रहे लगातार बढ़ते दाम
हुब्बल्ली

By: Zakir Pattankudi

Published: 10 Jun 2021, 01:02 PM IST

महंगाई डायन खाय जात है...
हुब्बल्ली
सखी सईंया तो खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाय जात है...गीत इन दिनों लगातार बढ़ रही महंगाई पर चरितार्थ हो रहा है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से आमजन का जीना मुहाल हो चला है। सवा साल से कोरोना से जूझती जनता की महंगाई कमर तोड़ रही है।

लोगों की खरीदारी हुई कम

एक तरफ कोरोना दूसरी ओर दवाइयों और इलाज के खर्चों के बोझ के बीच प्रतिदिन गड़बड़ा रहे किचन के बजट से लोगों को जद्दोजहद का सामना करना पड़ रहा है। शहर में खाने-पीने की चीजों का दाम आसमान छू रहे हैं। हालत ये है कि अब खुदरा दुकानों पर कम संख्या में ही लोग आ रहे हैं, जो खरीदारी कर भी रहे हैं, वो अब पहले की तुलना में कम मात्रा में ही खरीदारी कर रहे हैं।
-राजु हिरेमठ, किराना दुकानदार

बढ़े अंडे के दाम

शहर में जिस अंडे के एक कैरेट का दाम 160 रुपये था, वो अब बढ़कर 180 रुपए प्रति कैरेट तक पहुंच चुका है। साथ ही यह भी अनुमान है कि आने वाले दिनों में कीमतों में इजाफे का यह दौर आगे भी जारी रहेगा।
-इम्तियाज पठान, चिकन दुकानदार

जेब पर बढ़ रहा बोझ

आए दिन बढ़ रहे पेट्रोल के दाम से जेब पर असर पड़ रहा है। कोरोना के कारण धंधे भी पहले जैसे नहीं रहे। ऐसे में अगर पेट्रोल की कीमतें आसमान छूती रहेंगी तो बजट पूरी तरह से हिल जाएगा। लगातार हो रही दामों में बढ़ोतरी में केंद्र सरकार कुछ नहीं कर रही। आम जनता पर बोझ बढ़ रहा है।
-प्रहलाद कुलकर्णी, निजी फाइनांस कर्मचारी

सभी को निगल जाएगी महंगाई

तेल कंपनियां मनमर्जी से आए दिन कीमतों में वृद्धि कर देती हैं। केंद्र सरकार को चाहिए कि पेट्रो पदार्थों का नियंत्रण अपने हाथ में रखे। केंद्र सरकार पेट्रोलियम कंपनियों के आगे घुटने टेक चुकी है। यही हाल रहा तो महंगाई सभी को निगल जाएगी।
-शकील माणिक, स्थानीय निवासी

जीवनयापन करना हुआ मुश्किल

कोरोना के कारण जिम तो पहले ही बंद पड़े हैं, ऊपर से पेट्रो पदार्थो की कीमत बढऩे का असर अन्य चीजों पर भी हो रहा है। महंगाई भी आसमान छू रही है। ऐसे में आम आदमी के लिए जीवनयापन करना बहुत मुश्किल हो रहा है। आमदन के हिसाब से खर्च ज्यादा बढ़ गए हैं। रसोई गैस की कीमतें बढऩे से घर का बजट गड़बड़ा रहा है।
-मेहबूबसाब. पी., जिम प्रशिक्षक

खेती पर भी गहरा असर

केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए उसके आगे हाथ खड़े कर दिए हैं। पेट्रोल व डीजल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी का असर खेती पर भी पड़ता है। बिजली आपूर्ति में कमी की वजह से जनरेटर से काम चलाना पड़ता है। इस कारण फसल के खर्चे में बढ़ोतरी होती है।
-हनुमंतगौड़ा पाटील, किसान गब्बूर

महंगाई पर नकेल कसने की जरूरत

लगातार पेट्रोल के दामों में हो रही बढ़ोतरी से उनका सारा बजट गड़बड़ा कर रह गया है। सरकार को आम आदमी के बारे में सोचते हुए महंगाई पर नकेल कसने की जरूरत है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि गरीबों को खून निचोडऩे का काम कर रही है।
-संजीव ओडेयर

यात्री किराया बढ़ाने का दबाव

डीजल के दाम में वृद्धि से खाद्य आपूर्ति महंगी हो रही है। ट्रांसपोर्ट खर्च बढऩे से इसका सीधा असर खाद्य वस्तुओं के दामों पर पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि के चलते ट्रांसपोर्टर यात्री किराया बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं। इसके अलावा प्याज के दामों में भी उछाल आने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
-प्रकाश गंगोली, किराना व्यापारी

ठोस कदम उठाए सरकार

सिलेंडर के दामों में निरंतर हो रही वृद्धि से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। पेट्रोलियम पदार्थों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। सरकार को बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
-गीता पवार, निवासी

कम होती जा रही है सब्सिडी

घरेलू गैस से लेकर दाल-सब्जी और फल सब के दामों में आग लगी हुई है। घरेलू गैस के दाम तो लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं और सब्सिडी भी पहले से कम होती जा रही है।
-परवीन काजी, ग्रहिणी

दामों पर काबू किया जाना जरूरी

लगातार बढ़ रही महंगाई को काबू करने का कोई प्रयास नहीं दिख रहा। मध्यमवर्गीय लोगों के लिए महीने का बजट संभालना मुश्किल हो गया है। तेल और सिलैंडर को दामों पर काबू किया जाना जरूरी है।
-रीटा डेविड, निवासी

Zakir Pattankudi Incharge
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