कोप्पल का किष्किंधा है हनुमान की जन्मस्थली!

अंजनाद्री में हनुमान के दर्शन के लिए चढ़नी पड़ती हैं 576 सीढ़ियां। जनाद्री पर्वत पर स्थित हनुमनहल्ली, रामापुर जैसे क्षेत्रों में कई प्रमाण मिले हैं जो साबित करते हैं कि हनुमान का जन्म किष्किंधा में हुआ था।

By: MAGAN DARMOLA

Published: 18 Apr 2021, 09:10 PM IST

कोप्पल. कोप्पल जिले के गंगावती तालुक में स्थित हनुमान की जन्मस्थली कहलाया जाने वाला अंजनाद्री इन दिनों पुन: सुर्खियों में है। तिरुपति तिरुमला देवस्थान के लोगों का दावा है हनुमान का जन्म तिरुपति में हुआ था। कोप्पल के इतिहासकार भी यही कह रहे हैं कि हनुमान का जन्म किष्किंधा पर्वत पर हुआ था जो कोप्पल में स्थित था। कोप्पल जिले में स्थित किष्किंधा हनुमान की जन्मस्थली नाम से विख्यात है।

संस्कृत भाषा के अनुसार किष्किंधा का अर्थ तंग क्षेत्र समझा जाता है। कोप्पल जिले का अंजनाद्री भी अत्यंत तंग क्षेत्र है। हनुमान के दर्शन पाने के लिए यहां 576 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। किष्किंधा में कई प्रमाण मिले हैं जिससे यह सिद्ध होता है कि हनुमान का जन्म किष्किंधा क्षेत्र के अंजनाद्री में हुआ था। हजारों वर्ष पुराने इतिहास में भी इसका उल्लेख मिलता है। ईसा पूर्व सन् 1000 में उकेरे गए (तराशे) कई दस्तावेज हैं। उत्तर भारत व दक्षिण भारत से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हनुमान के दर्शन करने अंजनाद्री प्रतिदिन पहुंचते हैं।

स्थानीय इतिहासकार डॉ. शरणबसप्पा कोल्कार ने इस विषय पर अध्ययन कर पुस्तक लिखी है जिसमें अनेक दस्तावेजों का वर्णन है। आनेगुंदी से 10 कि.मी. की दूरी पर स्थित ईसा पूर्व 1069 में निर्मित शिलालेख में भी तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित किष्किंधा क्षेत्र का वर्णन है। पश्चिम दिशा में 20 कि. मी की दूरी पर स्थित ईसा पूर्व 1088 के शिलालेख में भी किष्किंधा का वर्णन है।

रामायण ग्रंथ में भी पंपा सरोवर का वर्णन है। साथ ही तुंगभद्रा नदी तट पर वेंकटापुर के पास टीला है जो बाली टीला नाम से विख्यात है। पौराणिक गाथाओं के अनुसार बाली को मारकर प्रभु श्रीराम ने उसका अंतिम संस्कार इसी स्थल पर किया था। कई पौराणिक गाथाएं इस क्षेत्र से जुड़ी हैं जिनके अनुसार सीता की तलाश में राम लक्ष्मण भी यहां आए थे। अंजनाद्री पर्वत पर स्थित हनुमनहल्ली, रामापुर जैसे क्षेत्रों में कई प्रमाण मिले हैं जो साबित करते हैं कि हनुमान का जन्म किष्किंधा में हुआ था। अंजनहल्ली अंजनादेवी का मायका कहलाता है। हनुमान का जन्म इसी पहाड़ पर हुआ था जिसकी वजह से यह पहाड़ अंजनाद्री नाम से विख्यात है।

अनुसंधानकर्ता डॉ. शरणबसप्पा कोलकार के अनुसार रामायण महाकाव्य में जिस किष्किंधा का उल्लेख है वह यहीं है। अंजनाद्री पर्वत के कई निशान आनेगुंदी के निकटवर्ती क्षेत्र में आज भी मौजूद हैं। यहां 4000 साल से भी अधिक प्राचीन प्रतिमाएं हैं जो वानरों की जीवन शैली को दर्शाता है।

ग्यारहवीं सदी के अनेक शिलालेखों में हनुमान के चरित्र का वर्णन है जो यह साबित करने के लिए काफी है कि हनुमान का जन्म स्थल किष्किंधा ही है । इतिहासकार शरण बसप्पा कोल्कार के अनुसार तुंगभद्रा नदी बह रही थी। कहा जाता है कि हनुमान की माता अंजना को जब पानी की आवश्यकता पड़ी तब हनुमान ने अपनी मां के लिए नदी की दिशा ही बदल दी। तब से नदी अंजनाद्री की ओर बहने लगी।

किष्किंधा का विहंगम दृश्य

त्रेतायुग में वानर राज्य कहलाए जाने वाले किष्किंधा के अधिपति महाराज बाली थे। रामायण में आनेगुंदी के निकटवर्ती कई क्षेत्रों का उल्लेख है। इससे संबंधित कई अभिलेख (रिकार्ड्स ) आज भी हैं। लोक साहित्य में भी इसका जिक्र है। हजारों सालों से यही आस्था लोगों में बनी हुई है कि हनुमान का जन्म अंजनाद्री में हुआ था। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार बाली महाराज जिस किले में रहते थे, वह आज भी यहां मौजूद है। यहां पर पंपा नदी है जिसका वर्णन स्कंद पुराण में मिलता है। इस स्थल से जुड़ी कई कथाएं भी हैं जैसे विरुपाक्ष से विवाह रचने से पूर्व पंपाविका ने इसी स्थल पर तपस्या की थी।

विजयनगर के राजा ने बनवाए कई राम मंदिर

विजयनगर साम्राज्य के राजा ने इस क्षेत्र के महत्व को जानकर राम-हनुमान की घनिष्ठता पर गौर करते हुए हम्पी में राम के कई मंदिरों का निर्माण किया। कई खंभों पर राम व हनुमान की प्रतिमाओं को उकेरा गया है। आनेगुंदी में हनुमान की कई मूर्तियां उकेरी गई हैं। कृष्णदेवराय के गुरु व्यासराय ने 770 हनुमान की मूर्तियां उकेरी हैं।

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