उस्तादों का हाल बेहाल, जीवन-यापन हुआ मुश्किल

उस्तादों का हाल बेहाल, जीवन-यापन हुआ मुश्किल
-कोरोना से प्रभावित हुई कुश्ती की गतिविधियां
हुब्बल्ली

By: Zakir Pattankudi

Updated: 22 Jul 2021, 10:05 AM IST

उस्तादों का हाल बेहाल, जीवन-यापन हुआ मुश्किल
हुब्बल्ली
कोरोना की पहली तथा दूसरी लहर के कारण दो वर्षों से कुश्ती से संबंधित कोई भी गतिविधियां नहीं हुई। इसके चलते कुश्ती पर निर्भर प्रशिक्षकों तथा उस्तादों का हाल-बेहाल हो गया है। उनके लिए जीवन-यापन करना मुश्किल हुआ है।
हर वर्ष धारवाड़, बेलगावी, उत्तर कन्नड़ समेत कई जिलों में आए दिन कुश्ती प्रतियोगिताएं होती थीं। राज्य सरकार कर्नाटक कुश्ती त्योहार का आयोजन करती थी। गांव के मेलों तथा उत्सवों में पहलवान अपनी ताकत का प्रदर्शन करते थे।
नियमित कुश्ती प्रतियोगिताओं के आयोजन से बालक अधिक संख्या में इस खेल के दांवों को सीख रहे थे। ग्रामीण, शहरी इलाकों में अखाड़ों तथा खुले मैदान में कुश्ती के दांव-पेच बताने से प्रशिक्षकों तथा उस्तादों को भी थोड़ी आय मिलती थी। सरकार की ओर से आयोजित कुश्ती प्रतियोगिताओं में हारने, जीतने या फिर प्रतियोगिताओं में बतौर कर्मचारी काम करने पर भी पैसे मिलते थे। दो वर्षों से इनमें से कोई भी गतिविधि नहीं होने के कारण प्रशिक्षकों को दैनिक जीवन यापन कुश्ती का अखाड़ा बन गया है।
धारवाड़ के सिध्देश्वर नगर के शंकर कुलावी गांव-गांव घूमकर सुबह से शाम तक स्टेशनरी सामान बेच रहे हैं, कुश्ती से अपार प्रेम रखने वाले कुलावी शाम को 42 बच्चों को कुश्ती सिखाते थे। इसके लिए अखाड़े का निर्माण करने की मांग को लेकर जिले के जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ।

प्रतियोगिताएं भी नहीं और रकम भी नहीं

सुडुगाडु सिध्द समूह के शंकर ने जिद नहीं छोड़ी, अपनी जमीन पर ही कुश्ती सिखा रहे थे। खुद के पैसों से नन्हें पहलवानों को सप्ताह में एक दिन दूध, मीठी सूजी देते थे। प्रतियोगिताओं के आयोजन होने पर उन्हें थोड़ी रकम मिलती थी। अब प्रतियोगिताएं भी नहीं हैं और रकम भी नहीं मिल रही है।

राशि खर्च करने की ताकत नहीं रही

खुले मैदान में दंगल आयोजित करने पर थोड़ा पैसा मिलता था। राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने की क्षमता हासिल करने के लिए पहलवानों को तैयार करना तथा भोजन के लिए न्यूनतम 500 से 600 रुपए खर्च होता है। इतनी राशि खर्च करने की ताकत मौजूदा हालात में किसी के पास नहीं है। प्रतियोगिताएं नहीं चल रही हैं।
-शंकर, प्रशिक्षक

फिटनेस के लिए करना है अभ्यास

कोविड के कारण कुश्ती प्रतियोगिताएं नहीं चल रही हैं। कुश्ती के खिलाडिय़ों को पहले वैक्सीन लगवानी चाहिए। फिलहाल फिटनेस के लिए अभ्यास करना चाहिए।
-श्रीनिवास शास्त्री, मानद अध्यक्ष, जिला कुश्ती संघ

Zakir Pattankudi Incharge
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