रखरखाव की कमी से स्टेडियमों की हालत खस्ता

रखरखाव की कमी से स्टेडियमों की हालत खस्ता

By: S F Munshi

Published: 28 Dec 2020, 08:33 PM IST

रखरखाव की कमी से स्टेडियमों की हालत खस्ता
हुब्बल्ली
उत्तर कर्नाटक के अधिकतर जिलों में जिला स्टेडियम ही युवा सशक्तिकरण तथा खेल विभाग की खेल गतिविधियों के मंच के रूप में इस्तेमाल होते हैं। सिंथेटिक ट्रैक वाले धारवाड़, बेलगावी, बल्लारी तथा गदग के स्टेडियम एथलीट के लिए सुविधा बने हैं परन्तु वॉकिंग करने वाले भी इसी ट्रक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस भाग में कई खिलाडिय़ों के होने के बाद भी जिले के लिए एक भी सिंथेटिक ट्रैक नहीं है। मौजूदा ट्रैक रखरखाव की कमी का सामना कर रहे हैं।
विजयपुर, हावेरी, कारवार में स्थित माला देवी स्टेडियम, सिरसरी स्थित जिला स्टेडियम, बेलगावी, बल्लारी, हुब्बल्ली के नेहरू स्टेडियम तथा होसपेट तालुक स्टेडियम में कई बार राजनीतिक कार्यक्रम होते हैं। इसके बाद सफाई नहीं करने के कारण स्टेडियम की खूबसूरती ही बर्बाद हो रही है। सिंथेटिक ट्रैक वाले जिलों में भी हर वर्ष गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस इस प्रकार राष्ट्रीय त्योहारों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। धारवाड़ के आरएन शेट्टी स्टेडियम में राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजन के करने पर सिंथेटिक खराब होता है। राष्ट्रीय दिवस कार्यक्रमों के लिए वैकल्पिक स्टेडियम व्यवस्था करने की मांग को लेकर आंदोलन करने पर भी लाभ नहीं हुआ।
बेलगावी के केएलई परिसर स्थित खेल विभाग का स्टेडियम खिलाडिय़ों के लिए ही अधिक इस्तेमाल होता है। बागलकोट में साइक्लिंग, कुश्ती से संबंधित गतिविधियां चल रही हैं। इस स्टेडियम को राजनीतिक पार्टियों के कार्यक्रमों को नहीं देना विशेष है। गदग स्टेडियम हॉकी, फुटबॉल तथा एथलेटिक्स खेलों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
हावेरी स्टेडियम में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। त्योहार के दौरान ट्रकों को धोकर पूजा करने के लिए इस स्टेडियम का इस्तेमाल किया जा रहा है। न्यूनतम वॉलीबाल नेट की सुविधा भी नहीं होने के कारण स्थानीय खिलाड़ी पेड़ पर नेट बांधकर खेलते हैं। होसपेट स्टेडियम में हाईमास्ट लाइट की व्यवस्था होने पर भी कभी- कभार इस्तेमाल करते हैं। इसके चलते श्वान, सुअरों के लिए स्टेडियम पनाहगाह बना हुआ है।
उत्तर कर्नाटक के धारवाड़, बल्लारी, बेलगावी तथा गदग जिले में सिंथेटिक ट्रैक हैं। हावेरी, बागलकोट, उत्तर कन्नड़ तथा विजयपुर जिलों में सिंथेटिक ट्रैक सुविधा नहीं है।
पुराने सिंथेटिक ट्रैक
कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एथलीटों को देने वाले मेंगलूरु में सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण वर्ष 2012 में हुआ था। मेंगलूरु स्टेडियम स्थित यह ट्रैक अब पुराना हो गया है। ओलंपिक्स शिविर में रह रहीं पूवम्मा कुछ दिनों से यहीं अभ्यास कर रही हैं। एथलीट की दृष्टि से यहां नए सिरे से सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण होना चाहिए। स्मार्ट सिटी योजना के तहत इस स्टेडियम को विकसित किया जा रहा है। नया भवन व गैलरी निर्माण की जा रही है। इसके साथ ही लोग सुस’िजत तरणताल की भी उम्मीद कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल लेडीहिल में नगर निगम की देखरेख में तरणताल मात्र है। कई जगहों पर जमीन देखने के बाद येम्मेकेरे में स्मार्टसिटी योजना के तहत तरणताल निर्माण करने का फैसला लेकर हाल ही में कार्य शुरू किया गया।
सिंथेटिक ट्रैक के लिए प्रस्ताव
दावणगेरे के जिला स्टेडियम में अभी भी मिट्टी का ट्रैक होने से अभ्यास करने के लिए एथलीट को समस्या हो रही है। इसके चलते युवा मामलात एवं खेल विभाग ने यहां लगभग सात करोड़ रुपए की लागत में सिंथेटिक ट्रैक निर्माण तथा स्टेडियम विकसित करने के लिए कार्ययोजना तैयार केंद्र सरकार को प्रस्ताव सौंपने का फैसला लिया है।
युवा मामलात एवं खेल विभाग के अधिकारी का कहना है कि यहां खेल छात्रावास में प्रवेश प्राप्त छात्र कुश्ती, कबड्डी, खो-खो तथा एथलेटिक्स का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। कुश्ती, कबड्डी तथा खो-खो में यहां के छात्र राज्य तथा राष्ट्र स्तर पर पुरस्कार प्राप्त कर रहे हैं। पिछले वर्ष ही एथलेटिक्स विभाग आरम्भ किया गया है।
रखरखाव का खर्च ही अधिक
शिवमोग्गा के बेहद पुराने नेहरू स्टेडियम इंडोर स्टेडियम है। गोपाल का स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में संग्रह होने वाली राशि से रखरखाव के लिए किया जा रहा खर्च ही अधिक है। दशक पूर्व ही सिंथेटिक ट्रैक से लैस नेहरू स्टेडियम रखरखाव की कमी से जूझ रहा है। किसी भी स्कूल के खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित करने पर एक हजार रुपए, संघ-संस्थाओं की खेल गतिविधि के लिए दो हजार रुपए शुल्क लिया जाता है। वार्षिक लगभग चार लाख संग्रह होने पर किया जाना वाला खर्च 20 लाख पार होता है। इंडोर स्टेडियम में फिलहाल सदस्यों की संख्या सौ पार नहीं हुई है। हर सदस्य से 5,500 रुपए संग्रह किया जा रहा है। वार्षिक रखरखाव खर्च 25 लाख रुपए पार हो रहा है। बिजली का बिल ही चार लाख रुपए आता है। स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में ग्रीष्मकालीन शिविरों के आयोजन होने पर लगभग 20 लाख रुपए संग्रह होते हैं। खर्च 15 लाख रुपए है। इस वर्ष कोरोना के कारण वहां भी घाटा हुआ है। सागर, शिकारीपुर समेत तालुक केंद्रों में स्टेडियम से एक पैसा भी आय नहीं है। वहां के पहरेदारों, प्रबंधकों को जिला पंचायत की ओर से वेतन दिया जा रहा है। अब सरकार ने इसे रोका है। इसके चलते स्टेडियम की हालत बेहद खस्ता हो गई है।
शिवमोग्गा के नेहरू स्टेडियम से स्थित खेल होस्टल में 60 छात्र हैं, भोजन को छोडक़र रखरखाव के लिए वार्षिक 20 लाख रुपए का अनुदान है परन्तु दस वर्ष पूर्व करोड़ रुपए खर्च कर के कृषि नगर में निर्मित खेल होस्टल को अब तक खेल विभाग को हस्तांतरित नहीं किया गया है।

S F Munshi Reporting
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