दुकानें तो खुल गई, ग्राहक नदारद

दुकानें तो खुल गई, ग्राहक नदारद

By: S F Munshi

Published: 22 Jun 2021, 08:06 PM IST

दुकानें तो खुल गई, ग्राहक नदारद
-आर्थिक तंगी से जूझते लोग कहां से करें खरीदारी
इलकल,(बागलकोट)
कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 27 अप्रैल की रात नौ बजे से कर्नाटक में संपूर्ण लॉकडाउन घोषित किया गया। फिर लाॉकडाउन की अवधि सात जून और उसके बाद फिर से 14 जून तक बढ़ाई गई। 14 जून के बाद लॉकडाउन में थोड़ी ढिलाई दी गई और कुछ सामग्री की दुकान खोलने की अनुमति दी गई। परन्तु कपड़ा, रेडिमेड गारमेंट, जेवरात की दुकानों को खोलने की अनुमति नहीं दी गई। करीब आठ सप्ताह यानी पचपन दिनों से दुकानें बंद रखकर घर में बैठे व्यापारी लोग अनलॉक का बेसब्री से इंतजार करने लगे। आखिर में सरकार ने 21 जून से कपड़ा, रेडिमेड गारमेंट, साडिय़ों, जेवरात की दुकानों को सुबह से शाम पांच बजे तक खोलने की अनुमति दी। सोमवार सुबह ही व्यापारी वर्ग ने दुकान पर जाकर भगवान की स्तुति करके शटर को ऊपर किया। दुकान खोलने की खुशी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी। कर्मचारियों ने इतने दिनों से बंद दुकान की पहले साफ़ सफाई की। धूल आदि को साफ करने के बाद भगवान के सामने दीप प्रज्वलित कर पूजा की गई। दुकानदार अब ग्राहक की बाट जोहने लगे लेकिन जिस आशा से दुकान खोली गई वह आशा पूरी नहीं हुई। दो चार नामांकित दुकानों को छोडक़र बाकी दुकानों में ग्राहकों की कमी थी। कपडा, साडिय़ां, रेडीमेड गारमेंट्स की ज्यादा बिक्री मार्च अप्रैल मई और थोड़ी बहुत जून महीने में होती है और इस बार इन महीनों में लॉकडाउन रहने से दुकानें बंद रहीं और व्यापारी हाथ मलते ही रह गए। पिछले वर्ष भी 24 मार्च को लॉकडाउन लगाया गया और अप्रैल मई महीने में लॉकडाउन ज़ारी रहा। जिसके चलते दुकानें बंद रहीं। दशहरा दीपावली पर कपड़ा, रेडिमेड गारमेंट और साडीयों की बिक्री होती है परन्तु आर्थिक तंगी के कारण से लोगों ने सादगी से त्योहार मनाया और खरीदी को टाल दिया। पिछले और इस वर्ष भी रमजान व अक्षय तृतीया के अवसर पर लॉकडाउन रहने से लोगों ने नये कपड़े की खरीद नहीं की। कपड़ा, रेडिमेड गारमेंट, साडयि़ों के बड़े व्यापारी को कर्मचारियों का वेतन, घर खर्चा, विद्युत बिल आदि हाथ से भरने पड़े। वे भी वित्तीय तंगी झेल रहे हैं। जो छोटे व्यापारी जिनके पास थोड़ी सी ही पूंजी थी। उनकी पूंजी परिवार का भरण-पोषण व अन्य खर्चों में पूरी होने से दुकान को बंद करने की नौबत आई है। अब व्यापारी जानते हैं कि इस समय में अच्छी ग्राहकी तो होने वाली नहीं है। इसलिए जितनी भी ग्राहकी होती है वह ठीक है। कम से कम दुकान का खर्चा निकल जाए तो बस है। अब तो दशहरा दीपावली पर ही व्यापार होने की आशा में व्यापारी दिन बिता रहे हैं। अच्छे दिन की आशा में व्यापारी वर्ग बैठा है तो दूसरी ओर कोरोना का भय भी मन में सता रहा है। आज महंगाई इतनी बढ़ गई है कि परिवार का भरण-पोषण मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे वक्त में अगर आमदनी शून्य और खर्चा पूरा रुपया है तो ऐसे वक्त में आदमी तो चिंता में पिसता ही जाता है। व्यापारी वर्ग को सरकार से किसी तरह का अनुदान की सुविधा नहीं मिलती है। पिछले डेढ़ वर्ष से व्यापारी ने कितने कष्ट झेले हैं ये बात वही जानता है क्योंकि वह बयां करने में संकोच करता है। मध्यम वर्ग के व्यापारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। व्यापारी जहां दुकान खोलने पर खुश हैं तो दूसरी ओर कोरोना से डरा हुआ भी है। हर व्यक्ति आज यही मन्नत मांग रहा है कि कोरोना वायरस से निजात मिले।

S F Munshi Reporting
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