मामलों के शीघ्र निस्तारण में अधिवक्ताओं का सहयोग जरूरी

मामलों के शीघ्र निस्तारण में अधिवक्ताओं का सहयोग जरूरी
-उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश के.एन. फणींद्र ने दी सलाह
धारवाड़

S F Munshi

February, 1409:12 PM

मामलों के शीघ्र निस्तारण में अधिवक्ताओं का सहयोग जरूरी
धारवाड़
धारवाड़ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश के.एन. फणींद्र ने कहा है कि मुवक्किलों को शीघ्र न्याय देने के लिए अधिवक्ताओं को न्यायालय का साथ देना चाहिए। वे धारवाड़ उच्च न्यायालय में हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ के सभा भवन में अधिवक्ता संघ के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मुवक्किलों को न्याय दिलाने के लिए लोक अदालत व्यवस्था जारी की गई है। लोक अदालत में प्रकरणों का निस्तारण करने से न्यायालय का समय, मुवक्किलों का खर्च कम होगा तथा आपसी सौहार्द बना रहेगा। इसे साकार करने के लिए अधिवक्ताओं को न्यायालय का साथ देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गत 8 फरवरी को धारवाड़ कर्नाटक उच्च न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में एक हजार 36 3 मामलों का निपटारा हुआ था। इनमें कुल 418 मामलों की सुनवाई की गई। इससे करीब दो से तीन हजार लोगों को न्याय मिला है। अधिवक्ताओं को अपने मुवक्किलों को लोक अदालत के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में 198 7 में लागू हुए कानून सेवा प्राधिकरण में लोक अदालत विधेयक शुरुआत में जिलाधिकारी के तहत जारी किया गया था, परंतु उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तथा शीघ्र न्याय देने की दिशा में लोक अदालत को न्यायालय के तहत लाया गया। अब लोक अदालत विधेयक को सर्वोच्च न्यायालय से तालुक न्यायलय तक व्यवस्थित और प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। देश भर में प्रति लोक अदालत में कई मामलों को आपसी समझौते से निपटारा किया जा रहा है।
न्यायाधीश ने कहा कि कानून सेवा प्राधिकरण के सदस्य, पैनल अधिवक्ता, मोटर वाहन कानून, लाइसेंस, पेंशनस राशन कूपन आदि से संबंधित समस्या होने पर ग्रामीण इलाकों का स्वयं दौरा कर समीक्षा करने के बाद उनका शीघ्र निस्तारण करने का प्रयास करना चाहिए। आमजन के लिए आवश्यक कानूनी जागरूकता, महिला, बच्चे, दलित, पिछड़ा वर्ग समेत अवसर तथा सुविधाओं से वंचित लोगों को जागृत करने की जरूरत है। उनका जीवन स्तर सुधार के साथ सुकून की जिंदगी देने पर कानून सेवा प्राधिकरण लागू करना फायदेमंद होगा। लोक अदालत के बारे में समाचार पत्र, टीवी चैनल तथा इंटरनेट में जानकारी देकर लोगों में जागृति पैदा करनी चाहिए। इस विधेयक में संशोधन कर प्रकरणों का शीघ्र निपटारा करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सी.एस. पाटील ने विचार व्यक्त किए। न्यायाधीश के.एस. मुदगल, एस.जी. पंडित, अशोक किणगी, सूरज गोविंदराज, ज्योति मुलिमनी, प्रदीप सिंह येरूर आदि उपस्थित थे। के.सी. सदानंद स्वामी, एस.एम. जालवादी, अधिवक्ता संघ के कार्यकारी समिति के सदस्य, बीमा कम्पनी के अधिवक्ता, मुवक्किल, उच्च न्यायालय के कर्मचारियों ने भाग लिया था। कार्यक्रम में हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ के संयुक्त सचिव के.एच. बागी ने कार्यक्रम का संचालन कर अंत में आभार व्यक्त किया।

S F Munshi Reporting
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