संविधान की रक्षा हम सब की जिम्मेदारी

संविधान की रक्षा हम सब की जिम्मेदारी
-न्यायाधीश शिवाजी अनंत नलवडे ने कहा
हुब्बल्ली

By: Zakir Pattankudi

Updated: 27 Nov 2019, 07:25 PM IST

संविधान की रक्षा हम सब की जिम्मेदारी
हुब्बल्ली
जिला न्यायाधीश एवं औद्योगिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष शिवाजी अनंत नलवडे ने कहा है कि संविधान पर अमल तथा इसकी रक्षा हम सब की जिम्मेदारी है।
वे हुब्बल्ली के नए अदालत भवन के सभा भवन में तालुक कानून सेवा समिति, अधिवक्ता संघ, अभियोजन तथा सूचना विभाग की ओर से भारतीय संविधान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कानून साक्षरता कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।

अम्बेडकर का योगदान अपार

उन्होंने कहा कि संविधान गठन सभा के लिए चयनित सदस्यों ने गहन चर्चा के बाद संविधान का गठन किया है। संविधान गठन विधेयक समिति के अध्यक्ष डॉ. बीआर अम्बेडकर का योगदान अपार है। संविधान गठन सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया। 26 जनवरी 1950 को 1935 के भारत सरकार विधेयक को बदल कर संविधान देशभर में जारी हुआ। 1979 में उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एलएम सिंघवी ने 26 नवंबर को कानून दिवस के तौर पर मनाने का एसोसिएशन की बैठक में निर्णय पारित किया। तब से 2015 तक 26 नवंबर को कानून दिवस के तौर पर मनाया जाता था। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अम्बेडकर की 125 वीं जयंती के उपलक्ष्य में 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान समय समय पर परिवर्तित होता रहा है। लोकतांत्रिक तथा विविधता विविधता में एकता संविधान की जान है।
प्रधान श्रमिक न्यायालय के अध्यक्ष सदानंद कलाल ने कहा कि संविधान में विधायिका, कार्यपालिका तथा न्याय पालिका के कर्तव्यों को स्पष्ट तौर पर दर्ज किया गया है। नागरिकों को संविधान की ओर से दिए गए अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए।

संविधान की भूमिका महत्वपूर्ण

संसाधन व्यक्ति एमजी मालवदे ने कहा कि भारत के संविधान को 104 बार संशोधित किया गया है। 1947 से ही देश में अनेक कानूनों को जारी किया गया है। उच्चतम न्यायालय संविधान के रक्षक के तौर पर कार्य कर रहा है। कानूनों के गठन का कार्य विधायिका का है, इसके बावजूद उच्चतम न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण कानूनों के गठन तथा जारी करने के लिए कारण बना है। संविधान ने भारत को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है। संविधान नहीं होता तो देश अव्यवस्थाओं से भरा रहता था। देश की व्यवस्था का गठन करने तथा रंक्षा करने में संविधान की भूमिका महत्वपूर्ण है।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अशोक वी बलिगार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश एवं प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश देंवेंद्रप्पा एन बिरादार, जिला न्यायाधीश एवं पारिवारिक न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश सुमंगला एस बसवण्णूर, 5वें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गंगाधर केएन, जेएमएफसी प्रधान वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं तालुक कानून समिति के अध्यक्ष नागराजप्पा.एके समेत वरिष्ठ, कनिष्ठ न्यायाधीश, अधिवक्ता व कार्यालय के कर्मचारी उपस्थित थे।
जेएमएफसी प्रधान कनिष्ठ सिविल न्यायाधीश महेश एस पाटील ने स्वागत किया। अधिवक्ता संघ के महासचिव गुरु हिरेमठ ने आभार जताया।

Zakir Pattankudi Incharge
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