हुबली में बन रहा रेलवे म्यूजियम

हुबली में बन रहा रेलवे म्यूजियम

Zakir Pattankudi | Updated: 22 Jul 2019, 08:18:16 PM (IST) Hubli, Dharwad, Karnataka, India

हुबली में बन रहा रेलवे म्यूजियम
-रेलवे के इतिहास सहित कई रोचक जानकारियां मिलेंगी
-दो आवास गृहों के निवासियों को स्थानांतरित किया

हुब्बल्ली

हुबली में बन रहा रेलवे म्यूजियम
हुब्बल्ली
रेलवे का इतिहास सहित अनेक रोचक जानकारियों से जनता को रू-ब-रू कराने के लिए हुबली में रेलवे म्यूजियम का निर्माण किया जा रहा है।
रेलवे की ओर से मौजूदा आर्थिक वर्ष से ही यह म्यूजियम आम जनता के लिए खोल दिए जाने की उम्मीद है।
गदग रोड रेलवे केंद्रीय अस्पताल के सामने रेलवे स्टेशन के लिए सार्वजनिक संपर्क उपलब्ध करने के लिए निर्माणाधीन दूसरे द्वार के दाएं किनारे पर ही लगभग 53 मीटर लंबा, 65 मीटर चौड़े विस्तार की जमीन पर रेलवे म्यूजियम स्थापित हो रहा है।

दो आवास गृहों के निवासियों को स्थानांतरित किया

म्यूजियम निर्माण की खातिर विभाग के दो आवास गृहों में स्थित निवासियों को स्थानांतरित किया गया है। वहीं पृथक तौर पर दो म्यूजियम निर्मित किए जा रहे हैं। इनमें रेल विभाग से संबंधित ऐतिहासिक इतिहास, इंडन, बोगी, पूर्व में सिग्नल के लिए कौनसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था। हुब्बल्ली-धारवाड़, मैसूर मराछा रेल में क्या कुछ परिवर्तन हुए। रेल विभाग से संबंधित सभी इतिहास को संग्रहित कर प्रदर्शित करने की रेल विभाग तैयारी कर रहा है।

यह मिलेगी जानकारी

रेल विभाग के विकास क्रम के बारे में तथा हुब्बल्ली रेलवे स्टेशन का किस वर्ष शिलान्यास हुआ, यह किसने किया, स्टेशन कब से आरम्भ हुआ, रेलवे बोगी निर्माण वर्कशॉप ने कब कार्य आरम्भ किया, इसका क्षेत्र कितना, नैरो गेज में चलने वाले रेलवे इंजन कैसे थे, बोगियां कैसी थीं, नैरो गेज से मीटर गेज कब परिवर्तित हुआ, इसके बाद मीटर गेज से ब्रॉडगेज में कब परिवर्तित हुआ, इस दौरान कौन-कौन से उपकरणों का इस्तेमाल किए जाते थे, दक्षिण पश्चिम रेलवे (दपरे) कब स्थापित हुआ समेत अन्य जानकारियों को म्यूजियम में जनता के लिए उपलब्ध होंगी।

रेलवे के इतिहास की दी जाएगी जाकारी

फिलहाल दपरे क्षेत्र में ब्रॉडगेज व्यवस्था है। पहले रेल इतिहास में स्थित नैरो गेज, मीटर गेज अब नहीं है। इसके चलते जनता को खासकर बच्चे तथा युवा इनके बारे में जानकारी देने का विभाग ने फैसला लिया है। राज्य के किसी भी मंडल में अब नैरो गेज इंजन नहीं है। इसके लिए दूसरे राज्य से लोको तैयार करने का फैसला लिया है। इसे म्यूजियम परिसर के प्रवेश द्वार के पास प्रदर्शनी के लिए रखा जाएगा। साथ ही परिसर के म्यूजियमों के बीच की जमीन पर एक रेल बोगी को रखकर इसे थेयटर के तौर पर तैयार कर उसमें रेल विभाग से संबंधित जानकारी वाले फिल्म प्रदर्शित किया जाएगा। एक और बोगी को सामान्य रेस्टोरेंट के तौर पर तैयार करने की योजना है।

क्या-क्या आया बदलाव

रेलवे के हुब्बल्ली, मैसूर, बेंगलूरु मंडल में पहले कौनसी व्यवस्था थी। रेलवे स्टेशन कैसे थे। अब क्या परिवर्तन हुआ है इस बारे में पुस्तक, रिपोर्ट, फोटो, फिल्म प्रदर्शनी समेत रेलवे से संबंधित ऐतिहासिक जानकारी म्यूजियम में रहेगी। रेल विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह बच्चों तथा युवाओं समेत हर एक केलिए रेल के बीते वैभव के बारे में जानकारी उपलब्ध होगा।

इनका कहना है

रेलवे के गौरवशाली अतीत को जनता को बताने की खातिर विभाग की ओर से गदग रोड के केंद्रीय रेलवे अस्पताल के सामने रेलवे म्यूजियम स्थापित करने की योजना है। इसका कार्य चल रहा है। बाहरी राज्य से नैरो गेज इंजन भी मंगवाने की तैयारी चल रही है। मौजूदा रेलवे वित्त वर्ष में म्यूजियम का कार्य पूरा होगा।
-ई. विजया, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, दपरे

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